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CLASS 12 अध्याय मार्क्सवाद

मार्क्सवाद समाज का रूप है इसका प्रमुख प्रतिपादक कार्ल मार्क्स है कार्ल मार्क्स ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर समाजवाद का प्रतिपादन किया अतः इसे वैज्ञानिक समाजवाद का जनक कहा जाता है मार्क्सवाद वह विचारधारा है इसका आधार मार्क्स के विचार हैं उन्नीसवीं शताब्दी में कार्ल मार्क्स व एंजिल्स ने मिलकर दर्शन इतिहास समाजशास्त्र विज्ञान अर्थशास्त्र की अलग-अलग समस्याओं को हल करने के लिए एक सुनिश्चित वे एक नया दृष्टिकोण विश्व के सामने रखा इसी दृष्टिकोण को वह विचारधारा को विश्व में मार्क्सवाद के नाम से जाना जाता है

कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय कार्ल मार्क्स का जन्म 1818 मैं एक यहूदी परिवार में हुआ कार्ल मार्क्स के पिता का नाम एनरिक मार्क्स था वह एक वकील थे कार्ल मार्क्स ने बर्लिन विश्वविद्यालय मैं अध्ययन किया यहां पर मार्क्स में हीगल के द्वंद्वात्मक दर्शन का परिचय किया 18 41 में मार्क्स ने जेना विश्वविद्यालय से उपाधि हासिल की 1843 मे, 25 वर्ष की आयु में चीनी नाम की महिला से विवाह किया 1849 में मार्क्स इंग्लैंड गए वहां पर उनकी मित्रता एंजिल्स से जो जीवन भर तक रही 14 मार्च 1883 में लंदन में कार्ल मार्क्स का देहांत हो गया



मार्क्स के दर्शन स्रोत
1 एबेनसटीन के अनुसार अपनी खुद की कष्टपूर्ण और लंबी खोज में मार्क्स ्कोअपना दर्शन किसी विचारक स नहीं मिला उसने विभिन्न स्रोतों के से एकत्र किया े
2, गेटले के अनुसार मार्क्सवाद का मुख्य आधार ऐतिहासिक भौतिकवाद में वर्ग सिद्धांत कां ह ै मार्क्सवाद का दूसरा आधार अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत है मार्क्स का तीसरा आधार फ्रांसीसी क्रांति व फ़्रांसिसी समाजवाद के तत्वों को शामिल करके बनाया गया है

मार्क्सवाद समाज का रूप है इसका प्रमुख प्रतिपादक कार्ल मार्क्स है कार्ल मार्क्स ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर समाजवाद का प्रतिपादन किया अतः इसे वैज्ञानिक समाजवाद का जनक कहा जाता है मार्क्सवाद वह विचारधारा है इसका आधार मार्क्स के विचार हैं उन्नीसवीं शताब्दी में कार्ल मार्क्स व एंजिल्स ने मिलकर दर्शन इतिहास समाजशास्त्र विज्ञान अर्थशास्त्र की अलग-अलग समस्याओं को हल करने के लिए एक सुनिश्चित वे एक नया दृष्टिकोण विश्व के सामने रखा इसी दृष्टिकोण को वह विचारधारा को विश्व में मार्क्सवाद के नाम से जाना जाता है

कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय कार्ल मार्क्स का जन्म 1818 मैं एक यहूदी परिवार में हुआ कार्ल मार्क्स के पिता का नाम एनरिक मार्क्स था वह एक वकील थे कार्ल मार्क्स ने बर्लिन विश्वविद्यालय मैं अध्ययन किया यहां पर मार्क्स में हीगल के द्वंद्वात्मक दर्शन का परिचय किया 18 41 में मार्क्स ने जेना विश्वविद्यालय से उपाधि हासिल की 1843 मे, 25 वर्ष की आयु में चीनी नाम की महिला से विवाह किया 1849 में मार्क्स इंग्लैंड गए वहां पर उनकी मित्रता एंजिल्स से जो जीवन भर तक रही 14 मार्च 1883 में लंदन में कार्ल मार्क्स का देहांत हो गया



मार्क्स के दर्शन स्रोत
1 एबेनसटीन के अनुसार अपनी खुद की कष्टपूर्ण और लंबी खोज में मार्क्स ्कोअपना दर्शन किसी विचारक स नहीं मिला उसने विभिन्न स्रोतों के से एकत्र किया े
2, गेटले के अनुसार मार्क्सवाद का मुख्य आधार ऐतिहासिक भौतिकवाद में वर्ग सिद्धांत कां ह ै मार्क्सवाद का दूसरा आधार अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत है मार्क्स का तीसरा आधार फ्रांसीसी क्रांति व फ़्रांसिसी समाजवाद के तत्वों को शामिल करके बनाया गया है

जर्मन विद्वानों का प्रभाव मार्क्स ने समाज के विकास के लिए हीगल के द्वंद्वात्मक पद्धति को अपनाया मार्क्स ने भौतिकवाद का विचार हीगल वादी फायर बाग से लिया

2 ब्रिटिश अर्थशास्त्रियों का चिंतन मार्क्स ने श्रम के मुख्य सिद्धांत को एडम स्मिथ रिकार्डो के सिद्धांत से अपनाया मुख्य सिद्धांत के आधार पर मार्क्स ने अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत का प्रतिपादन किया

3 फ्रांसीसी समाजवादियों का चिंतन उत्पादन के साधनों पर स्वामित्व का सिद्धांत श्रमिकों का उत्पादन व उनका शोषण करने वाले वर्ग के विनाश का सिद्धांत मार्क्स ने फ्रांस चिंतन से प्राप्त किया

4 सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों तत्कालीन पूंजीवादी समाज के शोषण वाले चरित्र में भी मार्च मास्क क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया मार्क्स ने अपने समाजवाद के सिद्धांतों को तो बहुत से विचार को के सिद्धांतों से प्रेरित होकर एकत्र किया परंतु उसने एक ऐसा समाज का स्वरूप प्रस्तुत किया जिसमें सभी वर्गों को शक्ति प्रदान की गई है मार्क्स में समाजवाद का वैज्ञानिक रूप प्रदान किया इसी कारण मार्च को वैज्ञानिक समाजवाद का जनक कहा जाता है

मार्क्स के प्रमुख विचार में मार्क्सवाद की मूल मान्यताएं
1 द्वंद्वात्मक भौतिकवाद- मार्क्स के संपूर्ण चिंतन का मूल आधारद्वंद्वात्मक भौतिकवाद है यह सिद्धांत भौतिकवाद की मान्यताओं को द्वंद्वात्मक प्रणाली को साथ मिलाकर समाज में परिवर्तन करने का प्रयास करता है इस सिद्धांत के प्रतिपादन में मार्क्स ने द्वंद्वात्मक का विचार हेगेल. के द्वंद्वात्मक वादी पद्धति से तथा भौतिकवाद का विचार फायर बाग से प्रभावित होकर ग्रहण किया द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में दो शब्द हैं पहलाद्वंद्वात्मक है जिसके अनुसार सृष्टि का विकास हो रहा है दूसरा शब्द भौतिकवाद है जो सृष्टि के मूल तत्वों का विकास करता है

भौतिकवाद जहां हेगेल का मूल तत्व चेतना या विश्वात्मा को मानता है वही मार्क्स का मूल तत्व जड़ को मानता है

द्वंद्वात्मक भौतिकवाद की विशेषताएं 1 विश्व स्वतंत्र है यह समग्र इकाई है जिसकी समस्त वस्तुओं पर निर्भर है
2प्रकृति और गतिशील और निरंतर परिवर्तनशील ह
ै 3वस्तु में गुणात्मक परिवर्तन धीरे धीरे ने ने हो कर शीघ्रता के साथ अचानक होते हैं
4द्वंद्वात्मक के अनुसार वस्तुओं में विकास और परिवर्तन की प्रक्रिया सरल है
5द्वंद्वात्मक भौतिकवाद प्राकृतिक जगत की आर्थिक तत्वो के आधार पर व्याख्या करता है



द्वंद्वात्मक सिद्धांत की आलोचनाएं 1इस सिद्धांत में मनुष्य की आत्मा उपेक्षा की गई है
2 जड़ जगत को निरंतर गतिशील मानना उचित नहीं क्योंकि गति चेतन पदार्थों से संभव है
3 संसार में विरोध में संघर्ष सामान्य रूप से होता है

द्वंद्वात्मक विकास के नियम 1विपरीत की एकता और संघर्ष संघर्ष का नियम 2परिणाम से * की ओर परिवर्तन 3निषेध का निषेध नियम

2 ऐतिहासिक भौतिकवाद मार्क्सवाद के अनुसार ऐतिहासिक भौतिकवाद को द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के पूरक सिद्धांत के रूप में माना गया है ऐतिहासिक भौतिकवाद आर्थिक व्याख्या का इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या भी कहा जाता है मार्क्स के अनुसार इतिहास में जो भी परिवर्तन में घटनाएं होती को आर्थिक कारणों से होती है मां किस बात से सहमत नहीं है ती की कुछ विशेष में महान व्यक्तियों के कार्यों का परिणाम है मार्क्स ने मानव इतिहास के विकास पर आर्थिक तत्व का प्रभाव स्पष्ट करते हुए इसकी अवस्थाओं का उल्लेख किया है
1आदिम साम्यवादी व्यवस्था
2दास अवस्था
3 सामान्य अवस्था
4 पूंजीवादी व्यवस्था
4 सर्वहारा वर्ग जाति
अधिनायक 5साम्यवादी व्यवस्था
मार्क्स के अनुसार समाज के दो भाग होते हैं 1आधार 2 अधिरचना
1 आधार मार्क्स ने अर्थव्यवस्था में उत्पादन प्रणाली को शामिल किया है 2अधिरचना इसमें ं सामाजिक राजनीतिक और सांस्कृतिक अवस्था को शामिल किया है
1शोषक वर्ग मार्क्स के अनुसार अर्थव्यवस्था में प्रणाली पर किसका जिसका नियंत्रण होता है उसे शोषक वर्ग कहतें
2शोषित वर्ग मार्क्स के अनुसार जो वर्ग शोषक वर्ग के अधीन कार्य करता है उसे शोषित वर्ग कहते हैं
* इतिहास की आर्थिक व्याख्या के निष्कर्ष 1मानव जीवन में सभ्यता का विकास ईश्वर में महापुरुष के कार्यों से नहीं होता है बल्कि आर्थिक तत्वो के कार्यों से होता है 2 प्रत्येक युग में सामाजिक व राजनीतिक व्यवस्था पर उसी का नियंत्रण होता है जिसका आर्थिक व्यवस्था पर नियंत्रण होता है
3आर्थिक परिवर्तनों से राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन होता है 4इतिहास की आर्थिक व्यवस्था से पूंजीवाद के अंत में साम्यवाद के आगमन की घोषणा करता है
*इतिहास की आर्थिक व्याख्या की आलोचना 1 आर्थिक तत्व पर अधिक में अत्यधिक बल 2 आर्थिक आधार पर सभी ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या संभव नहीं 3 इतिहास निर्धारण में संयुक संयोग ्त व उपेक्षा 4 मानवीय इतिहास के कार्यक्रम का निर्धारण संभव नही 5ं राजनीतिक सत्ता का एकमात्र आधार आर्थिक सत्ता नहीं 6 आर्थिक संबंधों को राजनीतिक शक्ति द्वारा बदला जाता है 7 इतिहास की धारणा का राज्य विहीन समाज पर आकर रुकना संभव नहीं * वर्ग संघर्ष का सिद्धांत मार्क्स के अनुसार पूंजीपति और श्रमिक वर्ग के मध्य आपसी हीतो को लेकर उत्पन्न संघर्ष को वर्ग संघर्ष कहा जाता है माक्स अपनी पुस्तक कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में अब तक के समाज के संपूर्ण इतिहास को वर्ग संघर्ष का इतिहास बताया है * वर्ग संघर्ष की आलोचना 1एकांकी में दोषपूर्ण 2सामाजिक जीवन का मूल तत्व सहयोग है संघर्ष नहीं ,3समाजमें केवल 2 वर्ग ही नहीं होते हैं 4सामाजिक व आर्थिक वर्ग में अंतर होता है 5क्रांति श्रमिक वर्ग के बजाए बुद्धिजीवी वर्ग से संभव है 6समस्त इतिहास वर्ग संघर्ष के सिद्धांत नहीं है



अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत के मार्क्स अनुसार उपयोगिता मूल्य व विनिमय मूल्य का अंतर अतिरिक्त मूल्य कहलाता है मार्क्स इस अतिरिक्त मूल्य पर श्रमिक वर्ग का अधिकार मानता है लेकिन पूंजीपति वर्ग इस पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लेते हैं मार्क्स के अनुसार इस अतिरिक्त मूल्य से समाज पर तीन दुष्प्रभाव पड़ते हैं 1 श्रमिकों के खराब दशा 2 सर्वहारा क्रांति का कारण 3
अधिक जनसंख्या का कारण

अलगाव का सिद्धांत मार्क्स के अनुसार पूंजीवादी के कारण मनुष्य अलगाव का शिकार हो गया है इसे युवा मार्क्सवाद या तरुण मार्क्सवाद भी कहा जाता है अलगाव निम्न प्रकार से देखा जाता है 1उत्पादन प्रणाली 2 पर्यावरण 3 साथियों से अलगाव 4 स्वयं से अलगाव

पूंजीवाद का विश्लेषण में भविष्य संबंधी धारणा पूंजीवाद लाभ के लिए पालन करता है इसमें परस्पर दो विरोधी वर्गों का हित पाया जाता है तथा पूंजीवादी की पूंजी में निरंतर वृद्धि हो जाती है जिससे अति उत्पादन संकट उत्पन्न हो जाता है और इसके पूंजीपतियों प्रति योगिता का तत्व अंत हो जाता है पूंजीवाद की समाप्ति हो जाती है

राज्य में शासन संबंधी धारणा भारत मार्क्स की राज्य में वह शासन संबंधी विचारधारा अन्य सभी विचारों से अलग है कार्ल मार्क्स के अनुसार राज्य एक वर्गीय संस्था है तथा राज्य की उत्पत्ति की वर्ग विभेद है राज्य शोषण का यंत्र है राज्य की उत्पत्ति का कारण वर्ग विविध है वह राज्य शोषक वर्गों की सहायता करता है राज्य शासन शोषण का यंत्र है तथा यह क्वेश्चन शोषक वर्ग द्वारा शोषित वर्ग के शोषण में सहायता करता है

आलोचना 1 राज्य संगठन नहीं बल्कि नैतिक संगठन है 2वर्तमान में राज्य सर्वहारा वर्ग का शत्रु नहीं मित्र हैं जो सर्वहारा के कल्याण हेतु कार्य कर रहा है राजयअस्थाई नहीं है बल्कि स्थाई है
लोकतंत्र धर्म और राष्ट्रवाद के संबंध में मार्क्सवाद की धारणा मार्क्स लोकतंत्र धर्म में राष्ट्रवाद को शोषित वर्ग वर्ग के शोषण का साधन मानता है तथा धर्म को अफीम के संज्ञा देता है जो श्रमिकों का शोषण करता है मार्क्स के अनुसार मजदूरों का कोई देश नहीं होता है इसलिए विश्व के सभी मजदूरों को एक साथ रहना चाहिए
मार्क्सवादी कार्यक्रम
मार्क्सवादी कार्यक्रम के तीन चरण हैं
1
पूंजीवादी व्यवस्था के विरुद्ध क्रांति 2
सर्वहारा वर्ग के अधिनायक तत्वों की स्थापना 3राज्यविहीन वर्ग विहीन समाज की स्थापना करना अर्थात पूर्ण साम्यवादी समाज की स्थापना करना
मार्क्सवाद की आलोचना 1
हिंसा में क्रांति को प्रोत्साहन 2
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का शत्रु 3
अधिनायकवाद का समर्थक 4द्वंद्वात्मक भौतिकवाद और इतिहास की आर्थिक व्याख्या की धारणा एक पक्षीय हैं तथा कल्पनात्मक है 5राज्य के विलुप्त होने की धारणा काल्पनिक हैं 6राज्य को शोषण का यंत्र मानना अनुचित है 7लोकतंत्र धर्म और राष्ट्रवाद के संबंध में मार्क्सवाद की धारणा अनुचित है
राजनीतिक सिद्धांत में मार्क्सवाद का योगदान
1
मार्क्सवाद विभिन्न विचारधाराओं को आधार प्रदान करता है 2ं उदारवाद को चुनौती दी है3
ं मार्क्सवाद समाजवाद को एक व्यवहारिक में वैज्ञानिक रूप प्रदान करता है 4इसके कारण श्रमिक वर्ग में जागृति आई है मार्क्स ने में 5राज्य का अर्थात चित्र प्रस्तुत किया है