कक्षा 12 अध्याय उदारवाद

अध्याय 7 राजनीतिक सहभागिता

ARTS, CLASS 12

अध्याय 7 राजनीतिक सहभागिता 

राजनीतिक सहभागिता का अर्थ-

राजनीतिक सहभागिता से तात्पर्य राजनीतिक व्यवस्था में नागरिकों के संपूर्ण भागीदारी से हैं यह व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर बल देती है
1 मौलिकता के आधार पर- “जनसाधारण की राजनीतिक व्यवस्था में जनता द्वारा प्रत्यक्ष रुप से भाग लेना”

राजनीतिक सहभागिता के स्वरूप-

सिद्धांत के रूप में राजनीतिक सहभागिता के दो रूप पाए जाते हैं
1 विकासपरक
2 लोकतांत्रिक
राजनीतिक से पाकिस्तान ने लोकतांत्रिक नीति के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी को बताया है वोट देने में दिलाने चंदा देने याचिका प्रस्तुत करने रेली निकालने तथा धरना प्रदर्शन सभी राजनीतिक सहभागिता के औजार है।

नागरिक चेतना और सहभागिता-




नागरिकों के चेतना उनका शैक्षिक स्तर वैचारिक धरातल में तत्व है जो नागरिकों के राजनीतिक सहभागिता का निर्माण करते हैं इसलिए जिन देशों के साक्षरता दर ज्यादा होती है वहां के नागरिकों के राजनीतिक सहभागिता भी उतनी ही अधिक होती है यूरोपीय देशों की तुलना से एशियाई अफ्रीकी देशों में साक्षरता का दर कम होना ही राजनीतिक सहभागिता को बताने का आधार है।

 

राजनीतिक सहभागिता का अभिजात्य स्वरूप-

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की सहभागिता प्रथम होना अनिवार्य शर्त है जोसेफ शुंपीटर का कहना है कि शासन चलाना तथा सार्वजनिक नीतियां बनाना राजनीतिक का काम है या सामान्य जनता का काम जून चुनाव में अपनी पसंद की राजनीतिक दलों के द्वारा अपने प्रतिनिधि चुनने हैं ऐसी व्यवस्था में नागरिकों की सहभागिता का महत्व कम होता है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है।


राजनीतिक सहभागिता का स्वरूप-

राजनीतिक सहभागिता महाविद्या जिससे कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक नीति तथा नियमों के निर्माण निर्धारण में प्रत्यक्ष रुप से भाग लेता है मतदान में भाग लेने वाले नागरिक की प्रतिशत मात्रा कोई राजनीतिक सहभागिता का सूचक माना जाता है इसके अन्य तरीके हैं जिन में निम्न प्रमुख है।

1 सार्वजनिक गतिविधियां-

इससे किसी समुदाय के सभी व्यक्ति सामूहिक हितों की पूर्ति के लिए मिलजुल कर कार्य करते हैं जब कोई भी व्यक्ति व्यक्ति का स्वभाव जनहित के लिए जुलूस विरोध प्रदर्शन हड़ताल करना आदि में भाग लेता है तो उसे भी राजनीतिक सहभागिता कहा जाता है

2 सरकार और नागरिकों को भी सक्रिय परस्पर- राजनीतिक सहभागिता के कार्य को स्वरूप देने के लिए व्यक्तियों राज्य सरकार दोनों पहल करती है


राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख अभिकरण-

1 दबाव समूह-

इसमें लोगों के संगठन के द्वारा अपने किसी समाज हित के लिए लोगों को एकत्र करने हे तथा अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाते हैं ताकि उनके हितों की पूर्ति हो सके

2 प्रस्ताव तैयार करना-

लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई प्रतिनिधि किसी कानूनी संविधान संशोधन का प्रारूप तैयार कर विधानमंडल के पास विचार-विमर्श के लिए भेजता है यह प्रणाली स्विट्जरलैंड में प्रभावी है।

3 प्रतिनिधि वापस बुलाना-

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधि को उसके कार्यकाल पूरा होने से पहले उसे पद से हटा सकती है।

4 जनसुनवाई-

यह प्रक्रिया जिसमें प्रतिनिधि तथा सार्वजनिक अधिकार लोगों के विचार तथा समस्याओं को जानने का प्रयास करते हैं या अधिकारी के सामने मौखिक या लिखित रुप में प्रस्तुत की जाती है।

5 सलाहकार परिषद-

आजकल सरकार अपने विभिन्न कार्यों के विशेष मुद्दों पर सलाह लेने हेतु गण माननीय बुद्धिमान व्यक्तियों का एक संगठन बनाते जिससे सलाहकार परिषद कहा जाता है।

6 किसी प्रश्न पर निर्णय हेतु मतदान-

यह प्रक्रिया इसमें कितने कानून संविधान संशोधन के प्रश्न पर जनसाधारण से मतदान कराया जाता है।

7 सविनय अवज्ञा-

यह प्रक्रिया है, जिसमें खुले रुप से विरोध किया जाता है तथा किसी विशेष मुद्दे पर जनता में सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता है।

8 राजनीतिक प्रति हिंसा-

यह विरोध प्रदर्शन का सबसे गलत तरीका है जिस में बमबारी हत्या लोगों को बंधक बनाकर बताओ राजनीतिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर विरोध किया जाता है तथा अपनी मांग पूरी कराई जाती है।


राजनीतिक सहभागिता की उपादेयता-

लोकतंत्र में सार्वजनिक निर्माण तक पहुंचने में नागरिकों के राजनीतिक सहभागिता का विस्तार होना जरूरी है इस उद्देश्य को पूरा करने के दो तरीके हैं
1 सत्ता का विकेंद्रीकरण कर के बहुत सारे फैसले स्थानीय समुदाय का हाथों में हो।
2 सार्वजनिक योजनाएं निर्धारित करने के लिए किसी विशेष विषया प्रस्ताव को जनता द्वारा शुरू करने पर जोर  दिया जाए।

राजनीतिक सहभागिता के पक्ष में दृष्टिकोण-




1 राजनीतिक सहभागिता व्यक्तियों के हितों की रक्षा करते तथा उन्हें बढ़ावा देती है।
2 राजनीतिक सहभागिता सामान्य अर्थों के लिए नागरिकों में जागरूकता का विकास करती है।