अर्थशास्त्र

तटस्थता वक्र विश्लेषण

धन की मात्रा सिद्धांत - फिशर कातटस्थता वक्र विश्लेषण

 

तटस्थता वक्र का अर्थ
तटस्थता वक्र को उदासीनता वक्र या अनधिमान वक्र भी कहते हैं। इस वक्र सम संतुष्टि वक्र भी कहा जाता है। इस वक्र के प्रत्येक बिंदु पर उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। अनधिमान वक्र दो वस्तुओं के उन संयोगों को दर्शाता है जो समान संतुष्टि प्रदान करते हैं। समान संतुष्टि मिलने के कारण उपभोक्ता इस वक्र के सभी बिंदुओं के प्रति तटस्थ या उदासीन हो जाता है, इस कारण इसे उदासीनता वक्र भी कहा जाता है। किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि उपभोक्ता उन दोनों वस्तुओं के उपभोग के प्रति उदासीन है बल्कि उपभोक्ता दोनों वस्तुओं के विभिन्न संयोगों के प्रति उदासीन होता है।
Note:- एक तटस्थता वक्र के सभी बिंदुओं पर संतुष्टि का स्तर समान होता है परंतु भिन्न-भिन्न वक्रों पर संतुष्टि का स्तर भिन्न-भिन्न होता है।



तटस्थता तालिका
यह दो वस्तुओं के विभिन्न संयोगों की एक ऐसी तालिका होती है, जिसके प्रत्येक संयोग से उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। इस अनुसूची के प्रत्येक संयोग के प्रति उपभोक्ता की पसंद समान रहती हैं और वह किसी एक संयोग को चुनने में तटस्थ रहता है।
तटस्थता वक्र
तटस्थता अनुसूची की सहायता से जब वक्र का निर्माण किया जाता है, तो प्राप्त वक्र को तटस्थता वक्र कहा जाता है।
तटस्थता वक्रों की मान्यताएँ :-
बमोल के अनुसार तटस्थता वक्र की तीन प्रमुख मान्यताएं होती हैं:-
(1) अतृप्तता
(2) सकर्मकता
(3) घटती हुई प्रतिस्थापन की सीमांत दर




तटस्थता वक्रों की विशेषताएं:-
ऊंचे तथा दाहिनी ओर के तटस्थता वक्र अधिक संतुष्टि के स्तर को व्यक्त करते हैं।
तटस्थता वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है तथा ये ऊपर से नीचे दाहिनी ओर झुकते हैं।
दो तटस्थता वक्र आपस में कभी नहीं काटते हैं।
तटस्थता वक्र मूल बिंदु के प्रति उन्नतोदर होते हैं।