सामाजिक न्याय

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सामाजिक न्याय

न्याय की जब बात की जाती है तब समानता स्थापना की बात भी की जाती है। अर्थात न्याय एक ऐसी अवधारणा है जो समानता की बात करती है। जैसे आर्थिक न्याय – आर्थिक असमानता को समाप्त कर समानता लाने का प्रयास करता है। राजनीतिक न्याय के अंतर्गत सभी को राजनीति में भाग लेने का समान अवसर को लेकर प्रयास किए जाते हैं।
सामाजिक न्याय
सामाजिक स्थिति के आधार पर व्यक्तियों में भेदभाव न हो और प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के पूर्ण अवसर प्राप्त हो सके। राज्य से भी यही अपेक्षा की जाती है कि वह नीति निर्माण करते समय समतामूलक समाज की स्थापना में सहायक हो। समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ लिंग, जाति, वर्ग आदि आधार पर भेद नहीं हो सभी को समान अवसर प्राप्त हो यही सामाजिक न्याय हैं।
नोट:- समाज में समानता स्थापित किए बगैर हमारा आर्थिक समानता और स्वतंत्रता जैसे विषयों पर चर्चा करना व्यर्थ है। अतः पहले सामाजिक न्याय की स्थापना की जाये फिर आर्थिक न्याय की मांग की जानी चाहिए।

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