Consumer’s  Equilibrium  उपभोक्ता के संतुलन

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Consumer’s  equilibrium        उपभोक्ता के संतुलन

Total utility कुल उपयोगिता

The sum of utilities derived from all the consumed units is called total utility

उपभोग की गई समस्त इकाइयों से प्राप्त उपयोगिताओं के योग को कुल उपयोगिता कहा जाता है

Relationship in marginal utility and total utility

सीमांत उपयोगिता एवं कुल उपयोगिता में संबंध

1 As long as the value of marginal utility is positive, the total utility continues to increase.

1 सीमांत उपयोगिता का मान जब तक धनात्मक होता है, तब तक कुल उपयोगिता में वृद्धि जारी रहती है

2 At that point where the marginal utility is zero, the total utility is maximum and constant.

2 जिस बिंदु पर सीमांत उपयोगिता शून्य होती है, वहां कुल उपयोगिता अधिकतम एवम स्थिर होती है

3 When the marginal utility is negative, total utility starts decreasing.

सीमांत उपयोगिता के ऋणात्मक होने पर कुल उपयोगिता में कमी प्रारंभ हो जाती है

 

Marginal  utility

  The utility derived from the last unit consumed is called its marginal utility

सीमांत उपयोगिता

 उपभोग की जाने वाली अंतिम इकाई से प्राप्त उपयोगिता को उसकी सीमांत उपयोगिता कहा जाता है

The change in the total utility by decreasing or increasing one unit in the quantity to be consumed is called the marginal utility of the last unit.

उपभोग की जाने वाली मात्रा में एक इकाई घटाने या बढ़ाने से कुल उपयोगिता में होने वाला परिवर्तन अंतिम इकाई की सीमांत उपयोगिता कहलाता है

in the case of change more than one unit

The ratio of change in total utility and change in consumption is called marginal utility.

एक इकाई से अधिक परिवर्तन के मामले में

कुल उपयोगिता में होने वाले परिवर्तन एवं उपभोग  में परिवर्तन के अनुपात को सीमांत उपयोगिता कहा जाता है

Law  of diminishing marginal utility

ह्रासमान सीमांत उपयोगिता नियम

This rule was given in 1854 by Gossen. It is also called the first rule of Gossen. Marshall explained this rule in detail. This is a universal rule.

यह नियम 1854 में गोसेन द्वारा दिया गया था। इसे गोसेन का प्रथम नियम भी कहा जाता है।मार्शल द्वारा इस नियम की विस्तृत व्याख्या की गई। यह एक सार्वभौमिक नियम है।

According to this rule, the consumer utility consumption of extra items used to be consumed on the consumption of more and more unit of an object by a consumer.

इस नियम के अनुसार उपभोक्ता द्वारा किसी वस्तु की ज्यादा से ज्यादा इकाई उपभोग करने पर, अतिरिक्त उपयोग की जाने वाली वस्तुओं की इकाइयों की सीमांत उपयोगिता उत्तरोत्तर घटती जाती है,

The marginal utility becomes zero due to continuous consumption by  the consumer, if the consumer continues to increase consumption, marginal utility becomes negative

 उपभोक्ता द्वारा निरंतर उपभोग के कारण सीमांत उपयोगिता शून्य हो जाती है, यदि उपभोक्ता उपभोग में वृद्धि जारी रखता है तो सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती हैं

This trend is called the marginal utility diminishing Rule.

इसी प्रवृत्ति को सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम कहा जाता है

 

Assumptions  of law

नियम की मान्यताएं

Consumer is rational

उपभोक्ता विवेकशील होता है

Utility is measured as currency.

उपयोगिता को मुद्रा के रूप में मापा जाता है

marginal utility of currency is constant

मुद्रा की सीमांत उपयोगिता स्थिर

The units of the comodity are identical.

वस्तु की इकाइयां समरूप होती है

The process of consumption is continuous.

उपभोग की प्रक्रिया सतत होती है

Consumer income remains constant.

उपभोक्ता की आय स्थिर रहती है

There is no change in consumer’s habits, interests and fashion.

उपभोक्ता की आदतों, रूचि तथा फैशन में कोई परिवर्तन नहीं होता

 

Reasons  for application of this law

नियम के लागू होने के कारण

1 By increasing the consumption of one commodity, marginal utility decreases.

एक वस्तु के उपभोग को बढ़ाने से सीमांत उपयोगिता घटने लगती हैं

2 Specific requirements may be satisfied.

विशिष्ट आवश्यकताओं की तृप्ति हो सकती है

Significance / Importance of rules

नियम का महत्व

From  the law of diminishing marginal utility, law of demand and law of marginal utility has been derived.

इस नियम के द्वारा मांग का नियम, सम सीमांत उपयोगिता नियम की उत्पत्ति होती है

This law is also used in public finance.

सार्वजनिक वित्त में भी इस नियम का उपयोग किया जाता है

With the help of this rule, diamond – water (paradox) contradiction has been explained.

इस नियम की सहायता से हीरापानी विरोधाभास की व्याख्या की गई है

Diamond – water (paradox) contradiction

हीरा पानी विरोधाभास

Due to being useful in water life, its total utility is higher than the total utility obtained from diamonds, but the cost of an object depends on the marginal utilities gained from it. Due to the heavy use of water, the marginal utility of water is less and we are willing to pay the less price, while due to the availability of small amounts of diamonds, we are willing to pay more for this, hence get the diamonds The difference between diamonds and water utilities and their prices is called diamond water contradiction.

पानी जीवन में उपयोगी होने के कारण इसकी कुल उपयोगिता हीरे से प्राप्त कुल उपयोगिता से अधिक होती है किंतु किसी वस्तु की कीमत उनसे प्राप्त सीमांत उपयोगिताओं पर निर्भर करती हैं पानी के बहुत उपयोग की वजह से पानी की सीमांत उपयोगिता कम रहती है और हम इसकी कम कीमत देने को तैयार रहते हैं जबकि हीरे की अल्प मात्रा में उपलब्धता के कारण हम इसकी अधिक कीमत देने को तैयार रहते हैं अतः हीरे से प्राप्त सीमांत उपयोगिता अधिक रहती हैं । हीरे और पानी की उपयोगिताओ और उनकी कीमतों में इसी अंतर को हम हीरा पानी विरोधाभास कहते हैं।

Equal marginal utility law and consumer’s equilibrium

सम सीमांत उपयोगिता नियम और उपभोक्ता संतुलन

According to the Equal marginal utility rule, if the consumer consumes the same item, then it will be in a state of equilibrium on the quantity of that object where the marginal utility obtained from that object will be equal to the market price of the object.

While consumption of more than one type of commodities is necessary for the position of the balance of the consumer, the proportion of the utility and the prices of all the items consumed is same, then the consumer is in the balance position.

सम सीमांत उपयोगिता नियम के अनुसार उपभोक्ता यदि एक ही वस्तु का उपभोग करता है तो वह उस वस्तु की उस मात्रा पर संतुलन की स्थिति में होगा जहां उस वस्तु से प्राप्त सीमांत उपयोगिता वस्तु की बाजार कीमत के बराबर होगी।

  जबकि एक से अधिक प्रकार की वस्तुओं के उपभोग के समय उपभोक्ता के संतुलन की स्थिति के लिए आवश्यक है कि उपभोग की जाने वाली सभी वस्तुओं की सीमांत उपयोगिता एवं उनकी कीमतों का अनुपात समान हो तभी उपभोक्ता संतुलन की स्थिति में होता है।

Additional one more condition besides Equal marginal utility law

सम सीमांत उपयोगिता नियम के अतिरिक्त एक और आवश्यक शर्त

Excess of income restriction is also necessary for the balance of the consumer, according to which the consumption of all commodities consumed by the consumer should be equal to the income of the consumer.

सम सीमांत उपयोगिता नियम के अतिरिक्त आमदनी के प्रतिबंध की शर्त भी उपभोक्ता के संतुलन के लिए आवश्यक है जिसके अनुसार उपभोक्ता द्वारा उपभोग की जाने वाली समस्त वस्तुओं का खर्च उपभोक्ता की आय के बराबर होना चाहिए।

 

Limitations of Equiminal Utility Law

सम सीमांत उपयोगिता नियम की सीमाएं