भारतीय अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद Gross Domestic Product-GDP

भारतीय अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product-GDP) या शुद्ध घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product-NDP) में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान, विशेष रूप से 1950-51 से 1995-96 की अवधि के दौरान, महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों को दर्शाता है।

I. राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में

  1. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP): सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) आर्थिक विकास का एक पारंपरिक माप रहा है। आर्थिक विकास का उद्देश्य सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में वृद्धि करना है।
  2. प्रति व्यक्ति GNP: 1995 में, विश्व विकास रिपोर्ट (World Development Report) के अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) केवल $340 था। यह 1960 में भारत की प्रति व्यक्ति आय $90 की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। तुलनात्मक रूप से, 1995 में संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रति व्यक्ति GNP $24,990 था।

II. प्रमुख क्षेत्रों का शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) में योगदान (1950-51 से 1995-96)

भारत में आर्थिक विकास के कारण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। विभिन्न क्षेत्रों के योगदान की प्रवृत्ति (रुझान) इस प्रकार है:

क्षेत्र1950-51 में शुद्ध घरेलू उत्पाद में योगदान (%)1995-96 में शुद्ध घरेलू उत्पाद में योगदान (%)स्रोत
(क) प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) (कृषि एवं संबद्ध क्रियाएं)55.3%26.8%
(ख) द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector) (विनिर्माण, निर्माण, खनन)16.1%24.2%
(ग) तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) / सेवा क्षेत्र (व्यापार, परिवहन, संचार, सेवाएँ, आदि)28.5%49.0%
योग100.0%100.0%

प्रमुख अंतर्दृष्टि:

  • प्राथमिक क्षेत्र में गिरावट: NDP में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 1950-51 में 55.3% से गिरकर 1995-96 में 26.8% हो गया।
  • विनिर्माण (Manufacturing) का योगदान: द्वितीयक क्षेत्र के भीतर, विनिर्माण क्षेत्र का योगदान 1950-51 में 6.7% से बढ़कर 1995-96 में 17.4% हो गया।
  • तृतीयक क्षेत्र में उछाल: व्यापार, परिवहन, वित्त, और व्यक्तिगत सेवाओं सहित तृतीयक क्षेत्र का हिस्सा 1950-51 में 28.5% से बढ़कर 1995-96 में 49.0% हो गया।
  • यह रुझान भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि पर निर्भरता से औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की ओर एक संरचनात्मक बदलाव (Structural Transformation) को दर्शाता है।

III. सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान

  1. शुद्ध घरेलू उत्पाद में सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा: सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान, कारक लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) में 1950-51 के 7.5% से बढ़कर 1995-96 में 21.6% हो गया।

IV. पूँजी निर्माण में योगदान

  1. सकल घरेलू बचत (Gross Domestic Saving – GDS): 1992-93 में, भारतीय अर्थव्यवस्था में सकल बचत दर 23.2% थी। 1994-95 में, GDS का GDP में प्रतिशत 24.9% था।
  2. सकल घरेलू पूँजी निर्माण (Gross Domestic Capital Formation – GDCF): 1994-95 में, वस्तु क्षेत्र (Commodity sector) का GDCF में योगदान 40.4% था, जबकि सेवा क्षेत्र (Service sector) का योगदान 59.6% था।

V. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर लक्ष्य

  1. आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97): आठवीं योजना का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वार्षिक वृद्धि दर 5.6% हासिल करना था।
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