Class 11 मीरा भक्ति और मुक्ति की आवाज़
Class 11 मीरा भक्ति और मुक्ति की आवाज़ कवयित्री परिचय (संक्षेप में) मूल पद मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई। छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई? संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी। अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी। अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी। दूध की … Read more