कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6 नियंत्रण एवं समन्वय
परिचय
- जीवों में विभिन्न क्रियाएँ होती हैं जैसे चलना, दौड़ना, पौधों का प्रकाश की ओर मुड़ना आदि।
- इन सभी क्रियाओं का उद्देश्य पर्यावरण में आए परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया (Response) देना है।
- जीवों को अपनी क्रियाओं को नियंत्रित (Control) और समन्वित (Coordination) करना पड़ता है ताकि वे पर्यावरण के अनुसार ढल सकें।
6.1 जंतु-तंत्रिका तंत्र (Nervous System in Animals)
- जंतुओं में नियंत्रण और समन्वय मुख्यतः तंत्रिका (Nerve) और पेशी ऊतक (Muscular Tissue) से होता है।
- गरम वस्तु को छूने पर हमें तुरंत अहसास होता है और हम हाथ खींच लेते हैं। यह तंत्रिका तंत्र की वजह से संभव है।
न्यूरॉन (Neuron)
- तंत्रिका ऊतक का मूल इकाई है।
- इसके तीन मुख्य भाग:
- डेंड्राइट (Dendrite) – सूचना को ग्रहण करता है।
- एक्सॉन (Axon) – सूचना को आगे ले जाता है।
- सिनेप्स (Synapse) – दो न्यूरॉनों के बीच का जंक्शन, जहाँ रासायनिक माध्यम से संदेश अगले न्यूरॉन तक जाता है।
6.1.1 प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)
- किसी उत्तेजना (Stimulus) पर शरीर की अचानक और स्वतः प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
- जैसे – आग को छूने पर तुरंत हाथ हटा लेना।
- इसमें सोचने-समझने का समय नहीं लगता, प्रतिक्रिया तुरंत होती है।
- प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा नियंत्रित होती है।
6.1.2 मानव मस्तिष्क (Human Brain)
- मस्तिष्क शरीर का नियंत्रण केंद्र है।
- यह खोपड़ी और मेरुरज्जु द्रव (Cerebrospinal Fluid) से सुरक्षित रहता है।
- मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग:
- अग्र मस्तिष्क (Forebrain) – सोचने, याद करने, सुनने, सूंघने, देखने जैसी क्रियाओं का केंद्र।
- मध्य मस्तिष्क (Midbrain) – आँखों और कानों से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- पश्च मस्तिष्क (Hindbrain) – इसमें सेरिबेलम, पोंस और मेड्यूला शामिल हैं।
- सेरिबेलम – संतुलन और चाल नियंत्रित करता है।
- मेड्यूला – हृदयगति, श्वसन और रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
6.1.3 तंत्रिका ऊतक का कार्य
- तंत्रिका ऊतक संदेशों को पूरे शरीर में पहुँचाता है।
- जब कोई सूचना मिलती है तो यह मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचाई जाती है।
- वहाँ से आदेश वापस संबंधित अंग तक पहुँचता है और प्रतिक्रिया होती है।
🌱 6.2 पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)
परिचय
- पौधों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही पेशियाँ।
- फिर भी वे वातावरण की उत्तेजना (Stimulus) पर प्रतिक्रिया देते हैं।
- उनकी प्रतिक्रिया दो प्रकार की होती है:
- तत्काल प्रतिक्रिया – जैसे छुई-मुई (Touch-Me-Not) का पत्तों को बंद कर लेना।
- वृद्धि से जुड़ी प्रतिक्रिया – जैसे पौधे का प्रकाश की ओर मुड़ना।
6.2.1 उद्दीपन के प्रति तत्काल प्रतिक्रिया
- छुई-मुई (Mimosa pudica) का पौधा छूने पर पत्तियाँ जल्दी बंद कर लेता है।
- इसमें कोई तंत्रिका या मांसपेशी ऊतक नहीं होता।
- प्रतिक्रिया कोशिकाओं में जल की मात्रा बदलने से होती है।
- पानी के निकलने से कोशिका सिकुड़ जाती है।
- पानी भरने से कोशिका फूल जाती है।
6.2.2 वृद्धि के कारण गति
- कुछ पौधे सहारा पाकर ऊपर चढ़ते हैं, जैसे मटर की बेल।
- जब पौधे का भाग किसी सहारे को छूता है, तो उस हिस्से की वृद्धि धीमी हो जाती है।
- सहारे से दूर वाले भाग की वृद्धि तेज होती है।
- परिणामस्वरूप पौधा सहारे को लपेट लेता है।
6.2.3 प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
- पौधे का तना प्रकाश की दिशा में मुड़ता है।
- जड़ें प्रकाश से दूर बढ़ती हैं।
- यह Auxin नामक हार्मोन की वजह से होता है।
- Auxin तने की छाया वाली ओर अधिक मात्रा में जमा हो जाता है।
- इससे उस ओर की कोशिकाएँ ज्यादा लंबी हो जाती हैं।
- तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
6.2.4 गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)
- पौधे की जड़ें हमेशा नीचे (गुरुत्वाकर्षण की दिशा में) बढ़ती हैं।
- तना हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है।
- जड़ों का नीचे की ओर बढ़ना = धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन।
- तने का ऊपर की ओर बढ़ना = ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन।
6.2.5 अन्य अनुवर्तन (Other Tropisms)
- जलानुवर्तन (Hydrotropism) – जड़ें पानी की दिशा में बढ़ती हैं।
- रसायनानुवर्तन (Chemotropism) – परागनलिका (Pollen Tube) अंडाशय की ओर बढ़ती है।
6.2.6 पौध हार्मोन (Plant Hormones)
पौधों की प्रतिक्रियाएँ विशेष हार्मोन की वजह से होती हैं:
- Auxin – तने की वृद्धि और प्रकाश की ओर मुड़ने में मदद करता है।
- Gibberellins – तने की लंबाई बढ़ाते हैं।
- Cytokinins – कोशिका विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
- Abscisic Acid (ABA) – वृद्धि रोकता है और पत्तियों के झड़ने में सहायक होता है।
✅ निष्कर्ष
- पौधे भी अपने वातावरण के अनुसार अनुक्रियाएँ करते हैं।
- यह अनुक्रिया या तो कोशिकाओं में जल की मात्रा बदलने से होती है या फिर हार्मोनों के द्वारा।
🧬 6.3 जंतुओं में हार्मोन (Hormones in Animals)
परिचय
- जंतुओं में केवल तंत्रिका तंत्र ही नहीं बल्कि हार्मोन (Hormones) भी नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- हार्मोन विशेष रासायनिक पदार्थ होते हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine glands) से निकलते हैं।
- ये सीधे रक्त में पहुँचकर पूरे शरीर तक संदेश ले जाते हैं।
- इनका कार्य बहुत सूक्ष्म और सटीक होता है।
प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और उनके हार्मोन
1. पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland)
- इसे Master gland कहा जाता है।
- यह अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करती है।
- इसके हार्मोन:
- Growth Hormone → शरीर की वृद्धि (कमी = बौनापन, अधिकता = दैत्याकारता)।
- Tropic Hormones → अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करते हैं।
2. थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland)
- गर्दन में स्थित।
- हार्मोन: थायरॉक्सिन (Thyroxine)
- कार्य:
- शरीर की वृद्धि और चयापचय (Metabolism) नियंत्रित करना।
- इसके लिए आहार में आयोडीन आवश्यक है।
- कमी से रोग: गॉयटर (घेंघा रोग) – गले में सूजन।
3. अधिवृक्क ग्रंथियाँ (Adrenal Glands)
- गुर्दों के ऊपर स्थित।
- हार्मोन: एड्रेनालिन (Adrenaline)
- कार्य:
- इसे “आपातकालीन हार्मोन” कहते हैं।
- भय, क्रोध या तनाव की स्थिति में स्रावित होता है।
- हृदय की धड़कन और श्वसन दर बढ़ाता है।
- मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा देता है ताकि शरीर लड़ने या भागने (Fight or Flight) के लिए तैयार हो सके।
4. अग्न्याशय (Pancreas)
- हार्मोन:
- इंसुलिन (Insulin) → रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करता है।
- ग्लूकागोन (Glucagon) → रक्त में शर्करा की मात्रा को बढ़ाता है।
- इंसुलिन की कमी से रोग: मधुमेह (Diabetes Mellitus)
5. जनन ग्रंथियाँ (Sex Glands)
- नर में – वृषण (Testis) → हार्मोन: टेस्टोस्टेरोन
- पुरुषों में द्वितीयक लक्षणों (गहरी आवाज़, दाढ़ी-मूँछ, मांसपेशियाँ) का विकास।
- मादा में – अंडाशय (Ovary) → हार्मोन: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन
- स्त्रियों में द्वितीयक लक्षण (स्तनों का विकास, मासिक धर्म चक्र) का नियंत्रण।
6. अन्य महत्वपूर्ण हार्मोन
- Parathyroid Hormone → शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन।
- Thymus → रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है।
सारांश बिंदु
- हार्मोन शरीर के विभिन्न अंगों में बनने वाले रासायनिक संदेशवाहक हैं।
- ये सीधे रक्त में मिलकर लक्ष्य अंग तक पहुँचते हैं।
- हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर कई रोग हो जाते हैं (जैसे गॉयटर, मधुमेह, बौनापन, दैत्याकारता)।