मौर्य साम्राज्य

मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसकी स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। यह साम्राज्य मगध क्षेत्र में शुरू हुआ और अशोक के शासनकाल में भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से पर फैल गया।

यहाँ दिए गए स्रोतों के आधार पर मौर्य साम्राज्य को विस्तार से समझाया गया है:

1. मौर्य साम्राज्य की स्थापना (Chandragupta Maurya)

  • संस्थापक: मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी।
  • पृष्ठभूमि: वह नंदों के दरबार में एक शूद्र महिला के पुत्र थे। बौद्ध परंपरा के अनुसार, उन्हें नेपाल की तराई से सटे गोरखपुर क्षेत्र के मौर्य नामक क्षत्रिय कबीले से संबंधित माना जाता है।
  • सत्ता में आना: चाणक्य (कौटिल्य/Kautilya) की सहायता से, चंद्रगुप्त ने नंदों को उखाड़ फेंका।
  • साम्राज्य का विस्तार: यूनानी लेखक जस्टिन के अनुसार, चंद्रगुप्त ने 600,000 की सेना के साथ पूरे भारत पर विजय प्राप्त की थी।
    • लगभग 324 ई.पू. के आस-पास, चंद्रगुप्त ने सिकंदर के उत्तराधिकारी सेल्युकस निकेटर को हराया।
    • इस संधि के परिणामस्वरूप, सेल्युकस ने 500 हाथी लेकर पूर्वी अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, और सिंधु के पश्चिम का क्षेत्र चंद्रगुप्त को सौंप दिया।
    • यह साम्राज्य पूर्व में आधुनिक बिहार, उड़ीसा और बंगाल के एक बड़े हिस्से से लेकर उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन में कर्नाटक और आंध्र तक फैला हुआ था।

2. शाही संगठन और प्रशासन (Imperial Organization)

मौर्यों ने प्रशासन का एक अत्यंत विस्तृत और संगठित तंत्र स्थापित किया था।

  • प्रशासन के स्रोत: मेगस्थनीज का यात्रा वृतांत (इंडिका), जो बाद के यूनानी लेखकों द्वारा संरक्षित है, और कौटिल्य का अर्थशास्त्र। कौटिल्य का अर्थशास्त्र मौर्य काल के प्रशासन और अर्थव्यवस्था के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • केंद्रीय शासन: राजा सर्वशक्तिमान (autocrat) था, जिसकी शक्ति पर केवल उसके प्रजा की खुशी का सिद्धांत ही नियंत्रण रखता था (जैसा कि अशोक के शिलालेखों में बताया गया है)।
  • उच्च अधिकारी: प्रशासन में उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल थे जैसे मंत्री (minister), महापुरोहित (high priest), सेनापति (commander-in-chief) और युवराज (crown prince)
  • राजधानी और प्रांत: साम्राज्य को प्रांतों में विभाजित किया गया था, जो राजकुमारों या शाही राज्यपालों के अधीन थे। प्रशासन के मुख्य केंद्र पाटलिपुत्र के अलावा, तक्षशिला, उज्जैन, तोसली और सुवर्णगिरि थे।
  • पाटलिपुत्र प्रशासन: मेगस्थनीज के अनुसार, राजधानी पाटलिपुत्र का प्रबंधन छह समितियों द्वारा किया जाता था, जिनमें से प्रत्येक में पाँच सदस्य थे। इन समितियों ने विदेशी मामलों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, वजन और माप के विनियमन, हस्तकला निरीक्षण, और व्यापार के नियंत्रण को संभाला।
  • सैन्य शक्ति: चंद्रगुप्त मौर्य की सेना बहुत बड़ी थी। रोमन लेखक प्लिनी के अनुसार, उनके पास 600,000 पैदल सैनिक, 30,000 घुड़सवार और 9,000 हाथी थे।

3. अशोक का शासनकाल (273-232 ई.पू.)

  • उत्तराधिकार: चंद्रगुप्त के बाद, बिंदुसार शासक बने, और बिंदुसार के बाद अशोक सिंहासन पर बैठे। अशोक ने अपने राज्याभिषेक (coronation) से आठ साल बाद कलिंग पर विजय प्राप्त की।
  • कलिंग युद्ध का प्रभाव: कलिंग युद्ध में एक लाख लोग मारे गए और डेढ़ लाख विस्थापित हुए। इस विनाश के कारण अशोक को पश्चाताप हुआ और उन्होंने भौतिक विजय (भेरीघोष) की नीति को त्याग कर धम्म (धम्मघोष) की नीति अपनाई।
  • अशोक के शिलालेख: अशोक के शासनकाल के इतिहास का पुनर्निर्माण मुख्य रूप से उनके शिलालेखों से होता है।
    • यह शिलालेख चट्टानों, स्तंभों और गुफाओं पर उत्कीर्ण हैं।
    • अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लिखे गए थे।
    • उत्तरी-पश्चिमी भारत (अफगानिस्तान) में खरोष्ठी, यूनानी और अरामाइक लिपियों का प्रयोग भी हुआ।
  • धम्म (Dhamma) की नीति: अशोक ने धम्म महामात्तों नामक विशेष अधिकारियों को नियुक्त किया, जिसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और शांति को मजबूत करना था। धम्म के सिद्धांतों में ब्राह्मणों और भिक्षुओं का सम्मान, दासों और नौकरों के प्रति दया, और पशु वध का त्याग शामिल था।

4. मौर्य शासन का महत्व (Significance of the Maurya Rule)

  • आर्थिक विनियमन: अर्थशास्त्र के अनुसार, राज्य 27 अध्यक्षों (सुपरिटेंडेंट) के माध्यम से शिल्प, व्यापार, कृषि, कताई, खनन, वजन और माप जैसे समस्त आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करता था।
  • भौतिक संस्कृति का प्रसार: मौर्यों ने भारतीय इतिहास में प्रथम संगठित राज्य मशीनरी की स्थापना की।
    • लोहे का व्यापक उपयोग हुआ, जिससे गंगा घाटी में कृषि का प्रसार हुआ।
    • उत्तरी काले पॉलिश वाले बर्तन (NBPW), जो अपनी चमक के लिए जाने जाते हैं, मौर्य काल की विशेषता हैं।
    • अशोक के स्तंभों और बाराबर गुफाओं (गया से 30 किमी दूर) में चट्टानों को काटकर बनाए गए गुफाओं में उन्नत पत्थर के काम और पॉलिश की तकनीक का प्रदर्शन होता है।
    • भौगोलिक सीमाओं से परे गंगा के मैदान की भौतिक संस्कृति का विस्तार दक्षिण भारत तक भी हुआ।

5. मौर्य साम्राज्य का पतन (Fall of the Maurya Empire)

अशोक की मृत्यु (232 ई.पू.) के बाद साम्राज्य जल्द ही ढह गया। पतन के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  1. ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया: अशोक की अहिंसा और धार्मिक सहिष्णुता की नीति ने ब्राह्मणों की आय और अनुष्ठानों पर नकारात्मक प्रभाव डाला, जिससे ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया हुई।
    • 185 ई.पू. में, अंतिम मौर्य राजा बृहद्रथ को उनके ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने मार डाला और शुंग वंश की स्थापना की।
  2. वित्तीय संकट: सेना और विस्तृत नौकरशाही पर अत्यधिक व्यय के कारण वित्तीय संकट उत्पन्न हुआ। बौद्ध भिक्षुओं को दिए गए अनुदान ने भी खजाने पर बोझ डाला।
  3. उत्पीड़नकारी शासन: दूरस्थ प्रांतों (जैसे तक्षशिला) में अधिकारियों द्वारा किए गए उत्पीड़न के कारण विद्रोह हुए।
  4. उत्तर-पश्चिम सीमा की उपेक्षा: अशोक के उत्तराधिकारियों ने उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्रों की उपेक्षा की, जिससे विदेशी आक्रमणों (जैसे शकों और इंडो-यूनानियों) का रास्ता खुल गया। (उदाहरण के लिए, 206 ई.पू. के आसपास ग्रीक आक्रमण शुरू हुए)।
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