राजस्थान में भूमि उपयोग
प्रश्न 1: राजस्थान के भूमि उपयोग स्वरूप की मुख्य विशेषताएं क्या हैं और कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में क्या भूमिका है?
राजस्थान, देश का सबसे बड़ा राज्य है जिसका भौगोलिक क्षेत्रफल $3.42$ लाख वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का $10.41$ प्रतिशत है। राज्य का आधे से अधिक विवरण क्षेत्र कृषि कार्यों के अधीन है, जो यह दर्शाता है कि यह अनिवार्य रूप से एक कृषि राज्य है।
मुख्य विशेषताएं (आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार):
- शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल कुल रिपोर्टिंग क्षेत्र का $52.34$ प्रतिशत है।
- वानिकी के अंतर्गत भूमि केवल $8.08$ प्रतिशत है।
- बंजर भूमि का हिस्सा $10.87$ प्रतिशत है।
- स्थायी चरागाह और अन्य गोचर भूमि कुल क्षेत्र का $4.86$ प्रतिशत है।
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में लगभग $25$-$30$ प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान देता है। राज्य की $60$ प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों पर निर्भर करती है। पशुपालन, विशेष रूप से शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में, कृषि की सहायक गतिविधि ही नहीं बल्कि एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है, जो अकाल की स्थिति में किसानों को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करती है।
प्रश्न 2: राजस्थान में कृषि भूमि उपयोग परिवर्तन (LUC) के प्रमुख चालक (Drivers) क्या हैं, और इससे उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियाँ क्या हैं?
भूमि उपयोग परिवर्तन प्राकृतिक और मानवजनित दोनों कारकों से प्रेरित है। इसके प्रमुख चालक निम्नलिखित हैं:
- शहरीकरण और औद्योगीकरण: शहरी क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे कृषि भूमि का आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग के लिए रूपांतरण हो रहा है। भूमि के गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित होने पर उसकी कीमत $100$ गुना तक बढ़ सकती है, जो भूस्वामियों को भूमि रूपांतरण के लिए प्रोत्साहित करती है।
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ: सड़कों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और विशेषकर सौर ऊर्जा संयंत्रों जैसी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का अधिग्रहण हो रहा है।
- जल संकट और जलवायु दबाव: राज्य में कृषि मूलतः वर्षा पर आधारित है, जिसकी अवधि कम और अनिश्चित रहती है। भूजल का अत्यधिक दोहन एक गंभीर चिंता है; वर्ष $2022$ में राज्य के कुल $302$ ब्लॉकों में से $219$ ब्लॉक अति दोहित (over-exploited) श्रेणी में थे। जल संकट और मिट्टी की उर्वरता में गिरावट कृषि उत्पादकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ: भूमि उपयोग प्रबंधन के अभाव में अनियोजित विकास के कारण पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुए हैं। इनमें वन क्षेत्रों का ह्रास, जल संसाधनों में मानवीय हस्तक्षेप, प्रदूषण में वृद्धि, भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट, हरियाली के क्षेत्र में कमी, और शहरों में ऊष्मा द्वीपों (Heat Islands) का निर्माण शामिल है। जयपुर जैसे तीव्र गति से विकसित हो रहे जिलों में अवैध खनन और वनों के ह्रास से जैव विविधता को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।
प्रश्न 3: राजस्थान में भूमि अधिकार और टिकाऊ कृषि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा कौन से कानूनी और नीतिगत कदम उठाए गए हैं?
राज्य में भूमि सुधारों और भूमि उपयोग को विनियमित करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा मौजूद है:
- मुख्य कानून: राजस्थान किरायेदारी अधिनियम, $1955$, और राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, $1956$, भूमि अधिकार और पट्टेदारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शक्तिशाली साधन हैं।
- प्रशासनिक और न्यायिक सुधार: राज्य राजस्व मंडल ने प्रकरण निस्तारण में तेजी लाने और डिजिटलीकरण अपनाने को प्राथमिकता दी है। ई-कोर्ट को भूमि अभिलेख एवं पंजीकरण डेटाबेस से जोड़ने का उद्देश्य मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करना है।
- चारागाह भूमि का प्रबंधन: महात्मा गांधी नरेगा योजना (MGNREGA) के तहत चारागाह/ओरण भूमि पर अति-क्रमण हटाने और उनके विकास के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं (Water Harvesting Structures) का निर्माण, वृक्षारोपण और कच्ची चारदीवारी बनाने जैसे कार्य कराए जाते हैं।
- टिकाऊ कृषि: कृषि उत्पादकता और आजीविका को बनाए रखने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PM-KSY) (बूंद-बूंद सिंचाई, स्प्रिंकलर), और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान (PM-KUSUM) घटक-बी के तहत सौर ऊर्जा पंप संयंत्रों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।