कक्षा 10 हिन्दी सूरदास के पद
1. गोपियों ने उद्धव को बड़भागी क्यों बताया है। (मॉडल प्रश्नपत्र 2023) / ‘उधौ, तुम हौ अति बड़भागी’ गोपियों ने ऐसा क्यों कहा?
गोपियों ने उद्धव को बड़भागी (अति भाग्यशाली) व्यंग्य के रूप में कहा है।
गोपियाँ उन्हें बड़भागी इसलिए कहती हैं क्योंकि वे प्रेम के धागे (सनेह तगै) से हमेशा अछूते रहे हैं, और उनका मन कृष्ण के प्रेम में अनुरागी नहीं हुआ है। उद्धव की स्थिति ऐसी है जैसे:
- कमल का पत्ता जो जल के भीतर रहता है, फिर भी उसके शरीर पर रस (देह् न दागी) नहीं लगता।
- तेल की गगरी जो जल के भीतर डुबोने पर भी उस पर जल की एक बूँद भी नहीं ठहरती।
2. गोपियों ने हारिल की लकरी किसे कहा है?
गोपियों ने श्रीकृष्ण को हारिल की लकरी कहा है।
गोपियाँ कहती हैं, “हमारे हरि हारिल की लकरी”। इसका आशय यह है कि उन्होंने नंद के नंदन श्रीकृष्ण को अपने हृदय में दृढ़ता से पकड़ा हुआ है। हारिल एक पीले पैरों वाला हरे रंग का कबूतर की जाति का पक्षी होता है, जो अपने पंजों में लकड़ी को कसकर पकड़े रहता है।
3. ‘हरि है राजनीति पढ़ि आए’ – गोपियों ने ऐसा किस आधार पर कहा? पठित पद्यांश के आधार पर समझाइए।
गोपियों ने यह कथन इसलिए कहा क्योंकि उन्हें उद्धव (मधुकर) से यह समाचार मिला कि कृष्ण अब योग का संदेश भेज रहे हैं।
गोपियाँ यह मानती हैं कि कृष्ण पहले से ही बहुत चतुर थे (इक अति चतुर हुते पहिलैं ही) और अब उन्होंने गुरु ग्रंथ भी पढ़ लिए हैं। उनकी बुद्धि बढ़ गई है, इसलिए उन्होंने (प्रेम के स्थान पर) योग का संदेश भेजा है।
4. गोपियों ने योग-साधना को कड़वी ककड़ी के समान बताया है।
गोपियों ने योग-साधना को कड़वी ककड़ी के समान बताया है। गोपियाँ कहती हैं कि उन्हें योग सुनकर ऐसा लगता है “ज्यों करुई ककरी”।
5. मन की मन ही माँझ रही… (इस पद्यांश के आधार पर प्रश्न)
इस पद्यांश का आधार यह है कि गोपियों के मन की बात मन में ही रह गई। वे इस बात को उद्धव से कह नहीं पाती हैं।
गोपियों के मन में यह बात थी कि वे कृष्ण के वापस आने की आशा (आस आवने की) के आधार पर अपने तन और मन की विरह व्यथा (बिथा) सहन कर रही थीं। लेकिन अब कृष्ण ने योग का संदेश भेज दिया है, जिसे सुनकर उनकी विरह की आग (बिरह दहि) और भड़क उठी है।
6. गोपियों को उद्धव का संदेश पसंद क्यों नहीं आया?
गोपियों को उद्धव का संदेश पसंद नहीं आया क्योंकि वह योग-साधना से संबंधित था।
गोपियों के अनुसार, उनका मन अस्थिर (चकरी) नहीं है। उन्हें उद्धव का योग-संदेश कड़वी ककड़ी के समान लगता है। यह संदेश उनके लिए एक ऐसी व्याधि (ब्याधि) है, जिसे उन्होंने पहले कभी न देखा, न सुना और न भोगा।
8. गोपियों ने राजधर्म किसे कहा और क्यों?
गोपियों ने राजधर्म (राजा का धर्म) यह बताया है कि राजा प्रजा को न सताए।
गोपियाँ कृष्ण से पूछती हैं कि वे अन्याय (अनीति) क्यों करेंगे, जो पहले दूसरों से अन्याय छुड़ाते थे। अब कृष्ण राजा बन गए हैं और उनका धर्म है कि वे अपनी प्रजा (गोपियों) की रक्षा करें।
9. ‘ज्यों जल माहँ तेल की गागरि बूँद न ताको लागति’ पंक्ति के माध्यम से बताइए कि गोपियाँ उद्धव पर क्या व्यंग्य करती हैं। (मॉडल प्रश्नपत्र 2024)
इस पंक्ति के माध्यम से गोपियाँ उद्धव पर यह व्यंग्य करती हैं कि वे स्नेह (प्रेम) से अछूते हैं।
गोपियाँ उद्धव की तुलना तेल से भरी गगरी (गागरि) से करती हैं, जिसे यदि जल (जल माहँ) में डुबोया जाए, तो भी उस पर जल की एक बूँद भी नहीं ठहरती। इसी प्रकार, उद्धव कृष्ण (प्रेम के सागर) के पास रहकर भी प्रेम से अप्रभावित रहे और उनका मन अनुराग रहित रहा।
10. उद्धव गोपियों के कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को समझने में असमर्थ क्यों रहे? (मॉडल प्रश्नपत्र 2025)
उद्धव गोपियों के कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को समझने में असमर्थ रहे क्योंकि वे स्वयं प्रेम के बंधन (स्नेह तगा) से मुक्त थे, और उनका मन अनुराग रहित था।
उद्धव की स्थिति कमल के पत्ते के समान थी, जो पानी में रहकर भी पानी से अप्रभावित रहता है। गोपियाँ व्यंग्य करती हैं कि उद्धव ने प्रेम रूपी नदी में कभी पैर नहीं डुबोया। वह प्रेम की पीड़ा और अनन्यता को नहीं समझते थे, इसलिए उन्हें गोपियों का प्रेम समझ नहीं आया और वे उन्हें ज्ञान (योग) का संदेश देने आए।सूरदास के पद