विश्व संदर्भ में संग्रहालयों का इतिहास एवं विकास (History and Development of Museums in Global Context)
संग्रहालयों का इतिहास मानवता की ज्ञान संग्रह, संरक्षण और प्रदर्शन की चिरस्थायी इच्छा को दर्शाता है, जो प्राचीन मंदिरों और अध्ययन के स्थानों से लेकर आधुनिक, सार्वजनिक संस्थानों तक विकसित हुआ है।
I. उत्पत्ति और प्राचीन मूलाधार (Origin and Ancient Foundations)
- शब्द की उत्पत्ति: ‘संग्रहालय’ शब्द प्राचीन यूनानी शब्द ‘Mouseion’ (Μουσεῖον) से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘मूसा (Muse) का आसन’ या ‘देवियों का मंदिर’ है। यूनानी पौराणिक कथाओं में मूसा कला और विज्ञान की संरक्षक देवियाँ थीं।
- प्रारंभिक कार्य: प्राचीन काल में, एक Mouseion को केवल कलाकृतियों का संग्रह नहीं माना जाता था, बल्कि यह दार्शनिक संस्था, चिंतन का स्थान, या उन्नत अध्ययन के लिए एक केंद्र था।
प्रमुख प्राचीन संस्थान:
- एन्निगाल्डी-नानना का संग्रह (मेसोपोटामिया, 530 ईसा पूर्व): आधुनिक इराक के उर में स्थापित यह संग्रह, जिसे राजकुमारी एन्निगाल्डी ने क्यूरेट किया था, शिक्षण उद्देश्यों के लिए सावधानीपूर्वक लेबल की गई प्राचीन वस्तुओं को रखता था, जिसे आज के संदर्भ में पहला संग्रहालय माना जाता है।
- सिकंदरिया का संग्रहालय (Mouseion at Alexandria, 3री शताब्दी ईसा पूर्व): मिस्र में टॉलेमी प्रथम सोटर द्वारा स्थापित यह राज्य-समर्थित संस्था, कलाकृतियों के संग्रह से अधिक उन्नत अध्ययन और शोध का एक व्यापक केंद्र था, जिसमें महान पुस्तकालय भी शामिल था। इसने लगभग छह शताब्दियों तक कार्य किया।
II. पुनर्जागरण और निजी संग्रह (Renaissance and Private Collections)
- संग्रहालयों का पुनरुत्थान: सिकंदरिया के संग्रहालय के नष्ट होने के बाद लंबे समय तक कोई सुनियोजित संग्रहालय विकसित नहीं हुआ। 14वीं शताब्दी में यूरोप में पुनर्जागरण (Renaissance) की शुरुआत हुई, जिससे पुरातनता में रुचि फिर से जागृत हुई।
- निजी संग्रह: इस काल में, धनी संग्रहकर्ताओं ने निजी संग्रह बनाए, जिन्हें अक्सर “आश्चर्य कक्ष” (wonder rooms) या “जिज्ञासा कक्ष” (cabinets of curiosities) कहा जाता था। ये संग्रह व्यक्तिगत संपत्ति होते थे और केवल अभिजात वर्ग तक ही सीमित थे।
- शब्द का प्रयोग: 15वीं शताब्दी में, इटली के फ्लोरेंस में लोरेंजो डी मेडिसी के संग्रह का वर्णन करने के लिए ‘Museum’ शब्द का प्रयोग किया गया था।
III. प्रबोधन काल और सार्वजनिक संग्रहालयों का जन्म (Enlightenment and the Birth of Public Museums)
- वैचारिक बदलाव: 18वीं शताब्दी का प्रबोधन काल (Age of Enlightenment) तर्क, विज्ञान और ज्ञान के सार्वजनिक प्रसार पर केंद्रित था। इस काल में निजी संग्रहों को सार्वजनिक संस्थाओं में बदलना शुरू हुआ।
- पहले सार्वजनिक संग्रहालय:
- एशमोलियन संग्रहालय (Ashmolean Museum), ऑक्सफोर्ड (1683): इलियास एशमोल के संग्रह से स्थापित, यह “संग्रहालय” नाम रखने वाला दुनिया का पहला सार्वजनिक संग्रहालय माना जाता है।
- कैपिटोलाइन संग्रहालय (Capitoline Museums), रोम (1734): 1471 में इसकी उत्पत्ति हुई और इसे 1734 में आधिकारिक तौर पर जनता के लिए खोला गया, जो इसे दुनिया का सबसे पुराना सार्वजनिक संग्रहालय बनाता है।
- ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum), लंदन (1759): सर हैंस स्लोएन के निजी संग्रह के आधार पर 1753 में स्थापित, इसे 1759 में जनता के लिए खोल दिया गया।
- लूव्र संग्रहालय (Louvre Museum), पेरिस (1793): फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 1793 में, पूर्व शाही संग्रहों को आम जनता के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया।
- अमेरिका में विकास: संयुक्त राज्य अमेरिका में संग्रहालयों का विकास तुलनात्मक रूप से बाद में हुआ (1773 में चार्ल्सटन लाइब्रेरी सोसाइटी, 1846 में राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना) और यहाँ शुरुआत से ही सार्वजनिक सेवा और शिक्षा पर जोर था।
IV. संग्रहालय विकास के चरण (Phases of Museum Development)
यूरोप में संग्रहालयों के विकास को चार चरणों में विभाजित किया गया है:
- प्रथम चरण (14वीं से लगभग 17वीं शताब्दी): यह मुख्य रूप से संग्रहण/भंडारण (Storing) का कार्य करता था, जिसमें कलात्मक और वैज्ञानिक महत्व की वस्तुओं को रखा जाता था।
- द्वितीय चरण (18वीं और 19वीं शताब्दी): इस दौरान संग्रहालयों को राज्य ने अपने अधीन ले लिया और उन्हें सार्वजनिक संस्थाओं में बदल दिया, जिसका उद्देश्य नए राष्ट्रों और साम्राज्यवादी शक्तियों की महिमा को प्रदर्शित करना था।
- तृतीय चरण (20वीं शताब्दी): इस चरण में वस्तुओं को संग्रहित, व्यवस्थित और प्रशिक्षित करके जनता को इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से परिचित कराने और शिक्षित करने की भूमिका निभाई गई।
- चतुर्थ चरण (1970 के दशक के बाद): भारी संख्या वाले पर्यटन (mass tourism) की शुरुआत हुई, जिससे संग्रहालयों का ध्यान मनोरंजन, पर्यटन और आय सृजन की ओर अधिक हो गया।
V. आधुनिक युग और वैश्विक संदर्भ (Modern Era and Global Context)
- वैश्वीकरण के बाद परिवर्तन: वैश्वीकरण के बाद, संग्रहालयों की भूमिका में क्रांति आई। वे कलाकृतियों को प्रदर्शित करने से आगे बढ़कर शिक्षा, अनुसंधान, बातचीत और संरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित हुए।
- बदलती परिभाषाएँ (ICOM): अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय परिषद (ICOM), जिसकी स्थापना 1946 में हुई थी, संग्रहालय की परिभाषाओं को लगातार अद्यतन करती रही है:
- 1968 में, परिभाषा में पहली बार “आनंद” (pleasure) शब्द जोड़ा गया, जो चीजों के मंदिर से जीवंत चर्चा के संस्थान की ओर बदलाव को दर्शाता है।
- 2007 की परिभाषा में “भौतिक और अमूर्त विरासत” (tangible and intangible heritage) का स्पष्ट उल्लेख किया गया।
- 2022 की परिभाषा में समावेशिता, सुगमता, नैतिकता, विविधता और स्थिरता को बढ़ावा देने तथा सामुदायिक भागीदारी के साथ काम करने पर ज़ोर दिया गया है।
- वर्तमान भूमिका: आज संग्रहालय केवल वस्तुओं का भंडार नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान के संवाहक की भूमिका निभाते हैं, जो लोगों को उनके अतीत से जोड़ते हैं और भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।