भारत में संग्रहालयों का विकास Museum Development in India

भारत में संग्रहालयों के विकास पर नोट्स निम्नलिखित हैं, जो प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक राष्ट्रीय संस्थानों तक की यात्रा को दर्शाते हैं:

I. प्राचीन और औपनिवेशिक नींव (Ancient and Colonial Foundations)

  • प्राचीन भारतीय संदर्भ: भारत में संग्रहालयों की अवधारणा अति प्राचीन काल में मौजूद थी, जिसका उल्लेख चित्रशालाओं (painting galleries) और चित्रवीथियों (art galleries) में मिलता है। मध्यकाल में, राजाओं और कुलीनों के निजी संग्रह भी प्रभावशाली थे।
  • औपनिवेशिक प्रभाव: भारत में आधुनिक संग्रहालय आंदोलन की शुरुआत 1796 ई. से मानी जाती है।
  • एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल: सर विलियम जोन्स ने 1784 ई. में इस सोसायटी की स्थापना की।
    • सोसायटी ने 1796 ई. में अपने विशाल पुरातत्वीय, नृजातीय, भूवैज्ञानिक और प्राणि-विज्ञान संग्रहों को रखने की आवश्यकता महसूस की।
    • भारत का पहला संग्रहालय: सोसायटी द्वारा 1814 ई. में कलकत्ता (कोलकाता) में भारतीय संग्रहालय की स्थापना की गई। इसे एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे बड़ा बहुउद्देश्यीय संग्रहालय होने का गौरव प्राप्त है।
    • प्रारंभ में, यह भूविज्ञान और प्राणी विज्ञान के साथ पुरातत्व, नृवंशविज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित दो भागों में विभाजित था।
  • प्रारंभिक विस्तार: 1851 ई. में मद्रास (चेन्नई) में केंद्रीय संग्रहालय स्थापित हुआ।
  • 1857 ई. तक, पूरे भारत में विभिन्न प्रकार के 12 संग्रहालय स्थापित हो चुके थे।

II. विकास के चरण (Phases of Development)

भारतीय संग्रहालयों के विकास को मुख्य रूप से पाँच चरणों में विभाजित किया गया है:

1. फॉर्मेटिव चरण (1796–1858)

यह चरण ब्रिटिश शासकों के अधीन शुरू हुआ, जिसमें यूरोपीय संग्रहालय की अवधारणा भारत में आई। इस दौरान 1814 में इंडियन म्यूजियम, कोलकाता की स्थापना हुई।

2. विक्टोरिया काल (1858–1899)

  • पुरातत्व सर्वेक्षण का उदय: 1861 ई. में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना हुई, जिसने संग्रहालय आंदोलन को मजबूत किया। इसके प्रथम महानिदेशक एलेक्जेंडर कनिंघम थे।
  • इंडियन म्यूजियम का सार्वजनिक उद्घाटन: 1866 के इंडियन म्यूजियम अधिनियम के तहत सोसायटी संग्रहालय का नाम बदलकर इंडियन म्यूजियम कर दिया गया। इसे 1878 ई. में जनता के लिए खोला गया।
  • कानूनी ढाँचा: 1878 ई. में इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट (Indian Treasure-trove Act) पारित किया गया।
  • इस चरण में, लखनऊ (1863), नागपुर (1863), और मथुरा (1874) जैसे स्थानों पर भी संग्रहालय स्थापित हुए।

3. कर्जन और मार्शल काल (1899–1928)

  • कर्जन का योगदान: लॉर्ड कर्जन (1899 में गवर्नर जनरल) ने पुरावशेषों के संरक्षण और पुरातत्व के अध्ययन को विशेष महत्व दिया।
  • जॉन मार्शल: 1902 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक नियुक्त हुए, जिन्होंने स्थल संग्रहालयों (Site Museums) की स्थापना का कार्य शुरू किया।
  • प्रथम स्थल संग्रहालय: सारनाथ संग्रहालय। इसका भवन 1910 में पूरा हुआ।
  • अन्य स्थल संग्रहालय: नालंदा (1917) और साँची (1919)। यह नीति थी कि उत्खनन से प्राप्त छोटे पुरावशेषों को उनके स्वाभाविक वातावरण में अध्ययन के लिए खंडहरों के निकट संपर्क में रखा जाए।

4. स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-बाद का काल (1928–वर्तमान)

कालखंडमुख्य घटनाएँ और विकाससंख्या/उदाहरण
स्वतंत्रता-पूर्व (1928–1947)1936 में मार्खम और हरग्रीव्ज के सर्वेक्षण में भारत में 105 संग्रहालय दर्ज किए गए थे। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण प्रगति में कुछ रुकावट आई। 1946 में, मॉर्टिमर व्हीलर ने एएसआई के भीतर एक अलग संग्रहालय शाखा का गठन किया।इलाहाबाद म्युनिसिपल म्यूजियम (1931)।
स्वतंत्रता के बाद (1947–वर्तमान)1949 ई. में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली की स्थापना हुई। 1960 में इसके भवन का उद्घाटन हुआ। वर्तमान में, भारत में 700 से अधिक संग्रहालय हैं।सालार जंग संग्रहालय (1951)।

III. आधुनिक पहल और प्रवृत्तियाँ (Modern Initiatives and Trends)

  • पुनरुद्धार और राष्ट्रीयता: भारत सरकार ने राष्ट्रीय पहचान के प्रतीक के रूप में कार्य करने और स्वतंत्रता संग्राम की हजारों वर्ष पुरानी विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक नया सांस्कृतिक ढाँचा विकसित करने पर जोर दिया है।
  • जनजातीय संग्रहालय: स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समुदायों के योगदान को सम्मान देने के लिए 10 विशेष संग्रहालयों की स्थापना की जा रही है।
  • पुनर्प्राप्ति के प्रयास: पिछले नौ वर्षों में अवैध तस्करी और विनियोजन से 240 से अधिक प्राचीन वस्तुएँ सफलतापूर्वक पुनर्प्राप्त की गई हैं। उदाहरणों में बनारस से चुराई गई 18वीं सदी की अन्नपूर्णा मूर्ति और चोल साम्राज्य की नटराज मूर्तियाँ शामिल हैं।
  • मेगा संग्रहालय: भारत के 5,000 वर्षों के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय ‘युग-युगीन भारत’ की योजना का अनावरण किया गया है।

IV. तमिलनाडु में संग्रहालयों का विकास (Specific Development in Tamil Nadu)

  • चेन्नई संग्रहालय: मद्रास (चेन्नई) संग्रहालय 1851 में स्थापित किया गया था। यह एक बहुउद्देश्यीय संग्रहालय है जिसमें कला, पुरातत्व, भूविज्ञान, प्राणी विज्ञान और रासायनिक संरक्षण जैसे कई खंड हैं। यह 1997 में मद्रास विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त हुआ।
  • जिला संग्रहालय: तमिलनाडु में हर जिले में एक संग्रहालय स्थापित करने की नीति है। पुदुकोट्टई का जिला संग्रहालय 1949 में शुरू हुआ था, जो पहला जिला संग्रहालय था।

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