कक्षा 10 हिन्दी मंगलेश डबराल (संगतकार)
1. ‘संगतकार’ कविता की मूल संवेदना लिखिए।
‘संगतकार’ कविता की मूल संवेदना मुख्य कलाकार की सफलता में सहायक या सहयोगी व्यक्ति के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाना है।
- कविता उन सभी लोगों के महत्व पर विचार करती है जो किसी बड़े व्यक्ति या कलाकार को उसके कार्य में पृष्ठभूमि में रहकर सहयोग देते हैं।
- इसका केंद्रीय भाव यह है कि ये सहायक लोग अक्सर अपनी मनुष्यता और समर्पण के कारण अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा नहीं उठाते, और उनकी यह कोशिश विफलता नहीं, बल्कि उनकी संवेदनशीलता मानी जानी चाहिए।
2. ‘संगतकार’ कविता के आधार पर एक संगतकार के मानवीय व संवेदनशील व्यक्तित्व का चित्रण कीजिए।
संगतकार का व्यक्तित्व अत्यंत मानवीय, संवेदनशील और समर्पित होता है:
- मानवीयता: वह जानबूझकर अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश करता है, ताकि मुख्य गायक की महत्ता कम न हो। कवि इसे उसकी मनुष्यता मानता है, न कि उसकी कमजोरी।
- संवेदनशीलता: वह मुख्य गायक की पीड़ा को तुरंत पहचान लेता है। जब मुख्य गायक का गला तारसप्तक में बैठने लगता है और उसका उत्साह अस्त होता हुआ प्रतीत होता है, तब संगतकार कहीं से आकर उसे ढाँढस बँधाता है।
- सहायता और समर्पण: वह मुख्य गायक को यह बताने के लिए अपना साथ देता है कि वह अकेला नहीं है, और यह भी कि गाया जा चुका राग फिर से गाया जा सकता है।
3. संगतकार कविता किसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है?
‘संगतकार’ कविता सहायक व्यक्तियों के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। यह कविता विशेष रूप से संगीत के क्षेत्र में मुख्य गायक के साथ रहने वाले सहयोगी कलाकार (संगतकार) के महत्त्व पर विचार करती है।
4. संगतकार का गायन में योगदान लिखिए। (मॉडल प्रश्नपत्र 2025)
संगतकार का गायन में योगदान अत्यंत निर्णायक होता है:
- वह प्राचीन काल से ही मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर में अपनी गूँज मिलाता आया है।
- जब मुख्य गायक अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो चुका होता है, तब संगतकार स्थायी को सँभाले रहता है। यह ऐसा होता है जैसे वह मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान समेटता हो।
- जब मुख्य गायक तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर प्रेरणा साथ छोड़ती हुई महसूस करता है और उसकी आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ सुनाई देता है, तब संगतकार अपने स्वर से उसे ढाँढस प्रदान करता है।
- वह मुख्य गायक को यह याद दिलाने के लिए भी गाता है कि वह अकेला नहीं है और वह फिर से उसी राग को गा सकता है।
5. संगतकार कविता के माध्यम से कवि ने समाज निर्माण में किन लोगों के योगदान को दर्शाया है? (मॉडल प्रश्नपत्र 2025)
संगतकार कविता के माध्यम से कवि ने उन सभी सहायक (सहयोगी) लोगों के योगदान को दर्शाया है, जो किसी भी क्षेत्र की सफलता में अपना अपरिहार्य श्रम देते हैं, लेकिन मुख्य भूमिका में नहीं होते हैं।
ये वे लोग हैं जो सफलता के चरम शिखर पर पहुँचे व्यक्ति को तब संबल प्रदान करते हैं जब वह लड़खड़ाता है। यह उन सभी अदृश्य या नेपथ्य के कार्यकर्ताओं का प्रतीक है जिनके समर्थन के बिना कोई भी बड़ा सामाजिक या कलात्मक कार्य पूर्ण नहीं हो सकता।