कक्षा 10 हिन्दी सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
1. ‘उत्साह’ कविता का मूल भाव लिखिए।
‘उत्साह’ कविता का मूल भाव क्रांति की भावना और जीवन में नव चेतना का संचार करना है।
- कवि बादल को संबोधित करते हुए आह्वान करते हैं कि वे केवल शीतलता प्रदान करने के लिए ही नहीं, बल्कि परिवर्तन (क्रांति) लाने के लिए गरजें और बरसें।
- कविता शोषित, उपेक्षित और पीड़ित लोगों में उत्साह भरने और संसार में नवजीवन लाने की बात करती है, क्योंकि विश्व के सभी लोग निदाघ (ताप) से विकल (विकल विकल, उन्मन थे उन्मन) और तप्त हैं।
- कवि चाहते हैं कि बादल अपने भीतर वज्र की शक्ति छिपाकर नूतन कविता से संसार को भर दें, जिससे वर्तमान की निराशा दूर हो और नवीन सृजन हो सके।
2. ‘उत्साह’ कविता में निराला ने बादल को किसका प्रतीक बताया है?
‘उत्साह’ कविता में निराला ने बादल को क्रांति, विद्रोह और नवजीवन के कवि के रूप में प्रस्तुत किया है।
- बादल एक ऐसे कवि हैं जिनके हृदय में विद्युत की छवि (विद्युत-छवि उर में) है और जो नवजीवन देने की क्षमता रखते हैं।
- यह बादल अपनी गर्जना और वज्र (वज्र छिपा) जैसी कठोरता के कारण परिवर्तन और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध विद्रोह का प्रतीक बन जाता है।
3. ‘उत्साह’ कविता के माध्यम से कवि ने क्या सन्देश दिया है?
कविता के माध्यम से कवि ने यह संदेश दिया है कि:
- मनुष्य को जीवन के कष्टों को दूर करने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उत्साह और क्रांतिकारी ऊर्जा से परिपूर्ण होना चाहिए।
- कवि बादल से अनुरोध करते हैं कि वे तप्त धरा (गर्म धरती) को जल से फिर शीतल कर दें, अर्थात् समाज को दुख और निराशा से मुक्ति दिलाएँ।
- चूँकि बादल में वज्र और विद्युत की शक्ति छिपी है, इसलिए यह संदेश दिया गया है कि नए विचारों (नूतन कविता) को इतनी शक्ति के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि वे पुराने बंधनों और शोषणकारी व्यवस्थाओं को तोड़ सकें।
4. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए क्यों कहता है?
कवि बादल से फुहार या रिमझिम के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए इसलिए कहता है क्योंकि वह कोमल परिवर्तन नहीं, बल्कि तीव्र और व्यापक क्रांति लाना चाहता है।
- गर्जना विद्रोह, उत्साह, ऊर्जा और विनाश (पुराने के लिए) का प्रतीक है।
- बादल को नवजीवन देने वाला कवि बताया गया है, और गरजने से ही सोए हुए या निष्क्रिय लोगों में चेतना और उत्तेजना भर सकती है।
- कवि चाहते हैं कि बादल अपनी गर्जना के साथ अपने भीतर छिपा वज्र (वज्र छिपा) दिखाएं, जिससे संसार में एक शक्तिशाली नूतन कविता का संचार हो सके और विश्व की तप्त धारा शीतल हो सके।
यह ऐसा है, जैसे कोई धीमी आवाज़ में याचिका दायर करने के बजाय, सत्य को बुलंद आवाज़ में उद्घोषित करे ताकि हर तरफ परिवर्तन की लहर दौड़ जाए।