महादेवी वर्मा: मेरे बचपन के दिन

Detailed Notes: Mere Bachpan Ke Din

मेरे बचपन के दिन

विषय: हिंदी (क्षितिज भाग-1) लेखिका: महादेवी वर्मा (छायावाद)

1. लेखिका परिचय व शिक्षा

  • जन्म: 1907 (फर्रुखाबाद), मृत्यु: 1987.
  • शिक्षा: प्रयाग में हुई। बाद में ‘प्रयाग महिला विद्यापीठ’ की प्राचार्या बनीं।
  • प्रमुख गद्य रचनाएँ: अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, शृंखला की कड़ियाँ
  • काव्य संग्रह: नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा।
  • सम्मान: ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्म भूषण।

2. पारिवारिक पृष्ठभूमि (Imp)

लेखिका का परिवार विरोधाभासों का संगम था:

  • बाबा (दादाजी): फारसी और उर्दू के जानकार। दुर्गा भक्त। 200 साल बाद लड़की होने पर बहुत खुश हुए। सपना था: “हम इसको विदुषी (Scholar) बनाएँगे।”
  • पिताजी: अंग्रेजी पढ़े-लिखे थे।
  • माताजी: जबलपुर से आई थीं। हिंदी व संस्कृत जानती थीं। धार्मिक थीं (मीरा के पद गाती थीं)।
  • शिक्षा का आरंभ: माँ ने ‘पंचतंत्र’ पढ़ाना शुरू किया। मौलवी साहब पढ़ाने आए तो महादेवी डरकर चारपाई के नीचे छिप गईं! बाद में पंडित जी ने संस्कृत पढ़ाई।

3. छात्रावास का जीवन (प्रयाग)

क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज (5वीं कक्षा):

  • वातावरण बहुत अच्छा था। हिंदू, ईसाई, मुस्लिम लड़कियाँ साथ रहती थीं।
  • मेस (Mess): शुद्ध शाकाहारी। प्याज तक नहीं बनता था।
  • रूममेट (Roommate):
    1. सुभद्रा कुमारी चौहान: (सीनियर) कविता लिखती थीं।
    2. जेबुन्निसा: (कोल्हापुर से) मराठी-हिंदी मिश्रित बोलती थी।

★ सुभद्रा जी के साथ प्रसंग

महादेवी छिपकर ब्रजभाषा में तुकबंदी करती थीं। सुभद्रा जी ने उनकी डेस्क की तलाशी ली और कविताएँ पकड़ लीं।

परिणाम: पूरे हॉस्टल में बता दिया। दोनों पेड़ की डाल पर बैठकर कविताएँ रचने लगीं और ‘स्त्री दर्पण’ पत्रिका में छपवाने लगीं।

4. स्वतंत्रता आंदोलन और बापू

  • आनंद भवन: स्वतंत्रता संघर्ष का केंद्र था।
  • कवि सम्मेलन: महादेवी अक्सर जाती थीं (हरिऔध जी अध्यक्ष होते थे)। 100 से अधिक पदक मिले।
  • कटोरा प्रसंग: एक कविता पर चाँदी का नक्काशीदार कटोरा मिला।
    सुभद्रा जी ने मज़ाक में कहा: “अब एक दिन खीर बनाओ और मुझे इसमें खिलाओ।”
  • बापू से भेंट: महादेवी ने बापू को कटोरा दिखाया।
    → बापू ने पूछा: “तू देती है इसे?”
    → महादेवी ने देशहित में दे दिया।
  • सुभद्रा की प्रतिक्रिया: “खीर तो तुमको बनानी ही होगी, चाहे पीतल की कटोरी में खिलाओ!”
सांप्रदायिक सद्भाव का चित्र सद्भाव (Harmony) छात्रावास हिंदी-उर्दू-मराठी नवाब साहब ताई-चाची संबंध

5. आपसी प्रेम (सांप्रदायिकता का अभाव)

(क) जेबुन्निसा (रूममेट):

  • मराठी थी, पर हिंदी-मराठी मिलाकर बोलती थी (“इक्ड़े-तिकड़े”, “लौकर-लौकर”)।
  • महादेवी का डेस्क साफ करती ताकि वे कविता लिख सकें।

(ख) जवारा के नवाब (पड़ोसी):

  • बेगम साहिबा को ‘ताई’ कहते थे।
  • धर्म अलग था, पर रिश्ते सगे थे
  • राखी: ताई रक्षाबंधन पर महादेवी के भाई को तब तक पानी नहीं देतीं जब तक राखी न बँध जाए।
  • मुहर्रम: महादेवी के लिए भी हरे कपड़े बनते थे।
  • नामकरण: महादेवी के छोटे भाई का नाम ‘मनमोहन’ ताई ने ही रखा (जो बाद में वाइस चांसलर बने)।

निष्कर्ष (Conclusion):

लेखिका मानती हैं कि बचपन के वो दिन एक सपने जैसे थे। आज वैसी आत्मीयता और सांप्रदायिक सद्भाव दुर्लभ हो गया है।

“शायद वह सपना सत्य हो जाता तो भारत की कथा कुछ और होती।”

शब्द-संपदा

परमधाम स्वर्ग (मृत्यु)
नक्काशीदार बेल-बूटेदार
निराहार बिना कुछ खाए
आभास महसूस होना
प्रतिष्ठित सम्मानित
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