राजस्थान में सूती वस्त्र, चीनी और सीमेंट उद्योगों का वितरण और उत्पादन
राजस्थान में सूती वस्त्र, चीनी और सीमेंट उद्योग
प्रश्न 1: राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र कौन से हैं और इसका उत्पादन किस प्रकार वितरित है?
उत्तर: सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का सबसे प्राचीन, संगठित उद्योग है, जो कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देता है। इस उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं:
- वितरण/केंद्र: भीलवाड़ा, जिसे “वस्त्रनगरी” और राजस्थान का “मैनचेस्टर” कहा जाता है, इसका प्रमुख केंद्र है। अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों में पाली (जहाँ महाराजा उम्मेद सिंह सूती वस्त्र मिल्स स्थित है, जो राजस्थान की सबसे बड़ी मिल है), किशनगढ़ (अजमेर), श्रीगंगानगर, और उदयपुर शामिल हैं। भिवाड़ी को “नवीन मैनचेस्टर” कहा जाता है।
- उत्पादन एवं स्थिति: भीलवाड़ा वस्त्रनगरी के नाम से विख्यात है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1936 में हुई थी। भीलवाड़ा पूरे देश में अहमदाबाद के बाद डेनिम के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। यह विश्व का पॉलिएस्टर विस्कोस सूटिंग निर्माण का केंद्र बन गया है। भीलवाड़ा की 14 स्पिनिंग इकाइयाँ $1200$ करोड़ रुपए का धागा $60$ से अधिक देशों में निर्यात करती हैं। वर्ष 2017 में राजस्थान का कुल धागा उत्पादन $487.231$ किग्रा मिलियन रहा।
प्रश्न 2: राजस्थान के चीनी उद्योग का स्वरूप कैसा है, और इसकी प्रमुख मिलें कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: चीनी उद्योग गन्ने और चुकंदर पर आधारित मौसमी, कृषि आधारित उद्योग है, जो राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है।
- प्रमुख मिलें और वितरण: वर्तमान में राजस्थान में कुल 4 चीनी मिलें हैं:
- मेवाड़ शुगर मिल, भोपाल सागर (चित्तौड़गढ़): इसकी स्थापना 1932 ई. में हुई थी, और यह राजस्थान की पहली निजी क्षेत्र की शुगर मिल है।
- राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल (RSGSM), श्री गंगानगर (अब कमीनपुरा स्थानांतरित): इसकी स्थापना 1937 ई. में निजी क्षेत्र में हुई थी, लेकिन 1956 में इसे सार्वजनिक क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। इसमें 1968 में गन्ना और चुकंदर दोनों से चीनी बनाना शुरू किया गया था। यह देशी शराब, रॉयल हेरिटेज लिकर, और धौलपुर ग्लास संयंत्र में शराब की बोतलें भी बनाती है।
- श्री केशोरायपाटन शुगर मिल, बूंदी (1965): यह राजस्थान की पहली और एकमात्र सहकारी क्षेत्र की चीनी मिल है।
- उदयपुर शुगर मिल, उदयपुर (1976 में स्थापित)।
प्रश्न 3: राजस्थान में सीमेंट उद्योग का वितरण एवं उत्पादन की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: सीमेंट उद्योग एक खनिज आधारित आधारभूत अवसंरचनात्मक उद्योग है।
- वितरण और कच्चे माल का भंडार: सीमेंट उत्पादन के लिए चूना पत्थर (लाइमस्टोन), सिलिका और जिप्सम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। राजस्थान में $2.5$ अरब टन चूना पत्थर भंडार है, जो भारत के कुल प्रमाणित भंडार का लगभग $26%$ है।
- प्रमुख केंद्र: चित्तौड़गढ़ सीमेंट का अग्रणी उत्पादक जिला है। अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों में सवाई माधोपुर, बूंदी, उदयपुर, सिरोही, नागौर, और कोटा शामिल हैं। भविष्य में जैसलमेर एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बनने की ओर अग्रसर है, जहाँ 2026 से 2029 के बीच छः नए सीमेंट संयंत्रों की स्थापना की योजना है।
- उत्पादन स्थिति: वित्तीय वर्ष 2024 में, राजस्थान $74$ मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) उत्पादन के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि मध्य प्रदेश $80$ एमटीपीए के साथ शीर्ष पर था।
प्रश्न 4: राजस्थान के सीमेंट उद्योग को देश का नंबर वन बनने में क्या प्रमुख चुनौतियां/बाधाएं हैं?
उत्तर: प्रचुर कच्चे माल के बावजूद, राजस्थान कई कारणों से शीर्ष स्थान हासिल नहीं कर पा रहा है:
- ऊर्जा और जल की कमी: सीमेंट उत्पादन ऊर्जा-गहन है। राजस्थान में बिजली की लागत ₹7-8 प्रति यूनिट है, जो अन्य राज्यों से अधिक है। चित्तौड़गढ़ और सिरोही जैसे केंद्रों में पानी की सीमित उपलब्धता गीली प्रक्रिया (wet process) के लिए बाधा बनती है।
- बुनियादी ढांचा और प्रतिस्पर्धा: मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में रेल और सड़क नेटवर्क बेहतर है, जिससे राजस्थान में परिवहन लागत $10-15%$ अधिक है।
- कच्चे माल का निर्यात: लगभग $10-12$ एमटीपीए चूना पत्थर गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु को निर्यात होता है, जिससे स्थानीय उत्पादन क्षमता सीमित हो जाती है।
- सरकारी और नियामक बाधाएं: नई इकाइयों के लिए लाइसेंस और पर्यावरण मंजूरी में देरी होती है। उच्च बिजली लागत (जो उत्पादन लागत का $30%$ है) ने निवेशकों को गुजरात और कर्नाटक की ओर आकर्षित किया है (कुल शब्द: 395)