राजस्थान में जलविद्युत और गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधन

राजस्थान में जलविद्युत और गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधन

राजस्थान में जलविद्युत और गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 1: राजस्थान में गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से आप क्या समझते हैं? राज्य में इन स्रोतों के विकास हेतु कार्यरत प्रमुख संस्था और नीतिगत लक्ष्य क्या हैं?

उत्तर 1:

गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत (Non-conventional Energy Sources) वे स्रोत हैं जो प्रकृति में अक्षय (नवीकरणीय) होते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और बायोगैस।

प्रमुख संस्थान और नीतियां:

  • गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विकास के उद्देश्य से राजस्थान एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (REDA) (रेड़ा) की स्थापना सन् 1985 में की गई थी।
  • राज्य सरकार ने 6 अक्टूबर, 2023 को राजस्थान अक्षय ऊर्जा नीति और 29 सितंबर, 2023 को हाइड्रोजन नीति जारी की है।
  • सौर ऊर्जा के लिए, राजस्थान की सौर ऊर्जा नीति (18 दिसंबर 2019) के तहत राज्य में 2024-25 तक 30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • पवन ऊर्जा के लिए, प्रथम पवन ऊर्जा नीति 18 जुलाई 2012 को लागू की गई थी, जिसके बाद 18 दिसंबर 2019 को राजस्थान पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा नीति 2019 जारी की गई।
  • भारत सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, भारत 2030 तक अपनी 50% बिजली की क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करेगा।

प्रश्न 2: राजस्थान में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ कौन सी हैं, और इनमें राज्य की हिस्सेदारी कितनी है?

उत्तर 2:

राजस्थान में कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ अन्य राज्यों के साथ संयुक्त रूप से संचालित हैं:

  1. माही परियोजना जलविद्युत परियोजना: यह राजस्थान (45%) और गुजरात (55%) की संयुक्त परियोजना है। हालांकि, इस परियोजना से उत्पादित 144 मेगावाट विद्युत का 100 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान को प्राप्त होता है। यह माही नदी पर (बांसवाड़ा के बोरखेड़ा) माही बजाज सागर बांध और कडाना बांध के तहत चलाई जा रही है।
  2. चम्बल परियोजना जलविद्युत परियोजना: यह राजस्थान और मध्य प्रदेश (50:50) की संयुक्त परियोजना है। इससे कुल 386 मेगावाट विद्युत उत्पादित होती है, जिसमें से राजस्थान को 193 मेगावाट विद्युत प्राप्त होती है। इस परियोजना में तीन बांध शामिल हैं: गांधी सागर (म.प्र.), राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़), और जवाहर सागर (कोटा)।
  3. भाखड़ा नांगल परियोजना: यह राजस्थान (15.2%), पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना से राजस्थान को 227 मेगावाट विद्युत प्राप्त होती है।
  4. व्यास परियोजना: यह राजस्थान (20%), पंजाब, हरियाणा की संयुक्त परियोजना है और व्यास नदी पर पोंग बांध बनवाकर इसका निर्माण करवाया गया।
  5. जाखम बांध लघुपन जलविद्युत परियोजना: यह प्रतापगढ़ जिले में जाखम नदी पर चलाई जा रही है, जिसकी उत्पादन क्षमता 2.75 मेगावाट है।

प्रश्न 3: राजस्थान में पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के विकास और प्रमुख स्थानों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर 3:

पवन ऊर्जा:

  • पवन ऊर्जा की दृष्टि से भारत में राजस्थान का चौथा स्थान है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक पवन ऊर्जा संयंत्र जैसलमेर में लगे हुए हैं, जिसके कारण जैसलमेर को पंखों की नगरी उपनाम से भी जाना जाता है।
  • प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना जैसलमेर जिले के अमरसागर नामक स्थान पर 10 अप्रैल 1999 में स्थापित हुई थी।
  • राज्य का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र सोढा बंधन (जैसलमेर) में (25 मेगावाट) स्थापित है।
  • अन्य प्रमुख पवन ऊर्जा परियोजना स्थल देवगढ़ (प्रतापगढ़), हर्ष पर्वत (सीकर), और बीठडी (फलौदी, जोधपुर) हैं। मार्च 2024 तक राज्य में कुल 5209 मेगावाट क्षमता के पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

सौर ऊर्जा:

  • सौर ऊर्जा के मामले में राजस्थान भारत में प्रथम स्थान पर है, जिसकी स्थापित सौर क्षमता 22,860.73 मेगावाट है।
  • राज्य में 1 वर्ष में 325 से अधिक दिन सूर्यताप उपलब्ध होने के कारण सौर ऊर्जा की अत्यधिक संभावनाएँ हैं।
  • राजस्थान में सौर ऊर्जा की संभावित क्षमता 142 GW है।
  • भड़ला (जोधपुर) में 2,245 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क चार चरणों में विकसित किया गया है।
  • हाल ही में, सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) हरित ऊर्जा लिमिटेड (एसजीईएल) ने राजस्थान को बीकानेर और नावा में स्थापित परियोजनाओं से कुल 600 मेगावाट सौर ऊर्जा की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

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