कक्षा 9 स्पर्श भाग-1 अध्याय 6 रैदास के पद
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीजों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए—
| भगवान | भक्त |
|---|---|
| दीपक | बाती |
| चंद (चाँद) | चकोरा |
| जोति (प्रकाश) | राती |
| मोती | पानी |
| स्वामी | दासी |
(ख) पहले पद की तुकांत पंक्तियों से अन्य तुकांत शब्द छाँटिए—
- मोरा – तोरा
- चकोरा – फुहारा
- बाती – राती
- समानी – पानी
- दासी – आसी
(ग) पहले पद में अर्थ की दृष्टि से संबद्ध शब्द छाँटिए—
उदाहरण: दीपक — बाती
अन्य जोड़े:
- चंद — चकोरा
- जोति — राती
- मोती — पानी
- स्वामी — दासी
(घ) दूसरे पद में कवि ने ‘गरीब निवाजु’ किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए—
कवि ने ‘गरीब निवाजु’ अपने आराध्य भगवान को कहा है, क्योंकि वह निर्धनों, दरिद्रों, दलितों व उपेक्षितों पर विशेष कृपा करते हैं और बिना भेदभाव उन्हें अपनाते हैं।
(ङ) ‘जाकी छोति जगत कउ लागे ता पर तुहीं ढर्रे’ का आशय—
इस पंक्ति में कहा गया है कि जो संसार में सबसे तुच्छ, नीचा और अपमानित समझा जाता है, उसी पर भगवान की विशेष कृपा होती है। ईश्वर किसी जाति, वर्ण या स्थिति को देखकर भेदभाव नहीं करते।
(च) रैदास ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?
रैदास ने अपने ईश्वर को निम्नलिखित नामों से पुकारा है:
- लाल
- गोबिंदु
- गुसईआ
- गरीब निवाजु
(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप—
| अप्रचलित | प्रचलित |
|---|---|
| मोरा | मेरा |
| चंद | चाँद |
| बाती | बाती |
| जोति | ज्योति |
| वर | वर |
| राती | रात |
| छत्रु | शत्रु |
| धरै | धरे |
| छोति | छोटा / तुच्छता |
| तुहीं | तुम ही |
| गुसईआ | गुसाईं / स्वामी |
2. नीचे दी गई पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) “जाकी अंग-अंग बास समानी”
जिसके शरीर के प्रत्येक अंग में प्रभु की उपस्थिति समाई हुई है, वह परम भक्त है। उसका संपूर्ण शरीर आध्यात्मिक भक्ति से सुगंधित है।
(ख) “जैसे चितवत चंद चकोरा”
जिस प्रकार चकोरा पक्षी सदा चंद्रमा को एकटक देखता है, उसी प्रकार सच्चा भक्त निरंतर ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है।
(ग) “जाकी जोति बरै दिन राती”
जिसके जीवन में भक्ति की जोत (प्रकाश) दिन‑रात निरंतर जलती रहती है, वही सच्चा भक्त है जो हर समय प्रभु के प्रेम में डूबा रहता है।
(घ) “ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करें”
हे प्रभु! जैसी कृपा और दया तू करता है, वैसी इस संसार में कोई दूसरा नहीं कर सकता।
(ङ) “नीचहु ऊच कर मेरा गोबिंदु काह ते न डरे”
मेरा ईश्वर तो इतना निष्पक्ष और करुणामय है कि वह नीच से नीच को भी ऊँचा बना देता है, और उसे यह करने में कोई संकोच या डर नहीं लगता।
3. रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए—
रैदास के इन पदों में भक्ति की महिमा, ईश्वर की करुणा, और समता का संदेश निहित है। वे बताते हैं कि भक्त और भगवान का संबंध अत्यंत घनिष्ठ होता है — जैसे दीपक और बाती, चंद्रमा और चकोरा। ईश्वर किसी का भेद नहीं करता, वह गरीब, नीच, अपमानित को भी सम्मानित करता है। सच्चा भक्त वह है जो हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करता है और उसमें लीन रहता है।