राजस्थान में प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ – चम्बल, माही और इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आई.एन.जी.सी.पी.)

राजस्थान में प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ – चम्बल, माही और इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आई.एन.जी.सी.पी.)


राजस्थान में प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ: प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1: इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के अन्य नाम क्या हैं, और यह किस नदी संगम से निकाली गई है?

उत्तर: इंदिरा गांधी नहर को राजस्थान की मरूगंगा या जीवन रेखा भी कहा जाता है। इसका पुराना नाम “राजस्थान नहर” था। यह विश्व की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। इसका उद्गम स्थल पंजाब में सतलज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज है।

प्रश्न 2: IGNP के निर्माण और नाम परिवर्तन से संबंधित प्रमुख तिथियां क्या हैं, और यह राजस्थान के कितने जिलों को लाभान्वित करती है?

उत्तर: इस परियोजना को मूल रूप से 1948 में बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता श्री कंवर सेन द्वारा प्रस्तावित किया गया था। इसकी आधारशिला 31 मार्च 1958 को गोविंद बल्लभ पंत ने रखी थी। 2 नवंबर 1984 को इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया। यह परियोजना राजस्थान के 10 जिलों, जिनमें गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, झुंझुनू और सीकर शामिल हैं, को सिंचाई और पेयजल सुविधाएँ उपलब्ध कराती है।

प्रश्न 3: चंबल नदी परियोजना किन राज्यों की संयुक्त योजना है और इसमें साझेदारी का अनुपात क्या है?

उत्तर: चंबल नदी परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश की एक संयुक्त बहुउद्देशीय योजना है। यह साझेदारी 50-50% की है। यह राजस्थान की सबसे बड़ी और बारहमासी नदियों में से एक है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1953-54 में हुई थी। इस परियोजना के तहत तीन प्रमुख बांधों में गांधी सागर बांध (म.प्र.), राणा प्रताप सागर बांध (राजस्थान) और जवाहर सागर बांध (राजस्थान) शामिल हैं।

प्रश्न 4: माही बजाज सागर बांध कहाँ स्थित है? यह परियोजना किस उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण है?

उत्तर: माही बजाज सागर बांध माही नदी के पार, राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में बोरखेड़ा गाँव के निकट स्थित है। इसका निर्माण 1972 में शुरू हुआ और 1983 में यह चालू हुआ था। यह राजस्थान के जनजाति क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट है। इस बांध का नाम जमनालाल बजाज के नाम पर रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और जल आपूर्ति है। इस परियोजना से सर्वाधिक लाभ बांसवाड़ा जिले को होता है। बांध की स्थापित क्षमता 140 MW है।

प्रश्न 5: पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच हालिया समझौता क्या है?

उत्तर: ईआरसीपी को लेकर राजस्थान (जो 75% वाटर डिपेंडेबिलिटी पर अड़ा था) और मध्य प्रदेश (जो 50-50% मांग रहा था) के बीच लगभग 20 साल से पानी के बंटवारे को लेकर विवाद था। संशोधित प्रोजेक्ट पर हुए समझौते के तहत, ईआरसीपी को पार्वती कालीसिंध चंबल योजना (नदी जोड़ो योजना) के साथ मर्ज कर दिया गया है। इस सिंगल प्रोजेक्ट के माध्यम से अब राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों के 13-13 जिलों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद, इस संशोधित प्रोजेक्ट की 90% लागत का भुगतान केंद्र सरकार करेगी। इससे राजस्थान की 2.80 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा।


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