संग्रहालयों की उत्पत्ति अर्थ परिभाषा और उद्देश्य

संग्रहालयों की उत्पत्ति, अर्थ, परिभाषा और उद्देश्य (Origin, Meaning, Definition and Purposes of Museums)

I. उत्पत्ति और ऐतिहासिक विकास (Origin and Historical Development)

संग्रहालय की अवधारणा शास्त्रीय काल से जुड़ी है, जिसकी उत्पत्ति प्राचीन यूनानी शब्द Μουσεῖον (Mouseion) से हुई है, जिसका अर्थ है “मूसा (Muse) का आसन”। मूसा यूनानी पौराणिक कथाओं में कला और विज्ञान की संरक्षक देवियाँ थीं। यह शब्द मूल रूप से दार्शनिक संस्था या चिंतन के स्थान को दर्शाता था।

प्रारंभिक आधार (Early Foundations):

  • प्राचीन काल: ज्ञात सबसे पुराने संस्थानों में से एक एन्निगाल्डी-नानना का संग्रहालय था, जिसे राजकुमारी एन्निगाल्डी ने आधुनिक इराक के उर में लगभग 530 ईसा पूर्व स्थापित किया था। यहाँ मेसोपोटामिया की प्राचीन वस्तुएँ रखी गई थीं। सिकंदरिया का महान संग्रहालय टॉलेमी प्रथम द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में स्थापित किया गया था। प्राचीन काल में, पुस्तकालयों और संग्रहालयों के बीच बहुत कम अंतर किया जाता था।
  • प्रारंभिक आधुनिक युग: 15वीं शताब्दी में इस शब्द का उपयोग आधुनिक संग्रहों के समान चीज़ों का वर्णन करने के लिए किया गया था, जैसे फ्लोरेंस में लोरेंजो डी मेडिसी का संग्रह। शुरुआती संग्रहालय आमतौर पर निजी संग्रह थे जिन्हें अक्सर “आश्चर्य कक्ष” (wonder rooms) या “जिज्ञासा कक्ष” (cabinets of curiosities) कहा जाता था। ये संग्रह केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही सुलभ थे।
  • सार्वजनिक संस्थानों की ओर बदलाव:
    • कैपिटोलाइन संग्रहालय (Capitoline Museums), रोम (1471): इसकी उत्पत्ति 1471 में हुई, जब पोप सिक्स्टस IV ने रोम के लोगों को प्राचीन कांस्य की मूर्तियाँ दान कीं। इसे 1734 में आधिकारिक तौर पर जनता के लिए खोला गया और यह दुनिया का सबसे पुराना सार्वजनिक संग्रहालय माना जाता है।
    • एशमोलियन संग्रहालय (Ashmolean Museum), ऑक्सफोर्ड (1683): यह 1677 में इलियास एशमोल के निजी संग्रह से स्थापित हुआ और 24 मई 1683 को जनता के लिए खुला। इसे “संग्रहालय” नाम रखने वाला पहला सार्वजनिक संग्रहालय माना जाता है।
    • ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum), लंदन: सर हैंस स्लोएन के निजी संग्रह के आधार पर 1753 में स्थापित किया गया और 1759 में जनता के लिए खोला गया।
    • लूव्र संग्रहालय (Louvre Museum), पेरिस: यह फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 1793 में खोला गया, जिसने पहली बार पूर्व शाही संग्रहों तक आम जनता की पहुँच संभव बनाई।
  • भारत में विकास: भारत में संग्रहालयों की परंपरा इंडियन म्यूजियम, कोलकाता (1814 में स्थापित) से शुरू हुई, जिसे एशियाटिक सोसायटी ने स्थापित किया था।

II. अर्थ और परिभाषा (Meaning and Definition)

संग्रहालय की परिभाषा समय के साथ विकसित होती रही है, और यह अंतर्राष्ट्रीय पेशेवर निकायों जैसे संग्रहालयों की अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOM) द्वारा मार्गदर्शन पाती है।

1. सामान्य अर्थ

संग्रहालय एक सांस्कृतिक संस्था है जो मानवता और पर्यावरण की विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखती है। यह शिक्षा, प्रेरणा और आनंद प्रदान करने के उद्देश्य से भौतिक (tangible) और अमूर्त (intangible) विरासत का संग्रह, संरक्षण, शोध, व्याख्या और प्रदर्शन करता है।

2. आईकॉम (ICOM) द्वारा परिभाषा

ICOM की परिभाषाएँ संग्रहालय के अर्थ, उद्देश्य और बदलती भूमिकाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  • ICOM परिभाषा (2007): “एक संग्रहालय एक गैर-लाभकारी, स्थायी संस्था है जो समाज और उसके विकास की सेवा में है, जो जनता के लिए खुला है, जो शिक्षा, अध्ययन और आनंद के उद्देश्यों के लिए मानवता और उसके पर्यावरण की भौतिक और अमूर्त विरासत का अधिग्रहण करता है, संरक्षण करता है, शोध करता है, संचार करता है और प्रदर्शित करता है”।
  • ICOM परिभाषा (2022 – वर्तमान): “एक संग्रहालय एक गैर-लाभकारी, स्थायी संस्था है जो समाज की सेवा में भौतिक और अमूर्त विरासत का शोध, संग्रह, संरक्षण, व्याख्या और प्रदर्शन करती है। जनता के लिए खुला, सुलभ और समावेशी, संग्रहालय विविधता और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। वे समुदायों की भागीदारी के साथ नैतिक रूप से, पेशेवर रूप से संचालित और संवाद करते हैं, और शिक्षा, आनंद, चिंतन और ज्ञान साझा करने के लिए विभिन्न अनुभव प्रदान करते हैं”।
    • मुख्य परिवर्तन: 2022 की परिभाषा में समावेशिता, स्थिरता, नैतिकता और सामुदायिक भागीदारी पर स्पष्ट रूप से जोर दिया गया है, जो संग्रहालयों की सामाजिक और राजनीतिक भूमिका में बदलाव को दर्शाता है।

III. उद्देश्य और मूल कार्य (Purposes and Core Functions)

संग्रहालयों का मूल उद्देश्य (raison d’être) अक्सर ‘सामूहिक मूल्यों और सामाजिक समझ’ का प्रतिनिधित्व करना, शिक्षित करना और उन्हें आकार देना परिभाषित किया जाता है।

संग्रहालय निम्नलिखित मूल कार्य (Core Functions) करते हैं, जो उनके संचालन के लिए अनिवार्य हैं:

  1. संग्रहण/अधिग्रहण (Collection/Acquisition):
    • संग्रहालय के मिशन के लिए प्रासंगिक वस्तुओं, कलाकृतियों या नमूनों का व्यवस्थित अधिग्रहण करना।
    • यह प्रक्रिया संग्रह नीति द्वारा नियंत्रित होती है, जिसमें उत्पत्ति (provenance) और नैतिक विचारों को सुनिश्चित किया जाता है।
  2. संरक्षण (Preservation/Conservation):
    • संग्रह की लंबी अवधि की उत्तरजीविता और अखंडता सुनिश्चित करना।
    • इसमें निवारक संरक्षण (Preventive Conservation) (पर्यावरण नियंत्रण, कीट प्रबंधन, सुरक्षित भंडारण) और उपचार/पुनर्स्थापन (Remedial/Restoration) शामिल है।
  3. शोध (Research):
    • संग्रह के बारे में ज्ञान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बौद्धिक गतिविधियाँ और कार्य करना।
    • शोध से प्रकाशन, प्रदर्शनियाँ और वर्गीकरण प्रणालियाँ बनती हैं।
  4. प्रलेखन (Documentation):
    • संग्रह के बौद्धिक नियंत्रण, प्रबंधन और पहुँच के लिए प्रत्येक वस्तु का एक व्यापक और पुनः प्राप्त करने योग्य रिकॉर्ड बनाना।
    • इसमें मैनुअल रिकॉर्ड, डिजिटल डेटाबेस (CMS), और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड (जो वस्तुओं की स्थिति और विवरण का दृश्य प्रमाण प्रदान करते हैं) शामिल हैं।
  5. प्रदर्शनी/संचार (Exhibition/Communication):
    • प्राथमिक माध्यम जिसके द्वारा संग्रहालय अपने संग्रह, शोध और ज्ञान को दर्शकों के साथ साझा करते हैं।
    • प्रदर्शनी में वस्तुतः वास्तविक चीज़ों (real things) का संवेदी प्रदर्शन (sensory display) शामिल होता है, जो पाठ, मल्टीमीडिया और इंटरैक्टिव तत्वों द्वारा पूरक होता है।
  6. शिक्षा (Education):
    • व्यक्तियों के विकास और पूर्ति के लिए ज्ञान के आत्मसात, नई संवेदनशीलता के विकास और नए अनुभवों के अहसास के माध्यम से प्रशिक्षण और विकास की प्रक्रिया।
    • संग्रहालय शिक्षा अनौपचारिक शिक्षा है, जो मुख्य रूप से आगंतुक की स्व-प्रेरणा पर निर्भर करती है।
  7. सामाजिक न्याय और समुदाय सेवा (Social Justice and Community Service):
    • संग्रहालयों को समावेशी, सुलभ होना चाहिए और विविधता तथा स्थिरता को बढ़ावा देना चाहिए।
    • संग्रहालय समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में कार्य करते हैं, विशेष रूप से “न्यू म्यूजियोलॉजी” के तहत।
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