राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि के कारण, समस्याएं और समाधान

राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि के कारण, समस्याएं और समाधान

प्रश्न 1: राजस्थान में निरंतर जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी प्रमुख सामाजिक-जनांकिकीय कारण क्या हैं, और ये कारक मृत्यु दर को कैसे प्रभावित करते हैं?

उत्तर 1: राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि के लिए मुख्य रूप से कई सामाजिक और जनांकिकीय कारक उत्तरदायी हैं।

  1. स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और जीवन प्रत्याशा: राज्य में निरंतर स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है, जो जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण रहा है। जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में भी वृद्धि हुई है; यह $2002-06$ में $62$ वर्ष से बढ़कर $2014-18$ में $68.7$ वर्ष हो गई।
  2. बाल विवाह और प्रजनन क्षमता: बाल विवाह एक मुख्य सामाजिक कुरीति है। कम उम्र में विवाह हो जाने के कारण महिलाएँ संतानोत्पत्ति योग्य आयु (reproductive age) का पूर्ण उपयोग करती हैं, जिससे बच्चों की संख्या बढ़ती है।
  3. धार्मिक और सामाजिक मान्यताएँ: संतान प्राप्ति को ईश्वरीय देन मानना और गर्भनिरोधक उपायों को न अपनाना जनसंख्या वृद्धि का कारण है। इसके अतिरिक्त, पुत्र की सद्गति और मुक्ति की अवधारणा (पुत्र प्राप्ति की लालसा) भी जनसंख्या वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  4. अशिक्षा और रूढ़िवादिता: अशिक्षा के कारण समाज रूढ़िवादिता और अंधविश्वासों से घिरा रहता है। इससे परिवार नियोजन के उपायों की उपयुक्त जानकारी का अभाव रहता है, जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होती है।

प्रश्न 2: राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि के दबाव से उत्पन्न होने वाली गंभीर सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियाँ क्या हैं?

उत्तर 2: जनसंख्या का अत्यधिक दोहन और वृद्धि राज्य में बहुआयामी चुनौतियाँ उत्पन्न करती है:

  1. पर्यावरण अवनयन और प्रदूषण: जनसंख्या वृद्धि अध्ययन क्षेत्र में पर्यावरण अवनयन का प्रमुख कारक है। प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग (Overexploitation) के कारण जैव विविधता में कमी आई है, तथा मृदा, जल, भूमि और वायु स्रोतों का प्रदूषण बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, दौसा जिले में वायु प्रदूषण एक बड़ा जोखिम कारक है, जहां अस्थमा के मरीजों की संख्या प्रति लाख 1320 है। औद्योगिक अपशिष्टों और विषैली गैसों (जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड) के कारण उच्च रक्तचाप, अस्थमा और सिलिकोसिस जैसी बीमारियाँ फैल रही हैं।
  2. जल संकट और भूजल का अत्यधिक दोहन: बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण जल संसाधनों पर भारी दबाव उत्पन्न हुआ है। राज्य का अधिकांश क्षेत्रफल (लगभग $60%$) थार मरुस्थल के अंतर्गत आता है, जहाँ जल की उपलब्धता सीमित है। अनियंत्रित दोहन के कारण भूजल स्तर $100$ मीटर से अधिक नीचे चला गया है, और फ्लोराइड तथा खारापन जैसी समस्याओं ने जल की गुणवत्ता को प्रभावित किया है।
  3. बेरोजगारी और उत्प्रवास (Migration): अनियमित मौसम और सिंचाई के अभाव में कृषि आजीविका का साधन नहीं रह गई है, जिससे बेरोजगारी बढ़ी है। रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण बड़ी संख्या में उत्प्रवास होता है। जनगणना $2011$ के अनुसार, राजस्थान से $2.20$ करोड़ लोगों ने उत्प्रवास किया, जिसमें पुरुष मुख्य रूप से रोजगार के आर्थिक कारणों से, जबकि महिलाएँ मुख्य रूप से वैवाहिक कारणों से प्रवास करती हैं।
  4. शहरीकरण और मलिन बस्तियों का विकास: ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन (çoklu) तेजी से हो रहा है। इससे शहरों में आधारभूत सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है और मलिन बस्तियाँ (Slums) विकसित होती हैं, जहाँ स्वच्छ पानी, बिजली और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी होती है।

प्रश्न 3: जनसंख्या वृद्धि की समस्याओं के समाधान और सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान सरकार ने क्या महत्वपूर्ण रणनीतियाँ और हस्तक्षेप लागू किए हैं?

उत्तर 3: जनसंख्या नियंत्रण और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा बहुआयामी रणनीतियाँ अपनाई गई हैं:

  1. कानूनी एवं नीतिगत उपाय: आबादी नियंत्रण कानून (1992) के तहत $2$ से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अतिरिक्त, सतत शहरी विकास और जनांकिकीय प्रबंधन (tulkaf[;dh çca/ku) पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  2. मानव संसाधन विकास और महिला सशक्तिकरण: सरकार शिक्षा और कौशल विकास में निवेश कर रही है। लैंगिक समानता (SDG-5) को बढ़ावा देने के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं लागू हैं, क्योंकि महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जनसंख्या नियंत्रण में सहायक हैं।
  3. जल प्रबंधन और संरक्षण: जल संकट को दूर करने के लिए, जल जीवन मिशन और मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान जैसी योजनाएं चल रही हैं। कृत्रिम पुनर्भरण (Artificial Recharge) तकनीकों और ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ग्राम स्तर पर जल साक्षरता अभियान (Water Literacy) चलाना और जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।
  4. रोजगार सृजन और कौशल विकास: बेरोजगारी कम करने के लिए स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में विकास और तकनीकी शिक्षा को आगे बढ़ाकर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
  5. स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा: राजस्थान स्वास्थ्य देखभाल अधिकार अधिनियम-2023 लागू किया गया है। गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी पहल सक्रिय हैं, जो कमजोर वर्गों को वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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