राजस्थान में प्रमुख जनजातियों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति
प्रश्न 1: मीणा जनजाति (Meena Tribe) की सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: मीणा जनजाति राजस्थान का सबसे बड़ा और सबसे अधिक साक्षर तथा संपन्न आदिवासी समूह है।
- उत्पत्ति और निवास: मीणा शब्द की उत्पत्ति ‘मीन’ (मछली) शब्द से हुई है, और वे मानते हैं कि उनका उद्भव भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से हुआ है। वे मुख्य रूप से अलवर, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर और उदयपुर जिलों में निवास करते हैं।
- सामाजिक संरचना: उनके घरों को ‘झोंपड़ी’ और गाँवों को ‘पाल’ कहते हैं, तथा मुखिया ‘पटेल’ कहलाता है। ऐतिहासिक रूप से, मीणा दो मुख्य वर्गों में विभाजित थे: ज़मींदार मीणा (जो कृषि करते थे) और चौकीदार मीणा (जो राजाओं के कोषागारों की रखवाली करते थे)।
- विवाह एवं प्रथाएँ: मीणाओं में अंतर्विवाह (Endogamy) प्रचलित है। इनमें ‘नाता’ प्रथा और ‘झगड़ा प्रथा’ (विवाह प्रथा) का भी प्रचलन है। मृत्यु पर दिए जाने वाले सामूहिक भोज को ‘मोसर’ या ‘नुक्ता’ कहा जाता है।
- आध्यात्मिक जीवन: वे मुख्यतः शक्ति की उपासक हैं। उनके प्रमुख आराध्य देव गोमतेश्वर (भूरिया बाबा) हैं।
प्रश्न 2: गरासिया जनजाति (Garasia Tribe) की प्रमुख विवाह प्रथाओं और समाज में महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: गरासिया जनजाति मुख्य रूप से सिरोही, उदयपुर और पाली जिलों में निवास करती है। उनका सामाजिक जीवन कई प्रगतिशील विवाह परंपराओं के लिए जाना जाता है।
- विवाह प्रथाएँ: गरासियों में प्रेम विवाह तयशुदा विवाहों की तुलना में अधिक प्रचलित हैं। युवक-युवतियाँ अक्सर मेलों और त्योहारों के दौरान अपने जीवनसाथी का चुनाव करते हैं।
- दापा प्रथा / लिव-इन रिलेशनशिप: इस प्रथा के तहत युवक-युवती विवाह मेले में पार्टनर चुनकर भाग जाते हैं और लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं। वे तभी विवाह करते हैं जब उनके पास पर्याप्त धन हो जाता है और बच्चा पैदा हो जाता है। विवाह के प्रकारों में ‘मोर बंधिया’ (फेरे लेकर विवाह), ‘पहरावना’ (बिना फेरे), और ‘ताड़ना/तन्ना विवाह’ (वधू मूल्य देकर) शामिल हैं।
- महिलाओं की स्थिति: गरासिया जनजाति समय से काफी आगे मानी जाती है, क्योंकि यहाँ महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा ऊँचा दर्जा और अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है। उन्हें पार्टनर बदलने की भी पूर्ण स्वतंत्रता है; नए पार्टनर को पुराने पार्टनर की तुलना में अधिक पैसे देने पड़ते हैं। महिलाएँ कृषि और निर्णय लेने में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।
प्रश्न 3: भील और सहरिया जनजाति की निवास पद्धति (Habitat Pattern) एवं प्रमुख सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भील जनजाति (Bhil Tribe):
- निवास पद्धति: भील पहाड़ियों की ढलानों और घाटियों में छोटे-छोटे गाँवों या बस्तियों में रहते हैं। उनके घरों को ‘कू’ या ‘टापरा’, बस्तियों को ‘फाला’ और फाला के समूह को ‘पाल’ कहा जाता है। भीलों का प्रमुख व्यवसाय खेती, आखेट और पशुपालन रहा है। वे धनुर्विद्या में निपुण होते थे, और ‘भील’ शब्द का अर्थ ही ‘धनुष’ माना जाता है।
- विवाह प्रथाएँ: भीलों में वधू मूल्य चुकाने की प्रथा प्रचलित है। तलाक को ‘छेड़ा फाड़ना’ कहा जाता है।
सहरिया जनजाति (Sahariya Tribe):
- आदिम जनजाति का दर्जा: सहरिया राजस्थान की एकमात्र ‘आदिम जनजाति’ है। ‘सहरिया’ शब्द अरबी शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है ‘जंगल’।
- निवास पद्धति: सहरिया लोग बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में निवास करते हैं। ये समूह में निवास करते हैं; इनके घरों के समूह को ‘शहरोल’ और गाँव को ‘सहराना’ कहते हैं। सहरानों के बीच में स्थित गोलाकार झोंपड़ी को ‘बंगला’ कहते हैं, जो सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होता है।
- सामाजिक/आर्थिक स्थिति: सहरिया जनजाति आर्थिक रूप से काफी पिछड़ी हुई है। उनकी आजीविका कृषि, पशुपालन और वन उपज के संग्रहण पर आधारित है। उनके पारंपरिक पंचायत मुखिया को ‘कोतवाल’ या ‘पटेल’ कहा जाता है।