राजस्थान में महिलाओं की स्थिति

राजस्थान में महिलाओं की स्थिति: प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी किस प्रकार बढ़ी है, और उनके पूर्ण सशक्तिकरण में प्रमुख बाधाएँ क्या हैं?

उत्तर: राजस्थान पंचायती राज प्रणाली लागू करने वाला भारत का पहला राज्य था। भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2010 में इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी से उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक पहचान और निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि हुई है। कई महिला सरपंचों ने स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किए हैं।

हालांकि, उनके पूर्ण सशक्तिकरण में अभी भी कई बाधाएँ हैं। सबसे प्रमुख समस्या ‘सरपंच पति’ (Proxy Representation) की है, जहाँ निर्वाचित महिला प्रतिनिधि केवल नाममात्र की होती हैं और उनके पति या परिवार के अन्य पुरुष निर्णय लेते हैं। इसके अलावा, अशिक्षा और सामाजिक रूढ़िवादिता (पर्दा प्रथा और सीमित पारिवारिक स्वीकृति) उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने से रोकती है।

प्रश्न 2: NFHS-5 और NCRB रिपोर्ट 2023 के अनुसार, राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख संकेतक क्या हैं?

उत्तर: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर रहा, जहाँ 45,450 मामले दर्ज किए गए। अपराध दर (प्रति लाख महिला जनसंख्या पर 114.8) के मामले में यह राज्य दूसरे स्थान पर रहा। दहेज हत्या, बलात्कार, और पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (IPC $498\text{A}$) जैसे विभिन्न अपराधों की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही।

NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, राज्य में लगभग 24 प्रतिशत महिलाओं (18 से 49 वर्ष) ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया। स्वास्थ्य की दृष्टि से, 54 प्रतिशत महिलाएँ (15-49 वर्ष) एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, जो एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। सर्वेक्षण से पाँच साल पहले 20 से 24 वर्ष की आयु की एक-चौथाई महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की कानूनी न्यूनतम आयु से पहले हुआ था।

प्रश्न 3: राजस्थान सरकार की ‘मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम योजना’ (MWFHY) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है और ग्रामीण महिलाओं के शैक्षिक स्तर में क्या चुनौतियाँ हैं?

उत्तर: मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम योजना (MWFHY 2025) राजस्थान सरकार द्वारा महिलाओं के लिए घर बैठे रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत महिलाएं हर महीने ₹15,000 तक की आय कर सकती हैं। यह पहल उन महिलाओं के लिए है जो घरेलू जिम्मेदारियों या सामाजिक कारणों से बाहर जाकर नौकरी नहीं कर पाती हैं। इस योजना में सिलाई, हैंडीक्राफ्ट, पैकेजिंग जैसे काम दिए जाते हैं। तलाकशुदा, विधवा, विकलांग, हिंसा पीड़ित और परित्यक्ता महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है।

शैक्षिक चुनौतियों के संदर्भ में, 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की औसत साक्षरता दर मात्र 45.8 प्रतिशत थी। लड़कियों की शिक्षा सुविधाओं की कमी से प्रभावित होती है; स्कूल से दूरी और बुनियादी सुविधाओं (जैसे कार्यात्मक शौचालय) का अभाव उन्हें मासिक धर्म के दौरान स्कूल आने से रोकता है, जिससे उनका ड्रॉप आउट हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में, जातिगत भेदभाव और छेड़छाड़ की घटनाएँ भी बालिकाओं की शिक्षा को प्रभावित करती हैं।

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