संग्रहालय विज्ञान और संग्रहालय लेखन

संग्रहालय विज्ञान और संग्रहालय लेखन (Museology and Museography)

I. संग्रहालय विज्ञान (Museology) और संग्रहालय लेखन (Museography) में अंतर

संग्रहालय विज्ञान और संग्रहालय लेखन, हालांकि संग्रहालय क्षेत्र से अंतर्निहित रूप से जुड़े हुए हैं, दोनों अलग-अलग शैक्षणिक और व्यावहारिक अनुशासन हैं।

अनुशासनमुख्य फोकसपरिभाषा और दायरा
संग्रहालय विज्ञान (Museology)सिद्धांत और वैज्ञानिक अध्ययनयह संग्रहालयों का वैज्ञानिक अध्ययन है,,। इसमें संग्रहालयों के इतिहास, मिशन, समाज में उनकी भूमिका, और संग्रहों के आयोजन, प्रबंधन, संरक्षण, अनुसंधान और व्याख्या के सिद्धांतों और विधियों का व्यवस्थित अध्ययन शामिल है,। संग्रहालय विज्ञान, संग्रहालय संचालन की दक्षता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक समर्थन और पेशेवर कार्यप्रणाली प्रदान करता है। इसे यूनानी जड़ों Mouseion (मूसा को समर्पित स्थान) और logos (अध्ययन/विज्ञान) से लिया गया है।
संग्रहालय लेखन (Museography)व्यावहारिक अनुप्रयोग और प्रदर्शनी तकनीकेंयह उन व्यावहारिक तकनीकों को संदर्भित करता है जो संग्रहालय के कार्यों को पूरा करने के लिए विकसित की जाती हैं। यह प्रदर्शनियों के संगठन और डिज़ाइन से संबंधित है, जिसमें वस्तुओं की व्यवस्था करना, उपयुक्त प्रकाश व्यवस्था का चयन करना, और एक स्पष्ट संदेश देने के लिए सुसंगत दृश्य प्रस्तुति बनाना शामिल है,। यह क्यूरेटर द्वारा दिए गए वैचारिक विमर्श के आधार पर एक दृश्य विमर्श उत्पन्न करता है। इसे यूनानी जड़ों Mouseion और grapho (लिखना या वर्णन करना) से लिया गया है।
संबंधपारस्परिक निर्भरतासंग्रहालय और संग्रहालय विज्ञान एक-दूसरे पर निर्भर हैं; संग्रहालय व्यावहारिक संस्थान हैं, और संग्रहालय विज्ञान आवश्यक सैद्धांतिक समर्थन प्रदान करता है। संग्रहालय लेखन में वस्तुओं की दृश्य प्रस्तुति (Visual Presentation) शामिल है, जो उन वस्तुओं के प्रबंधन, अनुसंधान और संरक्षण (Museology) से आंतरिक रूप से जुड़ी हुई है।

II. संग्रहालय विज्ञान (Museology)

A. पारंपरिक (या रूढ़िवादी) संग्रहालय विज्ञान (Conventional/Traditional Museology)

पारंपरिक संग्रहालय विज्ञान 19वीं और 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध की प्रथाओं से प्रेरित है, जो संग्रहों और विद्वतापूर्ण कार्यों पर केंद्रित था:

  • मुख्य फोकस (Object-Centeredness): यह संग्रहों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करता था, जिसमें वस्तुओं के संग्रहण, संरक्षण, और विद्वतापूर्ण अनुसंधान को प्राथमिकता दी जाती थी,। पारंपरिक संग्रहालय विज्ञान की कार्यप्रणाली संग्रहों पर आधारित थी, और क्यूरेटोरियल कार्य को केंद्रीय माना जाता था।
  • आलोचना: बाद के आलोचकों ने पारंपरिक संग्रहालयों को अभिजात्यवादी (elitist), पृथक (isolated), और अप्रचलित (obsolete) माना। उन्हें सांस्कृतिक अभिजात वर्ग की सेवा करने वाला और विशिष्ट सामाजिक समूहों के सांस्कृतिक हितों को दर्शाने वाला माना जाता था,।
  • आख्यान (Narrative): पारंपरिक मॉडल अक्सर इतिहास या कलात्मक आख्यान का एकल, रैखिक और निर्विवाद दृष्टिकोण प्रस्तुत करते थे,।
  • औपनिवेशिक विरासत: कई पारंपरिक संग्रहालयों की आलोचना इस आधार पर की गई कि वे औपनिवेशिक संग्रह, वर्गीकरण, और व्याख्या के ढाँचे की विरासत को आगे बढ़ाते हैं।

B. नया संग्रहालय विज्ञान (New Museology)

नया संग्रहालय विज्ञान (Nouvelle Muséologie) 1970 और 1980 के दशक में उभरा। यह पारंपरिक, वस्तु-केंद्रित दृष्टिकोणों की आलोचना के जवाब में एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक आंदोलन है,,।

उत्पत्ति और संदर्भ:

  • यह उपनिवेशवाद-विरोध (postcolonial critique) और पारंपरिक संग्रहालय विज्ञान की विफलताओं की धारणा से विकसित हुआ,।
  • यह मुख्य रूप से स्वदेशी लोगों को उनकी सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधित्व में शामिल करने की बढ़ती माँगों के परिणामस्वरूप उभरा।
  • नया संग्रहालय विज्ञान संग्रहालयों की सामाजिक और राजनीतिक भूमिका के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

मूल सिद्धांत और उद्देश्य:

  1. जन-केंद्रित दृष्टिकोण (People-Centered Focus): ध्यान संग्रहीत वस्तुओं से हटकर उन लोगों और समुदायों पर केंद्रित हो जाता है जिनकी सेवा संग्रहालय करते हैं,। वस्तुओं को संवाद, सामाजिक कार्रवाई और विकास के उपकरण के रूप में देखा जाता है,।
  2. लोकतंत्रकरण और भागीदारी (Democratization and Participation): यह संग्रहालय प्रथाओं को अधिक सुलभ, समावेशी, और लोकतांत्रिक बनाने की वकालत करता है,।
  3. साझा अधिकार (Shared Authority): यह इस धारणा को चुनौती देता है कि वस्तुओं की व्याख्या कौन कर सकता है और किसकी कहानी बताई जाती है। यह सामुदायिक सदस्यों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करके सह-क्यूरेशन (co-curation) और साझा अधिकार की वकालत करता है, जहाँ संग्रहालय कर्मचारी सुविधा प्रदान करने वाले (facilitators) के रूप में कार्य करते हैं,।
  4. सामाजिक जिम्मेदारी: संग्रहालय को समाज के विकास के लिए एक सक्रिय संस्था के रूप में देखा जाता है। इसे विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देना चाहिए, और सामाजिक न्याय जैसे समकालीन विवादास्पद विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच बनना चाहिए,।
  5. गतिशील सांस्कृतिक केंद्र: यह संग्रहालय की अवधारणा को संग्रह के भंडार (repository of collections) के रूप में बदलने की कोशिश करता है, और इसे “गतिशील सांस्कृतिक केंद्र” के रूप में पुनः परिभाषित करता है,।
  6. अमूर्त विरासत (Intangible Heritage): यह विरासत की अवधारणा का विस्तार करता है जिसमें भौतिक और अमूर्त विरासत (परंपराएँ, अनुष्ठान, कौशल) दोनों शामिल हैं,।
  7. संपर्क क्षेत्र (Contact Zone): जेम्स क्लिफर्ड के मॉडल के अनुसार, संग्रहालय को “संपर्क क्षेत्र” (contact zone) के रूप में कार्य करना चाहिए—एक ऐसा स्थान जहाँ चर्चा, बातचीत और संवाद के लिए विभिन्न संस्कृतियाँ मिलती हैं,।

नए मॉडल: नया संग्रहालय विज्ञान आंदोलन कई नए संग्रहालय मॉडल के उदय का कारण बना, जिनमें इकोम्यूजियम (Ecomuseum), सामुदायिक संग्रहालय (Community Museum), और इंटीग्रल म्यूजियम (Integral Museum) शामिल हैं। इकोम्यूजियम स्थानीय आबादी की भागीदारी के साथ एक विशिष्ट क्षेत्र या समुदाय की समग्र विरासत पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

ICOM की परिभाषा में प्रभाव: ICOM (संग्रहालयों की अंतर्राष्ट्रीय परिषद) की 2022 की परिभाषा नए संग्रहालय विज्ञान के सिद्धांतों को दर्शाती है, जो नैतिक रूप से संचालित होने, समुदायों की भागीदारी, स्थिरता और समावेशिता पर जोर देती है,।

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