कक्षा 9 हिंदी पाठ 5: ‘आखिरी चट्टान तक’ – लेखक: मोहन राकेश

कक्षा 9 हिंदी पाठ 5: आखिरी चट्टान तक (प्रश्न-उत्तर)

भाग 1: बहुविकल्पी प्रश्न (मेरे उत्तर मेरे तर्क)

प्रश्न 1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पश्चिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से

  • उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
  • तर्क: लेखक सैंड हिल पर केवल कुछ देर रुके थे, लेकिन पश्चिमी क्षितिज और अरब सागर की ओर का पूरा विस्तार देखने के लिए वे आगे बने ऊँचे टीलों पर चले गए और वहाँ से सूर्यास्त देखा।

प्रश्न 2. “मैं कुछ देर भूल रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मृत हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना

  • उत्तर: (ख) विस्मृत हो जाना
  • तर्क: लेखक तीनों समुद्रों के संगम और विशाल जलराशि के असीम सौंदर्य में इतने लीन हो गए थे कि वे अपने स्वयं के अस्तित्व और एक यात्री होने का भाव भी भूल गए थे।

प्रश्न 3. “मैंने, सिर्फ़ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि

  • उत्तर: (घ) संतुष्टि
  • तर्क: लेखक थकान के बावजूद एक के बाद एक कई टीलों को पार करते रहे। जब अंततः वे सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचे और खुला विस्तार दिखा, तो उन्हें अपने प्रयास के सफल होने पर गहरी आत्म-संतुष्टि मिली।

प्रश्न 4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पश्चिमी क्षितिज का

  • उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का
  • तर्क: तीनों दिशाओं से क्षितिज तक फैले असीम पानी और हिंद महासागर के अपार विस्तार को देखकर लेखक ने यह अनुभव किया था।

प्रश्न 5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

  • उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
  • तर्क: यात्रा-वृत्तांत में केवल प्राकृतिक सौंदर्य का भौगोलिक वर्णन ही नहीं है, बल्कि लेखक के मन में उठने वाले विस्मय, शांति और आत्मानुभूति के जीवंत भाव भी जुड़े हैं।

भाग 2: लघूत्तरीय एवं बोधात्मक प्रश्न (मेरी समझ मेरे विचार)

प्रश्न 1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
उत्तर: लेखक जब सैंड हिल पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहाँ से सामने का दृश्य तो दिख रहा था, लेकिन अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो सूर्यास्त के पूरे विस्तार को ओट (ओझल) में लिए हुए था। सूर्यास्त को पूरे क्षितिज की पृष्ठभूमि में स्पष्ट रूप से देखने के लिए लेखक सैंड हिल से आगे बढ़कर अन्य ऊँचे टीलों की ओर जाने लगे।


प्रश्न 2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय जन-जीवन और बेकारी के विषय में निम्नलिखित बातें बताईं:

  1. कन्याकुमारी की लगभग 8,000 की आबादी में लगभग 400-500 शिक्षित नवयुवक बेरोजगार हैं, जिनमें से लगभग 100 स्नातक (ग्रेजुएट) हैं।
  2. उनका मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और आपस में बहस करना है।
  3. जीविका चलाने के लिए वे सीपियों का गूदा खाने तथा फोटो-एल्बम, शंख व मालाएँ बेचने जैसे छोटे-मोटे काम करते हैं।
  4. मल्लाह पर्यटकों को नावों द्वारा समुद्र के बीच विवेकानंद चट्टान तक ले जाने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से अभिप्राय लेखक के उस सफल प्रयास से है, जिसमें शारीरिक थकान के बावजूद वे एक के बाद एक कई टीलों को पार करते रहे ताकि उन्हें सूर्यास्त का खुला दृश्य मिल सके। जब अंततः एक ऊँचे टीले पर पहुँचकर सामने समुद्र और पश्चिमी क्षितिज का विशाल ढलान दिखाई दिया, तो उनका परिश्रम सार्थक हो गया।


प्रश्न 4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
उत्तर: लेखक के लिए निम्नलिखित अनुभव और दृश्य बिल्कुल नए थे:

  1. तीन समुद्रों का संगम: अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का संगम और लहरों के चट्टानों से टकराकर चूर-बूँदों की जाली बन जाना।
  2. रंग-बिरंगी रेत: समुद्र तट पर अनगिनत अनाम रंगों (जैसे सुरमई, खाकी, पीली, लाल, काली घटा व लाल आँधी के सम्मिश्रण) वाली रेत का फैलाव।
  3. सूर्यास्त के बदलते रंग: सूर्य डूबते समय पानी का रंग सोने जैसा चमकने से लेकर लहू की तरह लाल, फिर बैंगनी और अंत में काला पड़ जाना।

प्रश्न 5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
उत्तर: लेखक की मानसिक दृढ़ता दर्शाने वाले दो अंश:

  1. टीलों को पार करना: सैंड हिल से आगे बढ़ते समय लेखक की टाँगें थक रही थीं, लेकिन मन हार मानने को तैयार नहीं था। वे लगातार टीले पार करते गए जब तक कि उन्हें खुला क्षितिज नहीं दिख गया।
  2. समुद्र तट की लहरों से बचाव: लौटते समय जब समुद्र का पानी बढ़ गया और किनारे का रास्ता बंद होने लगा, तो चोट लगने के बाद भी लेखक घबराए नहीं, बल्कि धैर्य और सूझ-बूझ से सुरक्षित चट्टान पर चढ़कर बाहर निकल आए।

भाग 3: व्याकरण और भाषा अध्ययन

(क) क्रिया-विशेषण की पहचान

नीचे दिए गए वाक्यों में क्रिया-विशेषण पद और उनकी क्रियाएँ इस प्रकार हैं:

  1. वाक्य: बलखाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
    • क्रिया-विशेषण: कटती हुई
    • क्रिया: आती थीं
  2. वाक्य: यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
    • क्रिया-विशेषण: उस दिशा में (स्थानवाचक)
    • क्रिया: जा रही थीं
  3. वाक्य: मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।
    • क्रिया-विशेषण: देर तक (कालवाचक)
    • क्रिया: देखता रहा

(ख) शब्द-प्रयोग एवं नए वाक्य निर्माण

पाठ में आए प्रमुख शब्दों के अर्थ और उनके नए वाक्य:

  1. क्षितिज: वह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए प्रतीत होते हैं।
    • वाक्य: शाम के समय क्षितिज पर ढलते सूरज की लालिमा बहुत सुंदर लगती है।
  2. झुरमुट: पास-पास उगे पेड़ या झाड़ियों का समूह।
    • वाक्य: चिड़ियाँ शाम होते ही बरगद के झुरमुट में चहचहाने लगती हैं।
  3. ढलान: ढालू स्थान या रास्ता।
    • वाक्य: पहाड़ी ढलान पर सावधानी से चलना चाहिए।
  4. शृंखला: कतार या पंक्ति।
    • वाक्य: भारत के उत्तर में हिमालय पर्वतों की एक विशाल शृंखला है।
  5. वीरान: सूनसान या उजाड़ स्थान।
    • वाक्य: रात होते ही वह पुराना रास्ता बिल्कुल वीरान हो जाता है।
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