कक्षा 9 हिंदी पाठ 7 मैं और मेरा देश लेखक: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
1. मेरे उत्तर मेरे तर्क (वस्तुनिष्ठ एवं तर्क-आधारित प्रश्न)
प्रश्न 1: “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
- (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
- (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
- (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
- (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार तर्क: लेखक स्वयं को अपने घर, पड़ोस और नगर की सीमाओं में पूर्ण और संतुष्ट महसूस कर रहा था, परंतु देश की पराधीनता और हीन स्थिति का बोध होते ही उसकी व्यक्तिगत पूर्णता का भ्रम टूट गया।
प्रश्न 2: निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
- (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
- (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
- (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
- (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का तर्क: लेखक के अनुसार ऐसे प्रश्न विषय को स्पष्ट करने, विचारों को आगे बढ़ाने और चिंतन को नया मोड़ देने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रश्न 3: “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—
- (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
- (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
- (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
- (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। तर्क: गुलामी के दिनों में भारतवासियों को विदेशों में और अपने ही देश में अपमानित होना पड़ता था और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती थी।
प्रश्न 4: निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—
- (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
- (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
- (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
- (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। तर्क: यदि व्यक्ति का देश पराधीन या हीन स्थिति में है, तो संसार की सभी व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ और उपहार भी उसे सच्चा गौरव प्रदान नहीं कर सकते।
प्रश्न 5: “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?
- (क) देश और नागरिक
- (ख) देश और संविधान
- (ग) देश और विदेश
- (घ) व्यवसाय और आजीविका
उत्तर: (क) देश और नागरिक तर्क: लेखक ने जापानी युवकों के उदाहरण से यह दर्शाया है कि नागरिक का हर आचरण और व्यवहार सीधे तौर पर देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है।
प्रश्न 6: प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
- (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
- (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
- (ग) व्यक्ति और देश का अंतरसंबंध
- (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतरसंबंध तर्क: संपूर्ण निबंध इस विचार पर केंद्रित है कि नागरिक और उसका देश एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं तथा एक का आचरण दूसरे के गौरव या हीनता का कारण बनता है।
2. मेरी समझ मेरे विचार (विषय-बोध संबंधी प्रश्न)
प्रश्न 1: स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए? उत्तर: जब स्वामी रामतीर्थ ने जापानी युवक से फलों के दाम पूछकर मूल्य चुकाना चाहा, तो युवक ने पैसे लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि यदि आप इसका मूल्य देना ही चाहते हैं तो अपने देश जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। उस युवक की इस असीम देश-भक्ति और देश के गौरव की रक्षा करने की भावना को देखकर स्वामी जी मुग्ध हो गए।
प्रश्न 2: जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए। उत्तर: जापानी युवक ने फलों के मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश लौटकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। व्यक्तित्व की छवि: इससे उस युवक के एक सच्चे देशप्रेमी, स्वार्थरहित, स्वाभिमानी तथा अपने राष्ट्र के मान-सम्मान के प्रति अत्यंत सजग नागरिक होने की छवि उभरती है।
प्रश्न 3: “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। उत्तर: स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे निम्नलिखित तर्क हैं:
- अविभाज्य संबंध: नागरिक का प्रत्येक व्यक्तिगत कार्य देश की साख को प्रभावित करता है।
- प्रतिष्ठा एवं कलंक का साझा होना: जब एक विदेशी छात्र ने जापान के पुस्तकालय से दुर्लभ चित्र चुराए, तो उसे तो निकाला ही गया, साथ ही पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया कि उस देश के किसी भी निवासी का प्रवेश वर्जित है। इसके विपरीत, दूसरे जापानी युवक ने स्वामी जी को फल देकर अपने देश का गौरव बढ़ा दिया। अतः नागरिक की श्रेष्ठता या नीचता का सीधा असर उसके देश की पहचान पर पड़ता है।
3. मेरे अनुभव मेरे विचार (व्यावहारिक एवं अनुभूत्यात्मक प्रश्न)
प्रश्न 1: “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति और राष्ट्र का गौरव या अपमान आपस में जुड़ा हुआ है।
- गौरव का उदाहरण: जब भारत का कोई वैज्ञानिक, खिलाड़ी या छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई पुरस्कार या पदक जीतता है, तो केवल उसकी व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं होती, बल्कि पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊँचा होता है।
- हीनता का उदाहरण: इसके विपरीत, यदि कोई नागरिक विदेश में या सार्वजनिक स्थल पर नियमों का उल्लंघन करता है, गंदगी फैलाता है या अनैतिक कार्य करता है, तो पूरे देश की छवि धूमिल होती है।
प्रश्न 2: “मुझे बहुतों की अपने लिए ज़रूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की ज़रूरत का उनके लिए जवाब था।”
(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रिकाल तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए। उत्तर:
- दूसरों से मिलने वाला सहयोग: सुबह दूध वाले से दूध, सफाई कर्मचारी से स्वच्छता, शिक्षकों से मार्गदर्शन, वाहन चालकों से यात्रा सुविधा और दुकानदारों से दैनिक सामग्री प्राप्त करते हैं।
- दूसरों को दिया जाने वाला सहयोग: हम अपने सहपाठियों की पढ़ाई में मदद करते हैं, परिवार के कार्यों में सहयोग देते हैं और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन व सफाई बनाए रखते हैं।
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए। उत्तर: ‘बहुतों’ शब्द में हमारे परिवार के सदस्य, पड़ोसी, मित्र, शिक्षक, किसान, श्रमिक, डॉक्टर, सफाईकर्मी, दुकानदार और वे सभी नागरिक शामिल हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समाज का संचालन करते हैं।
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा? उत्तर:
- रचनाकार की आवश्यकताएँ: भोजन, वस्त्र, आवास, समाज का संचित ज्ञान-भंडार और सुरक्षा।
- रचनाकार का सहयोग: अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं, विचारों, देशभक्तिपूर्ण लेखन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को दिशा देना।
प्रश्न 3: “सुनो नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”
(क) देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? उत्तर: देश के विकास और सुरक्षा के लिए केवल सीमा पर सैनिक की भाँति लड़ना ही एकमात्र कार्य नहीं है। हमारे निम्नलिखित दायित्व हैं:
- अपने-अपने क्षेत्र में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करना (जैसे किसान द्वारा अन्न उपजाना, छात्र द्वारा अध्ययन करना)।
- देश में शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को बढ़ावा देना।
- देश के सम्मान और स्वच्छता को नुकसान न पहुँचाना।
- चुनाव प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवार को अपना वोट देना।
प्रश्न 4: “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
(क) पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे? उत्तर: पास-पड़ोस के लोगों में आत्मीयता, भाईचारा, एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सुख-दुख में सहभागिता और अपनत्व का गहरा भाव रहा होगा।
(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इसके क्या कारण हो सकते हैं? उत्तर: वर्तमान समय में पास-पड़ोस के संबंधों में औपचारिकता और दूरी आ गई है; लोग अब एक-दूसरे से कम मिलते-जुलते हैं। कारण: तीव्र शहरीकरण, एकाकी परिवारों की संख्या बढ़ना, अत्यधिक व्यस्त दिनचर्या, तथा डिजिटल उपकरणों/सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव इसके प्रमुख कारण हैं।
प्रश्न 5: “क्या कुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए आप क्या करते हैं? उत्तर: सार्वजनिक स्थलों (जैसे बस स्टैंड, पार्क, विद्यालय, ऐतिहासिक स्मारक) की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित प्रयास किए जा सकते हैं:
- कचरा हमेशा कूड़ेदान में ही फेंकना और छिलके आदि रास्ते में न फेंकना।
- सार्वजनिक परिसरों या दीवारों पर पीक न थूकना और न ही नाम लिखकर गंदा करना।
- स्वच्छता अभियानों में सक्रिय योगदान देना।
प्रश्न 6: “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान की रक्षा हेतु क्या करें और क्या न करें? उत्तर:
- क्या करें: अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें, देश के शक्ति-बोध व सौंदर्य-बोध को बढ़ाएं, और निष्पक्ष होकर सही उम्मीदवार को वोट दें।
- क्या न करें: सार्वजनिक या विदेश भ्रमण के दौरान देश की कमियों का सार्वजनिक रूप से मज़ाक न उड़ाएं, कुरुचिपूर्ण आचरण व गंदगी न फैलाएं, और कोई ऐसा अनैतिक कार्य न करें जिससे देश की छवि पर कलंक लगे।
4. मेरे प्रश्न
(क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है? उत्तर: रचनाकार को उन प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो बात को विस्तार देने और विचार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है? उत्तर: हमें पहेलियों, तार्किक प्रश्नों और वैचारिक गहराई वाले प्रश्नों को बूझना एवं हल करना रोचक लगता है।
5. व्याकरण की बात (उपसर्ग, मूल शब्द एवं प्रत्यय)
निबंध में प्रयुक्त ‘अपूर्णता’ शब्द का उपसर्ग और प्रत्यय विश्लेषण: अ (उपसर्ग) + पूर्ण (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय) = अपूर्णता
इसी आधार पर अन्य शब्दों का उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय विभाजन:
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| अलौकिक | अ | लोक | इक |
| निरक्षरता | निर | अक्षर | ता |
| सम्मानित | सम् | मान | इत |
| अनावश्यक | अन | आवश्यक | – |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| अभिमानी | अभि | मान | ई |