भारत में आर्थिक नियोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, नीति आयोग तक
भारत में आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया स्वतंत्रता के तुरंत बाद शुरू हुई, जिसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को आर्थिक पिछड़ापन और गरीबी की स्थिति से बाहर निकालना था।
1. नियोजन की प्रारंभिक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय नियोजन समिति (National Planning Committee): 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा एक राष्ट्रीय नियोजन समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति ने सुझाव दिया कि कृषि से लेकर छोटे उद्योगों तक के क्षेत्रों में सहकारी खेती (Cooperative Farming) और प्रगतिशील कर (Progressive Tax) जैसी नीतियों पर ध्यान केंद्रित करके समाजवाद और आर्थिक विकास के लक्ष्यों को पूरा किया जाए।
- अन्य योजनाएं: नियोजन के संदर्भ में बॉम्बे प्लान (Bombay Plan) और गांधीवादी योजना (Gandhian Plan) जैसे अन्य विचार भी मौजूद थे।
2. योजना आयोग की स्थापना
- भारत में औपचारिक आर्थिक नियोजन की शुरुआत 15 मार्च 1950 को योजना आयोग की स्थापना के साथ हुई।
- योजना आयोग का उद्देश्य देश के भौतिक संसाधनों (Physical Resources) और मानवीय संसाधनों (Human Resources) का कुशलतापूर्वक उपयोग करके आर्थिक संवृद्धि और विकास के लक्ष्य प्राप्त करना था।
3. पंचवर्षीय योजनाओं का युग (1951-1997)
योजना आयोग ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास की रणनीति अपनाई।
| योजना का नाम | अवधि (लगभग) | मुख्य विशेषताएं/रणनीतियाँ |
|---|---|---|
| प्रथम पंचवर्षीय योजना | 1950-51 से 1955-56 | यह योजना 1951 में शुरू हुई। इसमें कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया। |
| द्वितीय पंचवर्षीय योजना | 1956-57 से 1960-61 | इस योजना के दौरान ‘समाजवादी समाज का स्वरूप’ (Socialistic pattern of society) स्थापित करने का संकल्प लिया गया। मुख्य बल तीव्र औद्योगीकरण (Rapid Industrialisation) तथा बुनियादी और भारी उद्योगों (Basic and Heavy Industries) के विकास पर था। |
| तृतीय पंचवर्षीय योजना | 1961-62 से 1965-66 | |
| वार्षिक योजनाएं | 1966-67 से 1968-69 | |
| चतुर्थ पंचवर्षीय योजना | 1969-70 से 1973-74 | इसका मुख्य आधार ‘स्थिरता के साथ वृद्धि और आत्मनिर्भरता’ (Growth with Stability and Self-Reliance) था। |
| पाँचवीं पंचवर्षीय योजना | 1974-75 से 1978-79 | इस योजना के उद्देश्यों में गरीबी हटाओ (Removal of Poverty) और आत्मनिर्भरता (Self-reliance) प्राप्त करना शामिल था। |
| छठी पंचवर्षीय योजना | 1980-81 से 1984-85 | |
| सातवीं पंचवर्षीय योजना | 1985-86 से 1989-90 | इस योजना का लक्ष्य उत्पादक रोज़गार (Productive employment) और क्षेत्रीय संतुलन (Regional balance) को बढ़ावा देना था। |
| वार्षिक योजनाएं | 1990-91 और 1991-92 | इस अवधि में राजनीतिक अस्थिरता के कारण पंचवर्षीय योजना लागू नहीं हो सकी। |
| आठवीं पंचवर्षीय योजना | 1992-93 से 1996-97 | इस योजना में मानव विकास (Human Development) को विकास के केंद्र के रूप में रखा गया था। इसके उद्देश्यों में 15 से 35 वर्ष के आयु वर्ग में पूर्ण रोज़गार और प्राथमिक शिक्षा को सार्वभौमिक बनाना शामिल था। |
4. आर्थिक सुधार और नियोजन का बदलता स्वरूप (नीति आयोग की ओर)
- 1991 के सुधारों का प्रभाव: 1991 में नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy) लागू की गई। इस नीति ने आर्थिक नियोजन के केंद्रीकृत स्वरूप को बदलकर उदारीकरण और निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।
- सार्वजनिक क्षेत्र का बदलता स्वरूप: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की दक्षता में सुधार लाने और विनिवेश (Disinvestment) को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस की गई, खासकर 1991 के बाद।
- योजनाओं की निरंतरता: 1997-98 के दौरान, योजना आयोग द्वारा बारहवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) के लिए एक दृष्टिकोण पत्र (Approach Paper) तैयार किया गया, जिसमें विकास की रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया गया।
(नोट: उपलब्ध स्रोत 1998 के आसपास प्रकाशित हैं, इसलिए इनमें सीधे तौर पर नीति आयोग (जो 2015 में स्थापित हुआ) का विवरण शामिल नहीं है, लेकिन वे नियोजन के उस चरण का विस्तृत विवरण देते हैं जो योजना आयोग के अंतिम वर्षों में चल रहा था।)