भारत में आर्थिक नियोजन Economic Planning
भारत में आर्थिक नियोजन (Economic Planning) के लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं थे, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित एक प्रगतिशील समाज की स्थापना करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य था।
1. नियोजन के सामान्य (दीर्घकालिक) उद्देश्य
भारतीय नियोजन के दीर्घकालिक उद्देश्यों में वे मूलभूत लक्ष्य शामिल हैं, जिन्हें पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से लगातार प्राप्त करने का प्रयास किया गया:
- अधिकतम संभव आर्थिक संवृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि (Maximum Economic Growth and Increase in Per Capita Income): नियोजन का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय आय में संवृद्धि प्राप्त करना रहा है। अधिकतम संवृद्धि का अर्थ है राष्ट्रीय उत्पादन (National Output) और प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) की दर को बढ़ाना।
- पूर्ण रोज़गार प्राप्त करना (Achieving Full Employment): भारतीय नियोजन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य उत्पादक रोज़गार (Productive employment) के अवसरों को बढ़ाना और पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त करना रहा है। सातवीं पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य उत्पादक रोज़गार को बढ़ावा देना था।
- आय और संपत्ति की असमानता को कम करना (Reducing Inequality of Income and Wealth): नियोजन का उद्देश्य आय की असमानताओं को कम करके और संपत्ति का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करके सामाजिक न्याय (Social Justice) प्राप्त करना रहा है।
- सामाजिक न्याय उपलब्ध कराना (Providing Social Justice): यह उद्देश्य संविधान के निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of the Constitution) के अनुरूप है। इसका अर्थ है कि विकास का लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचे।
- लोकतंत्रात्मक समाजवाद का विकास (Development of Democratic Socialism): नियोजन की पूरी प्रक्रिया (विशेषकर 1991 से पहले) इस विचार पर केंद्रित थी कि भारत में एक ऐसे समाजवादी समाज का स्वरूप (Socialistic pattern of society) स्थापित किया जाए जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित हो।
2. नियोजन के विशिष्ट एवं रणनीतिक उद्देश्य
पंचवर्षीय योजनाओं के तहत समय-समय पर विशिष्ट रणनीतिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- आत्मनिर्भरता (Self-Reliance): देश की अर्थव्यवस्था को विदेशी सहायता (Foreign aid) और आयात पर निर्भरता से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया। चौथी पंचवर्षीय योजना का मूल आधार ‘स्थिरता के साथ वृद्धि और आत्मनिर्भरता’ (Growth with Stability and Self-Reliance) था। पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के उद्देश्यों में भी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना शामिल था।
- गरीबी उन्मूलन (Removal of Poverty): गरीबी की समस्या को जड़ से खत्म करना नियोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा। पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) के उद्देश्यों में ‘गरीबी हटाओ’ (Removal of Poverty) को प्रमुखता दी गई।
- औद्योगीकरण पर बल (Emphasis on Industrialization): विशेष रूप से दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) में तीव्र औद्योगीकरण तथा देश के लिए बुनियादी और भारी उद्योगों (Basic and Heavy Industries) के विकास पर विशेष बल दिया गया।
- कृषि का विकास (Agricultural Development): पहली पंचवर्षीय योजना (1950-51 से 1955-56) में कृषि को उच्च प्राथमिकता दी गई। कृषि उत्पादन में संवृद्धि दर नियोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रही है।
- मानव विकास (Human Development): आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) ने मानव विकास को विकास की धुरी (Axis) के रूप में स्वीकार किया।
- क्षेत्रीय संतुलन (Regional Balance): नियोजन का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों (राज्यों) के बीच आर्थिक विकास दर में असमानता को कम करना और संतुलित विकास (Balanced development) को बढ़ावा देना था।
- कीमतों में स्थिरता (Price Stability): योजनाओं के दौरान कीमतों में स्थिरता बनाए रखना (यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखना) भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है, खासकर जब मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियाँ (Inflationary tendencies) बढ़ी हों।
- बुनियादी ढाँचे का विकास (Development of Infrastructure): आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे (सड़क, रेल, बिजली, सिंचाई, आदि) का निर्माण करना नियोजन का एक अनिवार्य उद्देश्य था।