वर्ष 1991 की नई आर्थिक नीति (New Economic Policy, 1991) में भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक बाजारोन्मुख और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार किए गए। इस नीति को अक्सर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (Liberalisation, Privatisation, and Globalisation—LPG) की नीति के रूप में जाना जाता है।
स्रोतों में दी गई नई आर्थिक नीति 1991 की प्रमुख विशेषताएँ और घटक निम्नलिखित हैं:
1. औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति में परिवर्तन (Changes in Industrial Licensing Policy)
- उद्योगों को लाइसेंस लेने की बाध्यता को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया।
- इस नीति के तहत, केवल कुछ विशिष्ट उद्योगों को छोड़कर (जो सुरक्षा, सामाजिक कारण, खतरनाक रसायन, या पर्यावरण संबंधी चिंताओं से संबंधित थे), औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त कर दिया गया।
- औद्योगिक लाइसेंसिंग के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या 18 थी, जिसे बाद में कम कर दिया गया।
2. विदेशी निवेश नीति में बदलाव (Foreign Investment Policy)
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए, उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगों की सूची में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 51 प्रतिशत इक्विटी तक के लिए स्वतः (Automatic) अनुमोदन की अनुमति दी गई।
- विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों में 51% तक की हिस्सेदारी के साथ निवेश करने की अनुमति प्रदान की गई।
- यह प्रावधान किया गया कि विदेशी पूँजी भारतीय उपक्रमों में प्रवेश कर सके।
3. विदेशी प्रौद्योगिकी नीति (Foreign Technology Policy)
- विदेशी तकनीकी सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को आसान बनाने के लिए, विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए स्वतः (Automatic) अनुमोदन प्रदान किया गया।
- विदेशी तकनीकी हस्तांतरण के संबंध में रॉयल्टी भुगतान (Royalty payments) की सीमा को घरेलू बिक्री पर 5 प्रतिशत और निर्यात पर 8 प्रतिशत तक निर्धारित किया गया।
4. सार्वजनिक क्षेत्र की नीति में सुधार (Reforms in Public Sector Policy)
- सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की सूची को कम किया गया।
- बीमार सार्वजनिक उपक्रमों (Sick Public Sector Undertakings) को औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड (Board of Industrial and Financial Reconstruction – BIFR) को संदर्भित करने का प्रावधान किया गया, ताकि उनके पुनर्गठन या समापन की सिफारिश की जा सके।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कुछ शेयरों को विनिवेश (Disinvestment) के माध्यम से निजी क्षेत्र को बेचा जाने लगा।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अधिक स्वायत्तता (greater autonomy) देने और दक्षता (Efficiency) सुधारने के लिए समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) व्यवस्था को लागू किया गया।
5. एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP Act) में सुधार
- MRTP अधिनियम के तहत परिसंपत्ति सीमा (Asset limit) को समाप्त कर दिया गया।
- नीति का ध्यान अब एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहारों (Monopolistic and Restrictive Trade Practices) पर नियंत्रण रखने पर केंद्रित हो गया।
6. व्यापार नीति में सुधार (Trade Policy Reforms)
- निर्यात को प्रोत्साहित करने और आयात को उदार बनाने के लिए कई कदम उठाए गए।
- शुल्क ढांचे (Tariff structure) में भी बदलाव किए गए।
इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकृत और भूमंडलीकृत बाजार अर्थव्यवस्था में बदलना था।