वर्ष 1991 की नई आर्थिक नीति (New Economic Policy, 1991) 24 जुलाई 1991 को घोषित की गई थी। यह नीति नरसिम्हा राव सरकार की सिफारिशों के बाद लागू की गई थी।
प्रस्तुत स्रोतों के अनुसार, नई आर्थिक नीति 1991 के प्रमुख उद्देश्य और लक्ष्य निम्नलिखित थे:
मुख्य और संरचनात्मक उद्देश्य:
- भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करना।
- संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना।
- आर्थिक स्थिरीकरण कार्यक्रम और संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम के माध्यम से देश के भुगतान शेष के संकट (Balance of Payments crisis) और राजकोषीय असंतुलन (Fiscal imbalances) के कारण उत्पन्न हुई गंभीर आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना।
- भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकृत (liberalized) और भूमंडलीकृत (globalized) बाजार अर्थव्यवस्था (market economy) में बदलना।
तत्काल और विशिष्ट लक्ष्य:
- विदेशी मुद्रा की आपूर्ति को सुनिश्चित करना।
- मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करना।
- त्वरित और निरंतर आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।
- सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार की भूमिका को कम करना और लाइसेंस कानूनों में ढील देना।
यह नीति कई पहलुओं को शामिल करते हुए लाई गई थी, जिनमें औद्योगिक लाइसेंस प्रणाली, विदेशी निवेश, विदेशी तकनीक, सार्वजनिक क्षेत्र की नीति, और एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP Act) से संबंधित प्रावधान शामिल थे।