कक्षा 10 हिंदी मीरा

कक्षा 10 हिंदी मीरा


✦ मीरा – संक्षिप्त परिचय

  • मीरा (1503-1546) मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री थीं।
  • उनका जीवन कष्टों से भरा रहा, किंतु उन्होंने कृष्ण को अपना सर्वस्व मान लिया।
  • उनके पदों में भक्ति, प्रेम, समर्पण और कृष्ण के प्रति एकनिष्ठता झलकती है।
  • भाषा में राजस्थानी, ब्रज, गुजराती आदि का मिश्रण मिलता है।

पद 1

मूल पद
जन री भीर।
हरि आप हरो द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।।


शब्दार्थ

  • जन री भीर – लोगों की भीड़, संकट
  • हरो – दूर करो
  • द्रोपदी री लाज – द्रौपदी की इज्जत
  • चीर – वस्त्र
  • भगत कारण – भक्त के कारण
  • नरहरि – नरसिंह भगवान
  • सरीर – शरीर
  • गजराज – हाथियों का राजा, गज
  • कुण्जर – हाथी
  • पीर – कष्ट
  • दासी – सेविका
  • म्हारी – मेरी
  • भीर – विपत्ति, संकट

पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ

  1. जन री भीर।
    हे प्रभु! जनसमूह जैसी विपत्तियाँ मुझ पर आ गई हैं।
  2. हरि आप हरो द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
    हे हरि! आपने स्वयं द्रौपदी की लाज बचाई और उसका चीर (वस्त्र) बढ़ाया।
  3. भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
    भक्त की रक्षा के लिए आपने नरसिंह का रूप धारण करके शरीर प्रकट किया।
  4. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
    आपने डूबते गजराज (हाथी) की रक्षा की और उसके कष्ट दूर किए।
  5. दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।।
    हे गिरधर लाल! मैं आपकी दासी मीरा प्रार्थना करती हूँ, मेरे संकट दूर करो।

पद 2

मूल पद
स्याम म्हाने चाकर राखो जी, गिरधारी, लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ ।।


शब्दार्थ

  • स्याम – श्रीकृष्ण
  • चाकर – सेवक/दास
  • दरसण – दर्शन
  • पास्यूँ – प्राप्त करूँ
  • कुंज गली – बाग-बगीचे की गलियाँ
  • सुमरण – स्मरण
  • खरची – कमाई
  • जागीरी – स्थायी सम्पत्ति
  • सरसी – उत्तम
  • मोर मुकुट – मोर पंखों का मुकुट
  • पीताम्बर – पीला वस्त्र
  • वैजन्ती माला – फूलों की माला
  • धेनु – गाय
  • मुरली – बांसुरी
  • बारी – बगिया
  • कुसुम्बी साड़ी – गेरुए रंग की साड़ी
  • हिवड़ो – हृदय
  • अधीराँ – बेचैन

पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ

  1. स्याम म्हाने चाकर राखो जी, गिरधारी, लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
    हे स्याम (कृष्ण), हे गिरधारी लाल! मुझे अपना सेवक बना लो।
  2. चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
    सेवक बनकर मैं बाग लगाऊँ और प्रतिदिन आपके दर्शन प्राप्त करूँ।
  3. बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
    वृंदावन की कुंज गलियों में आपकी लीला गाते हुए रहूँ।
  4. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
    सेवा में रहते हुए दर्शन और स्मरण को ही अपनी कमाई समझूँ।
  5. भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
    भक्ति, भाव और सेवा को अपनी स्थायी जागीर (धन) मानूँ, यही तीनों मेरे लिए उत्तम हैं।
  6. मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
    हे प्रभु! आपके सिर पर मोर मुकुट, पीताम्बर और गले में वैजन्ती माला बहुत सुंदर लगती है।
  7. बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
    वृंदावन में आप गाय चराते हैं और मधुर मुरली बजाते हैं।
  8. ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
    मैं ऊँचे-ऊँचे महल बनाऊँ और बीच-बीच में बगिया (बाग) सजाऊँ।
  9. साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
    साँवरिया (श्याम) के दर्शन करते समय मैं कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनूँ।
  10. आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।
    हे प्रभु! आधी रात को यमुना के तट पर मुझे दर्शन दीजिए।
  11. मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ।।
    मीरा कहती हैं – मेरे प्रभु गिरधर नागर, मेरा हृदय आपके लिए बहुत अधीर है।

👉 इस तरह मीरा अपने पदों में कृष्ण से अपने गहरे प्रेम, समर्पण और सेवा भाव को व्यक्त करती हैं।


✦ सरल भावार्थ

पद – 1

मीरा कहती हैं –
हे प्रभु! जैसे आपने द्रौपदी की लाज बचाई थी, भक्त की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण किया था और डूबते गजराज (हाथी) की मदद की थी, वैसे ही मेरी भी कठिनाइयाँ दूर कीजिए। मैं आपकी दासी हूँ, मेरी विपत्ति हर लीजिए।

👉 सरल निष्कर्ष – भगवान हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। मीरा अपने संकट दूर करने के लिए कृष्ण से प्रार्थना कर रही हैं।


पद – 2

मीरा कहती हैं –
हे श्याम (कृष्ण)! मुझे अपना सेवक बना लो। मैं आपके बाग लगाऊँगी, हर दिन आपके दर्शन करूँगी और वृंदावन की गलियों में आपकी लीलाएँ गाऊँगी। आपके मोर मुकुट, पीताम्बर और मुरली का दर्शन करूँगी। मैं आपके लिए महल और बगीचे सजाऊँगी, रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर आपके दर्शन करूँगी। आधी रात को भी यमुना के तट पर आपके दर्शन की आकांक्षा रखती हूँ। मेरा मन आपके लिए बहुत अधीर है।

👉 सरल निष्कर्ष – मीरा अपने आराध्य कृष्ण को अपना स्वामी मानकर उनके सेवक बनने की इच्छा व्यक्त करती हैं। वे प्रेम, भक्ति और सेवा में ही अपना सुख देखती हैं।


📌 दोनों पदों से शिक्षा

  • भगवान सच्चे भक्त की रक्षा करते हैं।
  • सच्चा भक्त अपने प्रभु को अपना सब कुछ मानता है।
  • प्रेम, सेवा और भक्ति ही भक्ति-मार्ग का सार है।

  1. कठिन शब्दार्थ
  2. भावार्थ प्रश्न
  3. लघु प्रश्नोत्तर
  4. सारांश

✦ कठिन शब्दार्थ

(1) पद 1

  • भीर – विपत्ति, संकट
  • हरो – दूर करो
  • चीर – वस्त्र
  • नरहरि – नरसिंह भगवान
  • गजराज – हाथी
  • कुण्जर – हाथी
  • पीर – दुख, कष्ट

(2) पद 2

  • चाकर – सेवक
  • दरसण – दर्शन
  • कुंज गली – बगीचे की गली
  • जागीरी – स्थायी सम्पत्ति
  • मोर मुकुट – मोर पंखों का मुकुट
  • पीताम्बर – पीला वस्त्र
  • वैजन्ती माला – पुष्पमाला
  • कुसुम्बी साड़ी – गेरुए रंग की साड़ी
  • अधीराँ – बेचैन

✦ भावार्थ प्रश्न

प्रश्न 1. पहले पद में मीरा ने भगवान से कौन-कौन सी घटनाएँ याद दिलाई हैं?
उत्तर: मीरा ने भगवान से द्रौपदी की लाज बचाने, नरसिंह रूप धारण कर भक्त की रक्षा करने और डूबते गजराज (हाथी) को बचाने की घटनाएँ याद दिलाई हैं।

प्रश्न 2. मीरा ने भगवान से अपनी क्या प्रार्थना की है?
उत्तर: मीरा ने भगवान से अपनी कठिनाइयाँ और संकट दूर करने की प्रार्थना की है।

प्रश्न 3. दूसरे पद में मीरा ने सेवक बनकर क्या-क्या करने की इच्छा व्यक्त की है?
उत्तर: सेवक बनकर मीरा बाग लगाना, प्रभु के दर्शन करना, वृंदावन की गलियों में उनकी लीला गाना और सेवा-भक्ति में जीवन बिताना चाहती हैं।

प्रश्न 4. मीरा ने भगवान का कौन-सा रूप चित्रित किया है?
उत्तर: मोर मुकुट, पीताम्बर, वैजन्ती माला धारण करने वाले, गाय चराने वाले और मुरली बजाने वाले कृष्ण का रूप चित्रित किया है।


✦ लघु प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. मीरा किसकी भक्त थीं?
उत्तर: मीरा भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं।

प्रश्न 2. मीरा ने किस भाषा में पद लिखे?
उत्तर: मीरा के पदों में राजस्थानी, ब्रज, गुजराती आदि भाषाओं का मिश्रण है।

प्रश्न 3. मीरा किस संत की शिष्या थीं?
उत्तर: मीरा संत रैदास की शिष्या थीं।

प्रश्न 4. मीरा की भक्ति का मुख्य भाव कौन-सा था?
उत्तर: मीरा की भक्ति दैन्य (नम्रता) और माधुर्यभाव (प्रेमभाव) से पूर्ण थी।

प्रश्न 5. पहले पद की अंतिम पंक्ति में मीरा ने प्रभु से क्या निवेदन किया है?
उत्तर: “हरो म्हारी भीर” – हे गिरधर लाल! मेरी विपत्तियाँ दूर कीजिए।


✦ सारांश (Summary)

सारांश:
मीरा के इन पदों में भक्त और भगवान का गहरा संबंध दिखाई देता है। पहले पद में वे भगवान को उनकी महान लीलाएँ याद दिलाकर प्रार्थना करती हैं कि जैसे उन्होंने पहले भक्तों की रक्षा की, वैसे ही उनके संकट भी दूर करें। दूसरे पद में वे कृष्ण को अपना स्वामी मानकर सेवक बनने की इच्छा व्यक्त करती हैं। उनके अनुसार सच्चा सुख केवल भक्ति, प्रेम और सेवा में है। इन पदों से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान सच्चे भक्त की सदैव रक्षा करते हैं और भक्त को अपने जीवन में प्रभु-भक्ति ही सर्वोपरि माननी चाहिए।


✦ MCQs (बहुविकल्पीय प्रश्न)

पद 1 आधारित प्रश्न

Q1. ‘हरो म्हारी भीर’ में ‘भीर’ का अर्थ है –
(A) भीड़
(B) विपत्ति/संकट ✅
(C) शत्रु
(D) युद्ध

Q2. द्रौपदी की लाज किसने बचाई थी?
(A) अर्जुन ने
(B) कृष्ण ने ✅
(C) भीम ने
(D) भीष्म ने

Q3. ‘नरहरि’ शब्द से आशय है –
(A) राम अवतार
(B) नरसिंह अवतार ✅
(C) वामन अवतार
(D) परशुराम अवतार

Q4. गजराज की रक्षा कब हुई थी?
(A) युद्ध में
(B) डूबते समय ✅
(C) जंगल में
(D) बंदीगृह में

Q5. “दासी मीराँ लाल गिरधर” में मीरा ने स्वयं को क्या कहा है?
(A) सेविका ✅
(B) भक्त
(C) बहन
(D) मित्र


पद 2 आधारित प्रश्न

Q6. मीरा कृष्ण से क्या बनने की इच्छा व्यक्त करती हैं?
(A) माता
(B) बहन
(C) चाकर/सेविका ✅
(D) मित्र

Q7. “मोर मुगट पीताम्बर सौहे” पंक्ति में कृष्ण का कौन-सा रूप चित्रित है?
(A) गीता उपदेशक रूप
(B) मुरलीधारी गोपाल रूप ✅
(C) नरसिंह रूप
(D) विष्णु रूप

Q8. ‘जागीरी’ शब्द का अर्थ है –
(A) भूमि
(B) स्थायी सम्पत्ति ✅
(C) भवन
(D) शक्ति

Q9. मीरा ने अपने प्रभु से आधी रात को कहाँ दर्शन देने की प्रार्थना की?
(A) गोकुल के बाग में
(B) जमुनाजी के तट पर ✅
(C) महल में
(D) मथुरा नगर में

Q10. “भाव-भक्ति-जागीरी पास्यूँ” पंक्ति का अर्थ है –
(A) भाव और भक्ति धन से बढ़कर हैं ✅
(B) भक्ति से व्यापार करना
(C) भक्ति से कीर्ति पाना
(D) भक्ति से युद्ध करना


सामान्य प्रश्न

Q11. मीरा किस संत की शिष्या थीं?
(A) तुलसीदास
(B) कबीर
(C) रैदास ✅
(D) सूरदास

Q12. मीरा के पदों की भाषा है –
(A) केवल संस्कृत
(B) केवल ब्रज
(C) राजस्थानी, ब्रज और गुजराती मिश्रित ✅
(D) केवल खड़ी बोली

Q13. मीरा किस भाव की भक्त थीं?
(A) दास्य भाव
(B) माधुर्य भाव ✅
(C) शौर्य भाव
(D) करुणा भाव

Q14. मीरा का जन्म कहाँ हुआ था?
(A) कुड़की गाँव, जोधपुर ✅
(B) पाली गाँव, अजमेर
(C) बयाना, भरतपुर
(D) मेड़ता, नागौर

Q15. मीरा किस काल की प्रमुख कवयित्री हैं?
(A) आधुनिक काल
(B) आदिकाल
(C) मध्यकाल ✅
(D) प्राचीन काल


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