किशोरावस्था की ओर

यह अध्याय “किशोरावस्था की ओर” (Towards Adolescence) मानव शरीर में होने वाले परिवर्तनों, विशेष रूप से प्रजनन क्षमता प्राप्त करने की प्रक्रिया और हार्मोनल नियंत्रण पर केंद्रित है।

यहाँ अध्याय के महत्वपूर्ण नोट्स दिए गए हैं:

1. किशोरावस्था (Adolescence) और यौवनारंभ (Puberty)

  • वृद्धि: वृद्धि जन्म के समय से शुरू होती है, लेकिन 10 या 11 वर्ष की आयु के बाद इसमें अचानक तेजी आती है।
  • किशोरावस्था की परिभाषा: जीवनकाल की वह अवधि जब शरीर में परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता (reproductive maturity) आती है, किशोरावस्था कहलाती है।
  • अवधि: किशोरावस्था लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारंभ होकर 18 या 19 वर्ष की आयु तक रहती है।
  • टीनएजर्स: क्योंकि यह अवधि अंग्रेजी के “teens” (थर्टीन से नाइनटीन वर्ष की आयु) तक होती है, किशोरों को टीनएजर्स भी कहा जाता है।
  • लड़कियों में यह अवस्था लड़कों की अपेक्षा एक या दो वर्ष पूर्व शुरू हो जाती है।
  • यौवनारंभ: किशोरावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तन यौवनारंभ (Puberty) के संकेत हैं। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन जनन क्षमता का विकास है। जनन परिपक्वता के साथ ही यौवनारंभ समाप्त हो जाता है।

2. यौवनारंभ में होने वाले शारीरिक परिवर्तन

परिवर्तन (Changes)विवरण (Description)स्रोत (Source)
लंबाई में वृद्धियह सबसे अधिक दृष्टिगोचर परिवर्तन है। हाथ और पैरों की लंबी अस्थियों (हड्डियों) की लंबाई में वृद्धि होती है। लड़कियाँ शुरुआत में लड़कों की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़ती हैं। लगभग 18 वर्ष की आयु तक दोनों अपनी अधिकतम लंबाई प्राप्त कर लेते हैं। लंबाई माता-पिता से प्राप्त जीन पर निर्भर करती है।
शारीरिक आकृति में परिवर्तनलड़कों में कंधे और सीना चौड़े हो जाते हैं। लड़कियों में कमर का निचला भाग चौड़ा हो जाता है। लड़कों में शारीरिक मांसपेशियाँ लड़कियों की अपेक्षा सुस्पष्ट और गठी हुई दिखाई देती हैं।
स्वर में परिवर्तनयौवनारंभ में स्वरयंत्र (Larynx) में वृद्धि शुरू होती है। लड़कों का स्वरयंत्र विकसित होकर बड़ा हो जाता है, जो गले के सामने एक उभरे हुए भाग के रूप में दिखाई देता है, जिसे एडम्स ऐपल (Adam’s Apple) या कंठमणि कहते हैं। लड़कियों का स्वरयंत्र छोटा होता है; उनका स्वर उच्च तारत्व (high pitch) वाला होता है, जबकि लड़कों का स्वर गहरा होता है। किशोर लड़कों में कभी-कभी स्वरयंत्र की माँसपेशियों में अनियंत्रित वृद्धि के कारण आवाज फटने (होर्सनेस) या भर्राने लगती है।
श्वेद एवं तैल ग्रंथियों की क्रियाशीलताकिशोरावस्था में पसीना (श्वेद) और तैल ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है। इसकी अधिक क्रियाशीलता के कारण व्यक्तियों के चेहरे पर फुंसियाँ और मुँहासे हो जाते हैं।
जनन अंगों का विकासनर जननांग जैसे वृषण (testes) और शिश्न (penis) पूर्णतः विकसित हो जाते हैं और वृषण से शुक्राणुओं का उत्पादन शुरू हो जाता है। लड़कियों में अंडाशय (ovaries) आकार में बढ़ जाते हैं, अंड परिपक्व होने लगते हैं, और अंडाशय से अंडाणुओं का निर्मोचन शुरू हो जाता है.
मानसिक एवं संवेदनात्मक परिपक्वतायह सोचने के ढंग में परिवर्तन की अवधि है। किशोर अधिक स्वतंत्र और अपने प्रति अधिक सचेत होते हैं। यह वह समय है जब मस्तिष्क की सीखने की क्षमता सर्वाधिक होती है। यह परिवर्तन प्राकृतिक हैं।

3. गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characteristics)

  • ये वे लक्षण हैं जो लड़कों को लड़कियों से पहचानने में सहायता करते हैं।
  • लड़कियों में: स्तनों (breasts) का विकास होने लगता है।
  • लड़कों में: चेहरे पर दाढ़ी-मूँछें उगने लगती हैं। लड़कों के सीने पर भी बाल आ जाते हैं।
  • दोनों में: बगल (armpit) और जांघ के ऊपरी भाग या प्यूबिक क्षेत्र (pubic region) में बाल आ जाते हैं।

4. हार्मोन और अंतःस्रावी ग्रंथियाँ

  • किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं।
  • हार्मोन: रासायनिक पदार्थ हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों (या अंतःस्रावी तंत्र) द्वारा स्रावित होते हैं।
  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands): ये हार्मोन को सीधे रुधिर प्रवाह (bloodstream) में निर्मोचित करती हैं, इसलिए इन्हें नलिका-विहीन ग्रंथियाँ (ductless glands) भी कहते हैं।
  • यौन हार्मोन:
    • टेस्टोस्टेरोन (Testosterone): यह नर हार्मोन (पुरुष हार्मोन) है, जो यौवनारंभ के साथ वृषण द्वारा स्रावित होना शुरू होता है। यह लड़कों में परिवर्तनों (जैसे चेहरे पर बाल) का कारक है।
    • एस्ट्रोजन (Estrogen): यह मादा हार्मोन (स्त्री हार्मोन) है, जो अंडाशय द्वारा उत्पादित होना शुरू होता है। यह स्तनों के विकास को प्रेरित करता है।
  • पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland): यह ग्रंथि मस्तिष्क से जुड़ी होती है। यह एक अन्य हार्मोन स्रावित करती है जो वृषण और अंडाशय को यौन हार्मोन का उत्पादन शुरू करने के लिए नियंत्रित करता है। पीयूष ग्रंथि वृद्धि हार्मोन भी स्रावित करती है जो सामान्य वृद्धि के लिए आवश्यक है।
  • अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियाँ: शरीर में थायरॉइड, अग्न्याशय (Pancreas) और एड्रीनल (Adrenal) ग्रंथियाँ भी होती हैं।
    • थायरॉइड ग्रंथि: थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हार्मोन स्रावित करती है। थायरॉक्सिन की कमी से गॉयटर (Goitre) नामक व्याधि हो सकती है।
    • अग्न्याशय: इन्सुलिन हार्मोन का उत्पादन करता है। इन्सुलिन की अपर्याप्त मात्रा मधुमेह (Diabetes) का कारण बनती है।
    • एड्रीनल ग्रंथि: यह रुधिर में नमक की मात्रा को संतुलित करने वाले हार्मोन स्रावित करती है और एड्रीनेलिन हार्मोन का स्राव करती है। एड्रीनेलिन क्रोध, चिंता और उत्तेजना की अवस्था में तनाव के संयोजन का कार्य करता है।

5. मानव में जनन-काल की अवधि

  • महिलाओं में जनन अवस्था: यह यौवनारंभ (10 से 12 वर्ष की आयु) से शुरू होकर सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलती है।
  • ऋतुस्राव (Menstruation) या रजोधर्म: अंडाशय में एक अंडाणु परिपक्व होता है और लगभग 28 से 30 दिनों के अंतराल पर निर्मोचित होता है। यदि अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता है, तो अंडाणु तथा गर्भाशय का मोटा स्तर रुधिर वाहिकाओं सहित निस्तारित हो जाता है। यह रक्तस्राव ऋतुस्राव या रजोधर्म कहलाता है।
  • रजोनिवृत्ति (Menarche): यौवनारंभ में होने वाला पहला ऋतुस्राव रजोनिवृत्ति कहलाता है।
  • रजोनिवृत्ति (Menopause): लगभग 45 से 50 वर्ष की आयु में ऋतुस्राव रुक जाना रजोनिवृत्ति कहलाता है।
  • पुरुषों में युग्मक (gamete) की परिपक्वता एवं उत्पादन की क्षमता महिलाओं की अपेक्षा अधिक अवधि तक रहती है।
  • ऋतुस्राव चक्र का नियंत्रण हार्मोन द्वारा होता है।

6. संतति का लिंग-निर्धारण

  • निषेचित अंडाणु (युग्मनज) में शिशु के लिंग निर्धारण का संदेश गुणसूत्रों (chromosomes) में निहित होता है।
  • मनुष्यों की कोशिकाओं के केंद्रक में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 1 जोड़ा लिंग-सूत्र (X और Y) होता है।
  • मादा (Female): दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं।
  • पुरुष (Male): एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) होता है।
  • शुक्राणु के प्रकार: शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं: एक में X गुणसूत्र, और दूसरे में Y गुणसूत्र। अंडाणु में हमेशा एक X गुणसूत्र होता है।
  • निर्धारण:
    • यदि X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है, तो युग्मनज (XX) मादा शिशु में विकसित होगा।
    • यदि Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है, तो युग्मनज (XY) नर शिशु में विकसित होगा।
  • जन्म से पूर्व शिशु के लिंग का निर्धारण उसके पिता के लिंग गुणसूत्रों द्वारा किया जाता है। यह धारणा कि बच्चे के लिंग के लिए माँ उत्तरदायी है, पूर्णतः निराधार है और अन्यायसंगत है।

7. जननात्मक स्वास्थ्य (Reproductive Health)

  • स्वास्थ्य का अर्थ है व्यक्ति का कायिक (शारीरिक) एवं मानसिक विसंगति से मुक्त होना। किशोरावस्था में यह और भी आवश्यक हो जाता है।
  • संतुलित आहार (Balanced Diet): किशोरावस्था तीव्र वृद्धि की अवस्था है, इसलिए आहार का नियोजन सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
    • संतुलित आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, विटामिन, एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश होता है।
    • लौह (Iron) तत्व: यह रुधिर का निर्माण करता है। लौह-प्रचुर खाद्य जैसे पत्तेदार सब्जियाँ, गुड़, माँस, संतरा, आँवला किशोरों के लिए अच्छे हैं।
    • जंक फूड: चिप्स, पैक्ड या डिब्बाबंद खाद्य स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन उनमें पोषक मात्रा पर्याप्त नहीं होती, इसलिए उन्हें नियमित भोजन के स्थान पर नहीं खाना चाहिए।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता: पसीने की ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण प्रतिदिन एक बार स्नान करना आवश्यक है ताकि शरीर से गंध न आए। सफाई न रखने पर जीवाणु संक्रमण का खतरा रहता है।
    • मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता: लड़कियों को ऋतुस्राव के समय साफ सैनिटरी नैपकिन या घर पर तैयार किए गए कपड़े के पैड का उपयोग करना चाहिए और आवश्यकतानुसार हर 4-5 घंटे में बदलना चाहिए।
  • शारीरिक व्यायाम: ताज़ी हवा में टहलना और खेलना शरीर को चुस्त और स्वस्थ रखता है।
  • नशीली दवाओं (Drugs) का निषेध: ड्रग्स नशीले पदार्थ हैं जिनकी लत पड़ जाती है और जो स्वास्थ्य तथा खुशी को बर्बाद कर देते हैं। डॉक्टर द्वारा न दी गई हो तो कभी भी नशीली दवा न लें।
    • एड्स (AIDS): HIV नामक खतरनाक विषाणु द्वारा होता है। यह ड्रग्स के लिए इस्तेमाल की गई सिरिंज, संक्रमित माँ से दूध द्वारा शिशु में, या लैंगिक संपर्क द्वारा फैल सकता है।
  • विवाह की कानूनी आयु: लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष है। किशोर आयु में मातृत्व से माँ और संतान दोनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

8. कीटों और मेंढक में हार्मोन की भूमिका

  • कायांतरण (Metamorphosis): लार्वा (टेडपोल) से वयस्क मेंढक बनने के परिवर्तन को कायांतरण कहते हैं।
  • मेंढक में यह प्रक्रिया थायरॉइड द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन द्वारा नियंत्रित होती है।
  • थायरॉक्सिन के उत्पादन के लिए जल में आयोडीन की उपस्थिति आवश्यक है। यदि पानी में आयोडीन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो टेडपोल वयस्क मेंढक में परिवर्तित नहीं हो सकते।
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