फिरोज शाह तुगलक के सार्वजनिक कार्य

फिरोज शाह तुगलक के सार्वजनिक कार्य


फिरोज शाह तुगलक के सार्वजनिक कार्य (Public Works of Firoz Shah Tughlaq)

फिरोज शाह तुगलक (Firoz Shah Tughlaq) का शासनकाल (1351-1388 ई.) सार्वजनिक कार्यों, बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी उपायों के व्यापक कार्यक्रम के लिए विशिष्ट रूप से चिह्नित है।

उनके शासनकाल के बारे में जानकारी देने वाले प्रमुख स्रोतों में शम्स-ए-सिराज अफीफ की तारीख-ए-फ़िरोज़ शाही और सुल्तान की अपनी संस्मरण फ़तुहात-ए-फ़िरोज़ शाही शामिल हैं।

I. वास्तुकला और शहरी विकास

फिरोज शाह तुगलक कला और वास्तुकला के उत्साही संरक्षक थे।

  • तुगलक वास्तुकला की विशेषताएँ: उनके शासनकाल की वास्तुकला रूढ़िवादी, कार्यात्मक और विशाल संरचनाओं को दर्शाती है, जिसमें कंकड़ चिनाई (rubble masonry) का उपयोग किया गया है।
  • नए शहरों का निर्माण: उन्होंने फिरोजाबाद (Firozabad, जिसे फ़िरोज़ शाह कोटला भी कहा जाता है) जैसे नए शहर और किले बनवाए, जिनकी पहचान विशाल दीवारों और द्वारों के लिए की जाती है।
  • स्मारकों का जीर्णोद्धार: फिरोज शाह तुगलक ने पुराने भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का महत्वपूर्ण कार्य किया, जिसमें कुतुब मीनार भी शामिल है।
  • अशोक स्तंभ: वह प्रसिद्ध रूप से दो अशोक स्तंभों (टोपरा, रादौर के पास, और मेरठ से) को दिल्ली लाए। उन्होंने उनमें से एक को फिरोज़ शाह कोटला में अपने महल की छत पर फिर से स्थापित कराया।
  • हौज खास परिसर: फिरोज शाह तुगलक ने हौज खास परिसर में मदरसा (1352–53) का निर्माण कराया।

II. बुनियादी ढाँचा और कृषि विकास

फिरोज शाह तुगलक ने कृषि विकास पर बल दिया और वह “नहर निर्माता” के रूप में प्रसिद्ध हैं।

  • सिंचाई कर: फिरोज शाह तुगलक पहले सुल्तान थे जिन्होंने राज्य द्वारा निर्मित नहरों से सिंचाई करने वाले कृषकों पर शर्ब (सिंचाई कर) लगाया था।
  • बाग-बगीचे: उन्होंने दिल्ली के आसपास के क्षेत्र में 1,200 बाग स्थापित किए, जहां सात तरह के अंगूर उगाए जाते थे । अफीफ के अनुसार, इन प्रयासों के कारण अंगूर इतने बहुतायत में हो गए कि उनकी कीमतें कम हो गईं ।

III. सामाजिक कल्याण और मानवीय परियोजनाएँ

फिरोज शाह तुगलक ने कल्याणकारी उपाय लागू किए, जिसका उद्देश्य अपनी प्रजा की भौतिक स्थिति में सुधार करना था।

  • दीवान-ए-खैरात: उन्होंने दीवान-ए-खैरात (दान विभाग) की स्थापना की, जो गरीब परिवारों की लड़कियों के विवाह के लिए धन प्रदान करता था ।
  • दास विभाग: उन्होंने दीवान-ए-बंदगान (दास विभाग) की स्थापना की। फिरोज शाह तुगलक को गुलामों से विशेष लगाव था। इन गुलामों को शाही कारखानों (कारखानों) में और अंगरक्षकों के रूप में नियोजित किया जाता था।
  • चिकित्सा सहायता: उन्होंने गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए दिल्ली में अस्पताल स्थापित किए ।
  • अनावश्यक करों की समाप्ति: उन्होंने कई अन्यायपूर्ण या विवादास्पद कृषि करों को समाप्त कर दिया.

IV. शिक्षा और कला का संरक्षण

  • साहित्यिक अनुवाद: फिरोज शाह तुगलक ने संस्कृत के हिंदू धार्मिक कार्यों जैसे चिकित्सा और संगीत पर लिखे गए ग्रंथों का फ़ारसी में अनुवाद करवाया।
error: Content is protected !!