📒 “गीत – अगीत” — रामधारी सिंह ‘दिनकर’
“गीत – अगीत” — रामधारी सिंह ‘दिनकर’ “गीत – अगीत” : पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ (1) पहला अंश गीत, अगीत, कौन सुंदर है?👉 कवि पूछता है – क्या गाना (गीत) सुंदर है या मौन (अगीत) भी सुंदर है? गाकर गीत विरह के तटिनी वेगवती बहती जाती है।👉 विरह से भरी नदी तेज़ बहते हुए गीत गाती प्रतीत … Read more