राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र
राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र (प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशों के वर्गीकरण की पृष्ठभूमि बताते हुए, उनकी भू-वैज्ञानिक उत्पत्ति के स्रोतों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशों का निर्धारण सर्वप्रथम प्रोफेसर वी.सी. मिश्रा ने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान का भूगोल’ में किया था, जिसका प्रकाशन 1968 में ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ द्वारा किया गया। उन्होंने राजस्थान को सात भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया था।
सामान्यतया, राजस्थान को चार मुख्य भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है:
- पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश
- अरावली पर्वतीय प्रदेश
- पूर्वी मैदानी प्रदेश
- दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती प्रदेश)
भू-वैज्ञानिक उत्पत्ति: राजस्थान की भू-वैज्ञानिक संरचना गोंडवानालैंड और टेथिस सागर के अवशेषों से निर्मित मानी जाती है।
- टेथिस सागर के अवशेष: पश्चिमी रेतीला प्रदेश (मरुस्थल) और पूर्वी मैदानी प्रदेश।
- गोंडवानालैंड के अवशेष: अरावली पर्वतीय प्रदेश और दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती)। अरावली पर्वतमाला को गोंडवानालैंड का हिस्सा माना जाता है।
प्रश्न 2: राजस्थान के पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश और पूर्वी मैदानी प्रदेश की मुख्य भौगोलिक विशेषताओं का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
| विशेषता | पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश | पूर्वी मैदानी प्रदेश |
|---|---|---|
| विस्तार (भू-भाग) | राज्य के लगभग $61.11$ प्रतिशत भू-भाग पर फैला हुआ है। | संपूर्ण राज्य के $23.3$ प्रतिशत भू-भाग पर फैला हुआ है। |
| जनसंख्या | राज्य की $40$ प्रतिशत जनसंख्या यहाँ निवास करती है। | राज्य की लगभग $39$ प्रतिशत जनसंख्या यहाँ निवास करती है। (सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र)। |
| वर्षा का औसत | शुष्क मैदान में $20$ सेमी. वार्षिक औसत। अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र $25$ सेमी. वर्षा रेखा द्वारा विभाजित। | वार्षिक औसत $60$ से $100$ सेमी. तक रहता है। |
| मृदा (मिट्टी) | रेतीली बलुई मिट्टी (शुष्क) और पुरानी जलोढ़ मृदा (बांगर क्षेत्र)। | मुख्य रूप से जलोढ़ (कछारी) मिट्टी पाई जाती है, जिसे राजस्थान की सबसे उपजाऊ मिट्टी माना जाता है। |
| उप-प्रदेश | पश्चिम विशाल मरूस्थल (शुष्क) और राजस्थान बांगर (अर्द्ध-शुष्क मैदान: घग्घर, शेखावाटी, नागौरी उच्च भूमि, लूनी-जवाई बेसिन)। | बनास बेसिन, चम्बल बेसिन, मध्य माही बेसिन (छप्पन मैदान) और बाणगंगा बेसिन। |
| अन्य तथ्य | इसे थार का मरुस्थल कहते हैं। यहाँ पवन अपरदन और निक्षेपण से बालुका स्तूप (बरखान, अनुप्रस्थ) पाए जाते हैं। चंदन नलकूप को “थार का घड़ा” कहा जाता है। | चम्बल बेसिन में उत्खात स्थलाकृति (Badland Topography) (बीहड़) फैली है। मध्य माही बेसिन को छप्पन का मैदान और वागड़ कहते हैं। |