सकल घरेलू उत्पाद में कृषि की हिस्सेदारी का रुझान

सकल घरेलू उत्पाद में कृषि की हिस्सेदारी का रुझान (Trends in the share of agriculture in Gross Domestic Product – GDP) पर आधारित नोट्स, स्रोतों में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निम्नलिखित हैं:

भारतीय अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह है कि सकल घरेलू उत्पाद (या शुद्ध घरेलू उत्पाद) में कृषि क्षेत्र का योगदान समय के साथ निरंतर कम होता गया है। किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए यह एक सामान्य संरचनात्मक परिवर्तन (structural change) का सूचक है, जहां उद्योग और सेवा क्षेत्र का महत्व बढ़ता जाता है।

1. प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी का ऐतिहासिक रुझान (Historical Trend of Primary Sector Share):

प्राथमिक क्षेत्र (जिसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियां शामिल हैं) का शुद्ध घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product – NDP) में योगदान वर्षों के दौरान काफी कम हो गया है। स्रोतों में दिए गए आंकड़े इस रुझान को दर्शाते हैं (ये आंकड़े कारक लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद पर आधारित हैं):

अवधिप्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा (प्रतिशत)स्रोत
1950-5155.3 प्रतिशत
1970-7144.7 प्रतिशत
1980-8139.7 प्रतिशत
1995-9628.5 प्रतिशत

2. रुझान की व्याख्या और महत्व (Interpretation and Significance of the Trend):

  • संरचनात्मक परिवर्तन: यह गिरावट दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकसित हुई है, और सकल घरेलू उत्पाद के वितरण में प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) के हिस्से में कमी आई है, जबकि द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवा) क्षेत्रों का योगदान बढ़ गया है।
  • महत्व का निरंतरता: हालांकि प्रतिशत हिस्सा कम हुआ है, फिर भी प्राथमिक क्षेत्र अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।
  • प्रति व्यक्ति उत्पादन में वृद्धि दर: प्राथमिक क्षेत्र में प्रति व्यक्ति उत्पादन की वृद्धि दर (Growth rate of per capita output) आमतौर पर धीमी रही है, जो इस क्षेत्र की विशेषताओं में से एक है।
  • कृषि उत्पादकता की चुनौती: इस संरचनात्मक बदलाव के बावजूद, भारतीय कृषि अभी भी निम्न उत्पादकता (Low Productivity) की विशेषता रखती है।

3. हालिया वृद्धि दर (Recent Growth Rate):

  • 1990-91 में, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद (कारक लागत पर) की वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
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