वीर तेजाजी
वीर तेजाजी महाराज
“सत्यवादी, गौ-रक्षक एवं नागवंशीय धौल्या वीर”
✨ जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
जन्म तिथि
माघ शुक्ल चतुर्दशी (V.S. 1130)
जन्म स्थान
खरनाल, नागौर
पिता / माता
ताहड़ जी / रामकुंवरी
घोड़ी
लीलण (सिणगारी)
🛡️ बलिदान की अमर कथा
तेजाजी जब अपने ससुराल पनेर गए, तब **लाछां गूजरी** की गायों को मेर के मीणा चुरा ले गए थे। वचनबद्ध होकर तेजाजी गायों को छुड़ाने गए। रास्ते में **सेंदरिया** नामक स्थान पर उन्होंने एक नाग (भाषक) को डसने से रोका और वचन दिया कि वे कार्य पूर्ण कर वापस आएँगे। भीषण युद्ध में घायल होने के बावजूद वे वापस आए और नाग के डसने हेतु अपनी **जीभ** आगे कर दी।
प्रमुख घटना स्थल:
- सेंदरिया (ब्यावर): यहाँ सर्प ने डसा था।
- सुरसुरा (अजमेर): यहाँ भाद्रपद शुक्ल दशमी को निर्वाण प्राप्त किया।
⚔️ महत्वपूर्ण उपनाम व पहचान
“किसान हल जोतते समय तेजाजी की स्तुति में ‘तेजा टेर’ लोकगीत गाते हैं।”
🗺️ प्रमुख मंदिर एवं तीर्थ
परबतसर (नागौर)
आय की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला यहाँ भरता है।
बांसी दुगारी (बूंदी)
यह स्थान तेजाजी की प्रमुख ‘कर्म स्थली’ माना जाता है।
भावता (अजमेर)
यहाँ सर्पदंश का निशुल्क इलाज तेजाजी के आशीर्वाद से किया जाता है।
पनेर (अजमेर)
तेजाजी का ससुराल, जहाँ मंदिर का पुजारी ‘माली’ जाति का होता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
- • तेजाजी **अजमेर जिले** के सबसे प्रमुख लोकदेवता हैं।
- • मंदिर के पुजारी को **’घोडला’** कहा जाता है।
- • सर्पदंश पर दाहिने पैर में तेजाजी के नाम का धागा (**तांती**) बांधा जाता है।
- • वर्ष **2011** में तेजाजी पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।
- • तेजा दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी) के दिन ही **खेजड़ली शहीद दिवस** भी आता है।
“गाज्या-गाज्या जेठ असाढ़, कंवर तेजा रे…”
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