कक्षा 10 हिन्दी नागार्जुन (यह दंतुरित मुस्कान और फसल)
यह दंतुरित मुस्कान
1. छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान देखकर कवि के मन में क्या भाव उमड़ते हैं?
छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान देखकर कवि (नागार्जुन) के मन में अत्यंत गहन भाव उमड़ते हैं।
- कवि मानते हैं कि इस सुंदरता में ही जीवन का संदेश निहित है।
- मुस्कान की व्याप्ति ऐसी है कि वह कठोर से कठोर मन को भी पिघला दे, और कठिन पाषाण (कठोर पत्थर) भी पिघलकर जल बन गया होगा।
- मुस्कान में इतनी शक्ति है कि वह मृतक में भी जान डाल (मृतक में भी डाल देगी जान) देती है।
- बच्चे का धूल-धूसर शरीर (धूलि-धूसर गालत) देखकर कवि को लगता है कि तालाब को छोड़कर कमल (जलजात) उसकी झोंपड़ी में खिल रहा है।
- कवि को ऐसा महसूस होता है, मानो बाँस या बबूल से भी शेफालिका के फूल झरने लगे हों।
2. ‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता के आधार पर एक माँ के महत्व को समझाइए।
कविता में माँ का महत्व माध्यम के रूप में दर्शाया गया है, जिसके कारण कवि को शिशु की मनोहारी मुस्कान देखने और जानने का अवसर मिला।
- कवि कहते हैं कि “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!” (धन्य हो तुम, और तुम्हारी माँ भी धन्य है)।
- कवि स्वयं को चिर प्रवासी (चिर प्रवासी) और इतर/अन्य (मैं इतर, मैं अन्य!) अतिथि मानते हैं।
- यदि माँ माध्यम (तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती) न बनी होती, तो कवि यह दंतुरित मुस्कान न देख सकता और न जान पाता।
- माँ की उंगलियाँ ही बच्चे को मधुपर्क (मधुपर्क) कराती रही हैं, जिससे बच्चे और अतिथि (कवि) के बीच संपर्क बना रहा।
3. ‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता में कवि ने क्या सन्देश दिया है?
‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता यह संदेश देती है कि जीवन की सुंदरता और जीवंतता को पहचानना और उसका स्वागत करना चाहिए।
- यह कविता जीवन की आशावादी शक्ति को दर्शाती है, जहाँ सुंदरता और मासूमियत (जैसे बच्चे की मुस्कान) दुःख और कठोरता (मृतक और पाषाण के प्रतीक) को सृजन और आनंद में बदलने की क्षमता रखती है।
- कविता इस बात पर भी जोर देती है कि मनुष्य और प्रकृति के सहयोग से ही सृजन संभव होता है।
फसल
4. ‘फसल’ कविता का मूल भाव लिखिए।
‘फसल’ कविता का मूल भाव फसल की परिभाषा और उसे उत्पन्न करने वाले अनेक तत्वों के योगदान को रेखांकित करना है।
- कविता स्पष्ट करती है कि फसल केवल बीज और मिट्टी का परिणाम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति (जैसे पानी, सूरज, हवा) और मनुष्य के सहयोग (मनुष्य के सहयोग) से संभव हुए सृजन की महिमा है।
- यह कविता उपभोक्ता-संस्कृति (उपभोक्ता-संस्कृति) के दौर में पाठकों को कृषि-संस्कृति (कृषि-संस्कृति) के निकट ले जाती है।
5. कवि के अनुसार फसल क्या है? (मॉडल प्रश्नपत्र 2025)
कवि के अनुसार फसल निम्नलिखित तत्वों का रूपांतर है:
- नदियों के पानी का जादू (नदियों के पानी का जादू है वह)।
- लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की महिमा।
- भूरी-काली-सँदली मिट्टी का गुण धर्म।
- सूरज की किरणों का रूपांतर।
- हवा की थिरकन (हवा की थिरकन) का सिमटा हुआ संकोच।
6. फसल किसके हाथों के स्पर्श की महिमा है? (मॉडल प्रश्नपत्र 2024)
फसल लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श (लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की महिमा) की महिमा है। यह किसानों के श्रम और स्पर्श की महत्ता को दर्शाता है।
7. ‘रूपांतर है सूरज की किरणों का’ पंक्ति का आशय लिखिए। (मॉडल प्रश्नपत्र 2024)
इस पंक्ति का आशय यह है कि फसल वास्तव में सूर्य की किरणों (सूरज की किरणों) के ऊर्जा और ताप का रूपांतरण है। फसलें प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश को ही अपने अंदर समाहित करके, भौतिक रूप में अन्न या उपज के रूप में प्रकट होती हैं।
8. फसल को हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच बताया गया है। (मॉडल प्रश्नपत्र 2025)
हाँ, फसल को हवा की थिरकन (हवा की थिरकन) का सिमटा हुआ संकोच (सिमटा हुआ संकोच) बताया गया है। यह प्रकृति के सूक्ष्म तत्वों के योगदान को दर्शाता है।