बैराठ सभ्यता (विराटनगर) का संपूर्ण इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्य | Rajasthan CET 2026

बैराठ सभ्यता (विराटनगर) का संपूर्ण इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्य | Rajasthan CET 2026

राजस्थान CET परीक्षा में प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े सवालों में ‘बैराठ सभ्यता’ का एक विशेष स्थान है। यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ से महाभारत काल, मौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) और बौद्ध धर्म के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं। आइए जानते हैं बैराठ सभ्यता के वे सभी महत्वपूर्ण तथ्य जो परीक्षा में पूछे जाते हैं।

बैराठ सभ्यता की स्थिति, नदी और नया जिला:

  • नया जिला: पहले यह जयपुर में थी, लेकिन नए जिलों के गठन के बाद अब बैराठ सभ्यता ‘कोटपूतली-बहरोड़’ जिले में आती है।
  • नदी: यह सभ्यता बाणगंगा नदी (Banganga River) के किनारे विकसित हुई। बाणगंगा को ‘अर्जुन की गंगा’ भी कहा जाता है।
  • प्राचीन नाम: इसका प्राचीन नाम विराटनगर था, जो महाभारत काल में मत्स्य जनपद की राजधानी हुआ करता था।

खोज और उत्खनन (Discovery & Excavation):

  • इसकी खोज और प्रथम उत्खनन दयाराम साहनी (Dayaram Sahni) ने 1936-37 ई. में किया था।
  • बाद में 1962-63 में नीलरत्न बनर्जी (N.R. Banerjee) और कैलाशनाथ दीक्षित (K.N. Dixit) ने यहाँ व्यापक खुदाई की।

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बैराठ सभ्यता के प्रमुख साक्ष्य और विशेषताएं (Key Findings – रट लें!):

  1. महाभारत काल के साक्ष्य: पांडवों ने अपने 13 वर्ष के अज्ञातवास का अंतिम एक वर्ष इसी विराटनगर (बैराठ) के राजा विराट के दरबार में भेष बदलकर बिताया था। यहाँ ‘भीम डूंगरी’ पर एक गड्ढा है जिसे ‘भीमलत’ (भीम के लात मारने से बना तालाब) कहा जाता है।
  2. सम्राट अशोक का भाब्रू शिलालेख (Bhabru Inscription):
    • 1837 ई. में कैप्टन बर्ट (Captain Burt) ने यहाँ की ‘बीजक की पहाड़ी’ से अशोक का भाब्रू शिलालेख खोजा था।
    • यह शिलालेख प्रमाणित करता है कि अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया था, क्योंकि इसमें अशोक द्वारा ‘बुद्ध, धम्म और संघ’ में आस्था प्रकट की गई है। (वर्तमान में यह शिलालेख कोलकाता के एशियाटिक सोसाइटी म्यूजियम में सुरक्षित है।)
  3. बौद्ध धर्म के साक्ष्य: यहाँ से एक गोल (Circular) बौद्ध मंदिर (मठ) और स्तूप के अवशेष मिले हैं। यह राजस्थान में बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन केंद्र था।
  4. मुद्राएं (सिक्के): यहाँ खुदाई में एक मिट्टी के बर्तन में सूती कपड़े में बंधी हुई 36 चांदी की मुद्राएं मिली हैं।
    • इनमें से 8 मुद्राएं ‘पंचमार्क’ (आहत मुद्राएं) हैं।
    • 28 मुद्राएं इंडो-ग्रीक (हिन्द-यवन) शासकों की हैं, जिनमें से 16 मुद्राएं प्रसिद्ध यूनानी राजा मिनांडर (Menander) की हैं।
  5. प्रमुख पहाड़ियां: बैराठ का उत्खनन मुख्य रूप से तीन पहाड़ियों पर हुआ है: बीजक की पहाड़ी, भीम डूंगरी और महादेव जी की डूंगरी।
  6. शंख लिपि: यहाँ की गुफाओं में कुछ अज्ञात लिपि में लेख मिले हैं, जिन्हें ‘शंख लिपि’ कहा गया है।

निष्कर्ष:

महाभारत काल, अशोक का भाब्रू शिलालेख, बौद्ध मठ और 36 मुद्राएं बैराठ सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इसके साथ ही नए जिले (कोटपूतली-बहरोड़) का नाम विशेष रूप से ध्यान रखें।

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