भारत का भूगोल प्रश्न बैंक 50 Questions with Model Answers

भारत का भूगोल प्रश्न बैंक 50 Questions with Model Answers

प्रथम इकाई भारत का भूगोल (Unit 1) – व्यापक अभ्यास प्रश्न बैंक (50 Questions with Model Answers)

यह अभ्यास प्रश्न बैंक बी.ए. भूगोल के छात्रों की आगामी सेमेस्टर परीक्षा की तैयारी के लिए तैयार किया गया है। इसे नवीनतम परीक्षा पैटर्न के अनुसार तीन भागों में विभाजित किया गया है:

  1. भाग-अ (Part-A): अति-लघुत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type – 20 Questions)
  2. भाग-ब (Part-B): लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type (~50 Words) – 20 Questions)
  3. भाग-स (Part-C): निबंधात्मक प्रश्न (Long/Essay Answer Type – 10 Questions with Detailed Structuring & Model Answers)

भाग-अ: अति-लघुत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Questions)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर एक वाक्य या अधिकतम 20 शब्दों में दें।

Q1. भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल कितना है और यह विश्व का कितना प्रतिशत है?

उत्तर: भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है, जो संपूर्ण विश्व के कुल क्षेत्रफल का लगभग 2.4 प्रतिशत है।

Q2. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय और देशान्तरीय विस्तार क्या है?

उत्तर: मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तथा देशान्तरीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशान्तर से 97°25′ पूर्वी देशान्तर के मध्य है।

Q3. भारत का सुदूर दक्षिणी बिंदु कौन सा है और वह कहाँ स्थित है?

उत्तर: भारत का सुदूर दक्षिणी बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ (Indira Point) है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।

Q4. भारत के सुदूर पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी छोर के अंतिम बिंदुओं के नाम लिखिए।

उत्तर:

  • उत्तरी बिंदु: इंदिरा कोल (लद्दाख)
  • पूर्वी बिंदु: किबिथू (अरुणाचल प्रदेश)
  • पश्चिमी बिंदु: गुहार मोती (गुजरात)

Q5. कर्क रेखा (23°30′ N) भारत के किन 8 राज्यों से होकर गुजरती है?

उत्तर: कर्क रेखा पश्चिम से पूर्व क्रमशः गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है।

Q6. भारतीय मानक समय रेखा (IST) क्या है और यह कहाँ से गुजरती है?

उत्तर: 82°30′ पूर्वी देशान्तर रेखा को मानक समय रेखा माना गया है, जो उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के निकट मिर्जापुर से गुजरती है।

Q7. नवीनतम जीआईएस (GIS) मापों के अनुसार भारत की कुल तटीय सीमा की लंबाई कितनी है?

उत्तर: नेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस (NHO) देहरादून के नवीनतम जीआईएस मापों के अनुसार भारत की कुल तटीय सीमा 11,098.81 किलोमीटर है।

Q8. भारत के साथ सबसे लंबी और सबसे छोटी स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों के नाम लिखिए।

उत्तर: सबसे लंबी स्थलीय सीमा बांग्लादेश (4,096.7 किमी) के साथ और सबसे छोटी सीमा अफगानिस्तान (106 किमी) के साथ लगती है।

Q9. भारत की सर्वोच्च पर्वत चोटी कौन सी है और यह किस पर्वत श्रेणी में है?

उत्तर: भारत की सर्वोच्च चोटी K2 (गॉडविन ऑस्टिन – 8,611 मीटर) है, जो ट्रांस-हिमालय की काराकोरम श्रेणी में स्थित है।

Q10. हिमालय की लघु श्रेणियों पर पाए जाने वाले घास के मैदानों को कश्मीर और उत्तराखंड में क्या कहते हैं?

उत्तर: इन्हें कश्मीर में ‘मर्ग’ (जैसे सोनमर्ग, गुलमर्ग) तथा उत्तराखंड में ‘बुग्याल’ या ‘पयाल’ कहा जाता है।

Q11. ‘दून’ और ‘द्वार’ घाटियों से आप क्या समझते हैं? दो उदाहरण दें।

उत्तर: लघु हिमालय और शिवालिक श्रेणी के बीच स्थित अनुदैर्ध्य घाटियों को पश्चिम में ‘दून’ (जैसे देहरादून) और पूर्व में ‘द्वार’ (जैसे हरिद्वार) कहते हैं।

Q12. भाबर क्षेत्र से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: शिवालिक के गिरिपद में 8-16 किमी चौड़ी पट्टी जहाँ कंकड़-पत्थरों के जमाव के कारण नदियां धरातल के नीचे विलीन (अदृश्य) हो जाती हैं, भाबर कहलाती है।

Q13. ‘करेवा’ मिट्टी क्या है और यह किस कृषि के लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर: कश्मीर घाटी में पीर पंजाल श्रेणी के ढलानों पर पाई जाने वाली झील-निक्षेप मिट्टी करेवा कहलाती है, जो केसर (जाफरान) की खेती के लिए प्रसिद्ध है।

Q14. अमरकंटक पहाड़ी से निकलने वाली दो प्रमुख नदियां कौन सी हैं और वे किस दिशा में बहती हैं?

उत्तर: अमरकंटक से नर्मदा नदी (पश्चिम की ओर) तथा सोन नदी (उत्तर-पूर्व की ओर गंगा में मिलने हेतु) निकलती हैं।

Q15. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी कौन सी है और इसे अन्य किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: गोदावरी नदी (1,465 किमी) प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे ‘दक्षिण गंगा’ या ‘वृद्ध गंगा’ कहा जाता है।

Q16. पश्चिमी घाट की नदियां समुद्र में गिरने से पहले डेल्टा क्यों नहीं बनातीं?

उत्तर: तीव्र ढाल, कठोर चट्टानी धरातल और छोटे मार्ग के कारण ये नदियां तीव्र गति से बहती हैं और डेल्टा के स्थान पर ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।

Q17. ‘मावठ’ (Mavath) क्या है?

उत्तर: शीतकाल में भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों द्वारा उत्तर-पश्चिम भारत में होने वाली वर्षा को ‘मावठ’ कहते हैं, जो रबी की फसल के लिए अमृत समान है।

Q18. कोपेन के अनुसार ‘Amw’ जलवायु प्रकार भारत के किस भौगोलिक क्षेत्र को दर्शाता है?

उत्तर: यह गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिमी तटीय मैदान (मालाबार तट) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ‘लघु शुष्क ऋतु वाली मानसूनी जलवायु’ को दर्शाता है।

Q19. काली मिट्टी को ‘स्वतः जुताई वाली मिट्टी’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: शुष्क मौसम में पानी की कमी होने पर इस मिट्टी में गहरी व चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे वायु का गहराई तक प्रवेश हो जाता है। इसी कारण इसे स्वतः जुताई वाली मिट्टी कहते हैं।

Q20. सामाजिक वानिकी (Social Forestry) के दो प्रमुख घटक कौन से हैं?

उत्तर: इसके दो प्रमुख घटक सामुदायिक वानिकी (Community Forestry) और कृषि वानिकी (Farm Forestry) हैं।


भाग-ब: लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Questions)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 50 शब्दों में दें। ये प्रश्न तार्किक और विश्लेषणात्मक कौशल की जांच करते हैं।

Q21. भारत की भौगोलिक स्थिति का हिंद महासागर में क्या सामरिक महत्व है?

उत्तर: भारत हिंद महासागर के शीर्ष पर केंद्रीय स्थिति में है। पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्ग भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अत्यंत निकट से गुजरते हैं। यह स्थिति भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका के देशों के साथ सीधे समुद्री व्यापारिक संबंध स्थापित करने और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभाने में मदद करती है।

Q22. प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) के अनुसार हिमालय की उत्पत्ति कैसे हुई?

उत्तर: करोड़ों वर्ष पूर्व वर्तमान प्रायद्वीपीय भारत (गोंडवानालैंड) की इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराई। इन दोनों प्लेटों के बीच स्थित ‘टेथिस सागर’ के अवसादों में इस भयंकर टक्कर से तीव्र संपीड़न (Compression) हुआ, जिससे मलबे में वलन (Folding) पड़ गए। इसी वलन प्रक्रिया के फलस्वरूप विश्व की सबसे नवीन वलित पर्वत श्रृंखला ‘हिमालय’ की उत्पत्ति हुई।

Q23. पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  • पश्चिमी घाट: यह एक सतत (Continuous) श्रृंखला है जिसे केवल दर्रों द्वारा पार किया जा सकता है। इसकी औसत ऊंचाई अधिक (900-1600 मीटर) है और इसका सर्वोच्च शिखर ‘अनाईमुडी’ (2695 मीटर) है।
  • पूर्वी घाट: यह महानदी, गोदावरी जैसी पूर्व की ओर बहने वाली नदियों द्वारा अत्यधिक काटा-फटा और विच्छिन्न (Discontinuous) है। इसकी औसत ऊंचाई कम (लगभग 600 मीटर) है और सर्वोच्च शिखर ‘महेंद्रगिरी’ (1501 मीटर) है।

Q24. बांगर और खादर जलोढ़ मिट्टी में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • बांगर: यह मैदान का उच्च भाग है जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता। यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बनी है, जिसमें चूनेदार कंकरों की प्रचुरता होती है और यह कम उपजाऊ होती है।
  • खादर: यह नदी के निकट का निचला बाढ़ का मैदान है जहाँ प्रतिवर्ष नदियों द्वारा नई जलोढ़ मिट्टी जमा की जाती है। यह अत्यधिक बारीक, चिकनी और अत्यंत उपजाऊ मिट्टी है।

Q25. अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप समूह की उत्पत्ति में क्या भौगोलिक अंतर है?

उत्तर:

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: इनकी उत्पत्ति विवर्तनिक गतिविधियों से हुई है। ये वास्तव में बंगाल की खाड़ी में जलमग्न पर्वतीय श्रेणियों (निमज्जित अराकान योमा पर्वत) के ऊपरी शिखर हैं।
  • लक्षद्वीप समूह: यह अरब सागर में स्थित है और इसकी उत्पत्ति पूरी तरह से जैविक है। यह छोटे-छोटे मूँगा जीवों (प्रवाल पॉलीप्स) के अस्थि-पंजरों के जमाव से बने प्रवाल द्वीपों (Atolls) से निर्मित है।

Q26. अपवाह प्रतिरूप (Drainage Pattern) क्या है? इसके दो प्रमुख उदाहरण दीजिए।

उत्तर: जब कोई मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियां धरातलीय ढाल, चट्टानी संरचना और भूगर्भीय इतिहास के अनुसार एक निश्चित ज्यामितीय आकार में बहती हैं, तो उसे ‘अपवाह प्रतिरूप’ कहते हैं।

  • वृक्षाकार (Dendritic) प्रतिरूप: जैसे गंगा और उसकी सहायक नदियां (पेड़ की शाखाओं जैसी आकृति)।
  • अरीय (Radial) प्रतिरूप: जैसे अमरकंटक से निकलने वाली नर्मदा और सोन नदियां (एक केंद्र से चारों दिशाओं में बहना)।

Q27. सिंधु नदी के ‘पंचनद’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: सिंधु नदी के पूर्व में पंजाब क्षेत्र से बहकर इसमें मिलने वाली पाँच प्रमुख नदियों के समूह को ‘पंचनद’ कहा जाता है। ये पाँच नदियां क्रमशः हैं:

  1. झेलम (वेरीनाग से उद्गम)
  2. चेनाब (चंद्रा और भागा का मिलाप)
  3. रावी (रोहतांग दर्रे से उद्गम)
  4. व्यास (व्यास कुंड से उद्गम)
  5. सतलुज (राक्षस ताल, तिब्बत से उद्गम)

Q28. ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश, असम और बांग्लादेश में किन स्थानीय नामों से जाना जाता है?

उत्तर: ब्रह्मपुत्र नदी को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है:

  • तिब्बत में: त्सांगपो (Tsangpo – अर्थात शुद्ध करने वाली)
  • अरुणाचल प्रदेश में: दिहांग (Dihang)
  • असम घाटी में: ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra)
  • बांग्लादेश में: जमुना (Jamuna)

Q29. नर्मदा और तापी नदियां प्रायद्वीपीय ढाल के विपरीत पश्चिम की ओर क्यों बहती हैं?

उत्तर: यद्यपि प्रायद्वीपीय भारत का सामान्य ढाल पूर्व की ओर (बंगाल की खाड़ी की तरफ) है, परंतु नर्मदा और तापी नदियां भूगर्भीय हलचलों के कारण बनी गहरी भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर बहती हैं। इन दरार घाटियों का ढाल पश्चिम की ओर (अरब सागर की तरफ) है, इसलिए ये नदियां इस कठोर पथरीली घाटी के ढाल का अनुसरण करते हुए पश्चिम की ओर बहती हैं।

Q30. राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (River Interlinking Project) के दो मुख्य उद्देश्य बताइए।

उत्तर:

  1. बाढ़ और सूखे का संतुलन: देश के अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों की नदियों (जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र) के अधिशेष जल को नहरों के माध्यम से कम वर्षा वाले सूखे क्षेत्रों की नदियों (जैसे प्रायद्वीपीय नदियां) में स्थानांतरित करना।
  2. कृषि और जलविद्युत का विकास: देश के सिंचित क्षेत्र का विस्तार करना, पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा विभिन्न कनाल जल प्रपातों पर जलविद्युत का उत्पादन बढ़ाना।

Q31. मानसून के प्रस्फोट (Burst of Monsoon) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: जून के प्रथम सप्ताह में जब आर्द्र दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें अत्यधिक तीव्र वेग के साथ भारत के पश्चिमी तट (केरल) पर पहुँचती हैं, तो गर्जना और बिजली चमकने के साथ अचानक मूसलाधार वर्षा प्रारंभ हो जाती है जो कई दिनों तक लगातार चलती है। इस अचानक होने वाली भारी वर्षा की घटना को ही ‘मानसून का प्रस्फोट’ या ‘मानसून धमाका’ कहा जाता है।

Q32. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) क्या हैं और इनका भारत में क्या आर्थिक महत्व है?

उत्तर: पश्चिमी विक्षोभ शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात हैं जो भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में उत्पन्न होते हैं और पछुआ जेट स्ट्रीम के सहारे भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में प्रवेश करते हैं। इनसे शीतकाल (दिसंबर-जनवरी) में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में हल्की वर्षा होती है जिसे ‘मावठ’ कहते हैं। यह वर्षा रबी की फसल, विशेषकर गेहूँ की पैदावार के लिए अत्यंत लाभकारी होती है।

Q33. अल-नीनो (El Niño) का भारतीय मानसून पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: अल-नीनो प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास उत्पन्न होने वाली एक अस्थाई गर्म महासागरीय जलधारा है। इसके विकसित होने से प्रशांत महासागर के वायुदाब प्रतिरूप में परिवर्तन आता है, जिससे हिंद महासागर के ऊपर बनने वाला मानसूनी वायुदाब तंत्र कमजोर पड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप मानसूनी पवनें निर्बल हो जाती हैं और भारत में कम वर्षा होती है या सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

Q34. व्लादिमीर कोपेन ने भारत के जलवायु वर्गीकरण का मुख्य आधार किसे माना है?

उत्तर: कोपेन ने अपने वर्गीकरण में फ्रांसीसी वनस्पतिशास्त्री डी कैंडोल के विश्व वनस्पति मंडल को आधार बनाया। उनका मानना था कि प्राकृतिक वनस्पति ही किसी क्षेत्र के मौसम और जलवायु का सबसे संवेदनशील और सटीक सूचक है। इसी कारण उन्होंने तापमान और वर्षा की मात्रा के सांख्यिकीय आंकड़ों को स्थानीय वनस्पति के वितरण के साथ जोड़कर अपनी संकेताक्षर प्रणाली तैयार की।

Q35. कोपेन के ‘As’ जलवायु प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और विशेषताएं बताइए।

उत्तर: कोपेन का ‘As’ जलवायु प्रदेश मुख्यतः तमिलनाडु के कोरोमंडल तट और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ ग्रीष्मकाल पूरी तरह शुष्क रहता है क्योंकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की शाखा इसके समानांतर निकल जाती है। यहाँ अधिकांश वर्षा शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर) में लौटते हुए उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है।

Q36. मृदा के pH मान से क्या तात्पर्य है? फसलों के लिए अनुकूल pH मान क्या है?

उत्तर: pH मान मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता को दर्शाने वाला पैमाना है।

  • यदि pH मान 7 से कम हो, तो मिट्टी अम्लीय होती है (अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में)।
  • यदि pH मान 7 से अधिक हो, तो मिट्टी क्षारीय होती है (शुष्क क्षेत्रों में लवणों के संचय से)।
  • कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अधिकांश फसलों के स्वस्थ विकास के लिए 6.5 pH मान वाली उदासीन के निकट की मिट्टी को सर्वोत्तम माना जाता है।

Q37. लैटेराइट मिट्टी के निर्माण में ‘निक्षालन’ (Leaching) प्रक्रिया को समझाइए।

उत्तर: अत्यधिक वर्षा (200 सेमी से अधिक) और उच्च तापमान वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ‘निक्षालन’ (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया होती है। भारी वर्षा के कारण मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद घुलनशील खनिज जैसे सिलिका और चूना पानी में घुलकर नीचे की परतों में चले जाते हैं। धरातल की ऊपरी परत पर केवल अघुलनशील लोहे और एल्युमिनियम के हाइड्रेटेड ऑक्साइड ही शेष बच जाते हैं, जिससे ईंट जैसी कठोर लैटेराइट मिट्टी बनती है।

Q38. मृदा अपरदन को ‘रेंगती हुई मृत्यु’ (Creeping Death) क्यों कहा जाता है? चंबल क्षेत्र का उदाहरण दीजिए।

उत्तर: मृदा अपरदन अत्यंत धीमी और क्रमिक गति से काम करता है। किसानों को मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत के धीरे-धीरे बह जाने का तुरंत पता नहीं चलता, लेकिन कुछ वर्षों में भूमि पूरी तरह बंजर हो जाती है। इसीलिए इसे कृषि की ‘रेंगती हुई मृत्यु’ कहते हैं। चंबल नदी बेसिन में तीव्र बहते जल द्वारा हुए अवनलिका अपरदन (Gully Erosion) ने उपजाऊ कृषि भूमि को गहरे खड्डों और बीहड़ों (Ravines) में बदल दिया है जो कृषि के अयोग्य हो चुकी है।

Q39. वनस्पति में स्थानिक (Endemic) और विदेशी (Exotic) प्रजातियों में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • स्थानिक (Endemic) प्रजाति: वह वनस्पति जो मूल रूप से भारतीय भौगोलिक क्षेत्र की ही मूल निवासी है और प्राकृतिक रूप से केवल यहीं पाई जाती है, जैसे घटपर्णी पौधा (नेपेंथेस खासियाना)।
  • विदेशी (Exotic) प्रजाति: वे पौधे जो मूल रूप से भारत के बाहर के देशों (जैसे दक्षिण अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया) से किसी कारणवश यहाँ लाए गए और अब यहाँ के प्राकृतिक पर्यावरण में सघन रूप से फैल चुके हैं, जैसे जलकुंभी और लैंटाना।

Q40. राष्ट्रीय वन नीति (1952/1988) के अनुसार वनों के क्षेत्रफल का क्या लक्ष्य निर्धारित किया गया है?

उत्तर: राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार, पारिस्थितिक स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 33% भाग पर वनों का होना अनिवार्य घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 60% वन क्षेत्र और समतल मैदानी भागों के लिए 25% वन क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


भाग-स: निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer / Essay Questions)

निर्देश: ये प्रश्न विश्वविद्यालय परीक्षा में 15 से 20 अंकों के लिए पूछे जाते हैं। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की रूपरेखा (Outline) और मुख्य परीक्षा बिंदुओं को विस्तार से समझाया गया है।

Q41. भारत की भौगोलिक स्थिति और विस्तार का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा इसके सामरिक व भू-राजनैतिक महत्व की विवेचना कीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: ऐतिहासिक संदर्भ, विष्णु पुराण का श्लोक और उसका भौगोलिक विश्लेषण।
  2. ग्लोब पर स्थिति: गोलार्द्धीय स्थिति, अक्षांशीय एवं देशान्तरीय विस्तार (मुख्य भूमि बनाम द्वीपों सहित विस्तार)।
  3. आकार और सीमाएं: चतुष्कोणीय आकार, क्षेत्रफल (32.87 लाख वर्ग किमी), लंबाई-चौड़ाई और चारों दिशाओं के अंतिम भौगोलिक छोर (तालिका सहित)।
  4. कर्क रेखा व भारतीय मानक समय (IST): कर्क रेखा पर स्थित 8 राज्य और जलवायुविक महत्व। 82°30′ पूर्वी देशान्तर (IST) मिर्जापुर से गुजरने के नियम और 2 घंटे के समय अंतराल की वैज्ञानिक व्याख्या।
  5. सामरिक एवं भू-राजनैतिक महत्व: हिंद महासागर में केंद्रीय स्थिति, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण, हिमालय की रक्षात्मक भूमिका, प्रायद्वीपीय तटरेखा का महत्व।
  6. निष्कर्ष: भारत की अद्वितीय अवस्थिति का वैश्विक राजनीति में महत्व।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • विष्णु पुराण का श्लोक: उत्तर लिखते समय श्लोक “उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्…” अवश्य लिखें। यह उत्तर की गुणवत्ता को बहुत उच्च बनाता है।
  • अक्षांशीय विस्तार: स्पष्ट करें कि मुख्य भूमि 8°4′ N से 37°6′ N के बीच है, लेकिन संपूर्ण भारत (अंडमान सहित) 6°45′ N से शुरू होता है। कुल देशान्तरीय विस्तार (68°7′ E से 97°25′ E) के कारण भारत के पूर्वी (अरुणाचल) और पश्चिमी (गुजरात) स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर आता है, जिसे 82°30′ E मानक समय रेखा द्वारा संतुलित किया गया है।
  • नवीनतम आंकड़े: भारत की कुल तटीय सीमा को पुराने आंकड़ों (7516 किमी) के स्थान पर NHO देहरादून के नवीनतम जीआईएस-आधारित आंकड़े (11,098.81 किमी) के रूप में उद्धृत करें।
  • सामरिक महत्व: हिंद महासागर के शीर्ष पर स्थित होने के कारण भारत मलक्का जलडमरूमध्य और स्वेज नहर के मध्य आने वाले सभी प्रमुख जहाजरानी मार्गों पर नियंत्रण रख सकता है। इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ का दर्जा प्राप्त है।

Q42. भारत को प्रमुख भौतिक प्रदेशों में विभाजित कीजिए और हिमालय पर्वतीय प्रदेश की समानांतर श्रेणियों तथा प्रादेशिक वर्गीकरण का विस्तृत विवरण दीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: भारत के उच्चावच की विविधता (मैदान, पठार, पहाड़)। प्लेट विवर्तनिकी से हिमालय की उत्पत्ति।
  2. भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण: भारत के 6 प्रमुख भौतिक प्रदेशों की सूची।
  3. उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी पर्वतमाला (हिमालय): समानांतर श्रेणियों के आधार पर विस्तृत वर्णन:
    • (क) बृहद हिमालय या हिमाद्रि (Great Himalayas)
    • (ख) लघु या मध्य हिमालय (Lesser Himalayas)
    • (ग) बाह्य हिमालय या शिवालिक (Shiwalik)
    • (घ) ट्रांस-हिमालय (Trans-Himalayas)
    • (ङ) पूर्वांचल की पहाड़ियाँ (Purvachal Hills)
  4. सिडनी बुरार्ड का प्रादेशिक वर्गीकरण (नदी घाटियों के आधार पर):
    • पंजाब हिमालय, कुमाऊं हिमालय, नेपाल हिमालय और असम हिमालय (तुलनात्मक तालिका)।
  5. हिमालय का भौगोलिक व आर्थिक महत्व: मानसून को रोकना, नदियों का उद्गम, पर्यटन और औषधियाँ।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • बृहद हिमालय (औसत ऊंचाई 6000 मीटर): इसमें कंचनजंगा (8586 मी), माउंट एवरेस्ट (8848.86 मी) जैसी चोटियों का वर्णन करें। यह सदैव हिमाच्छादित रहता है।
  • लघु हिमालय (3700-4500 मीटर): पीर पंजाल, धौलाधर श्रेणियों का उल्लेख करें। यहाँ कश्मीर घाटी, कुल्लू घाटी और ‘मर्ग’ व ‘बुग्याल’ चरागाह पाए जाते हैं।
  • शिवालिक (900-1100 मीटर): यह सबसे नवीन श्रेणी है। इसके व लघु हिमालय के बीच ‘दून’ (देहरादून) और ‘द्वार’ (हरिद्वार) घाटियां पाई जाती हैं।
  • प्रादेशिक वर्गीकरण तालिका:
    • पंजाब हिमालय: सिंधु से सतलुज (560 किमी) – जाफरान की खेती के लिए ‘करेवा’ मिट्टी।
    • कुमाऊं हिमालय: सतलुज से काली (320 किमी) – नंदा देवी सर्वोच्च चोटी।
    • नेपाल हिमालय: काली से तीस्ता (800 किमी) – सर्वाधिक ऊँचा भाग (एवरेस्ट)।
    • असम हिमालय: तीस्ता से दिहांग (720 किमी)।

Q43. उत्तर भारत के विशाल मैदान का भौतिक (भाबर, तराई, बांगर, खादर) एवं प्रादेशिक वर्गीकरण सविस्तार समझाइए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: मैदान का निर्माण, सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ अवसादों से विकास। लंबाई, चौड़ाई और गहराई।
  2. भौतिक लक्षणों के आधार पर विभाजन:
    • (क) भाबर क्षेत्र: कंकड़-पत्थर, नदियों का अदृश्य होना।
    • (二) तराई क्षेत्र: दलदली भाग, सघन वन, नदियों का पुनः प्रकट होना।
    • (ग) बांगर क्षेत्र: पुरानी जलोढ़, कंकड़ ग्रंथियाँ, बाढ़ रहित उच्च भूमि।
    • (घ) खादर क्षेत्र: नवीन जलोढ़, अत्यधिक उपजाऊ, प्रतिवर्ष नवीनीकृत बाढ़ के मैदान।
  3. बांगर और खादर की विस्तृत तुलनात्मक तालिका।
  4. प्रादेशिक/क्षेत्रीय विभाजन:
    • राजस्थान का मैदान (लूनी नदी, प्लाया झीलें), पंजाब-हरियाणा का मैदान (दोआब क्षेत्र), गंगा का मैदान (ऊपरी, मध्य, निचला मैदान), और ब्रह्मपुत्र का मैदान (माजुली द्वीप का उल्लेख)।
  5. मैदान का आर्थिक महत्व: भारत का ‘अन्न का कटोरा’, सघन जनसंख्या, परिवहन और औद्योगिक विकास।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • भाबर और तराई: शिवालिक के गिरिपद ढाल पर नदियां बड़े-बड़े पत्थर जमा कर देती हैं जिसे भाबर कहते हैं। यहाँ पानी पत्थरों के नीचे बहता है। इसके ठीक दक्षिण में तराई है जहाँ पानी पुनः धरातल पर आकर दलदल बनाता है।
  • बांगर और खादर तुलना: परीक्षा में इस अंतर को स्पष्ट करने के लिए तालिका (Table) बनाना अत्यंत आवश्यक है (मृदा आयु, उर्वरता, स्थान और संरचना के आधार पर)।
  • दोआब: पंजाब के मैदान में दो नदियों के बीच के क्षेत्र ‘दोआब’ (जैसे बारी दोआब, बिस्त दोआब) का उल्लेख अवश्य करें।

Q44. प्रायद्वीपीय पठार की भूवैज्ञानिक संरचना, इसके मुख्य उप-विभागों और पश्चिमी घाट बनाम पूर्वी घाट का विस्तृत तुलनात्मक विवरण दीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: प्राचीन गोंडवानालैंड का हिस्सा, कठोर क्रिस्टलीय आग्नेय और रूपांतरित चट्टानें, त्रिभुजाकार आकृति।
  2. भूगर्भीय संरचना: दक्कन ट्रैप का निर्माण (ज्वालामुखी दरारी उद्भेदन से लावा जमाव), काली मिट्टी का विकास।
  3. पठार के मुख्य उप-विभाग:
    • (क) मध्य उच्च भूमि: मालवा पठार, बुंदेलखंड, बघेलखंड और छोटानागपुर पठार (खनिज संपदा)। मालदा गैप द्वारा पृथक शिलॉन्ग/मेघालय का पठार।
    • (ख) दक्कन का पठार: सतपुड़ा, महादेव, मैकाल श्रेणियों से दक्षिण का पठार।
  4. पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्वी घाट का विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन (विस्तृत तालिका सहित)।
  5. प्रायद्वीपीय पठार का आर्थिक महत्व: भारत के खनिजों का भंडार (छोटानागपुर), कपास कृषि, जलविद्युत क्षमता (तीव्र बहते जलप्रपात), और वन संपदा।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • छोटानागपुर पठार: इसे भारत का ‘रूर प्रदेश’ (Ruhr of India) कहा जाता है क्योंकि यहाँ कोयला, लोहा, अभ्रक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • मालदा गैप: यह स्पष्ट करें कि मेघालय का पठार प्रायद्वीपीय पठार का ही हिस्सा है जो राजमहल पहाड़ियों से मालदा गैप (गंगा-ब्रह्मपुत्र के अवसादों से भरा गर्त) द्वारा अलग हो गया है।
  • घाटों की तुलना: पश्चिमी घाट सतत है, औसत ऊंचाई 900-1600 मीटर है, सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी है। पूर्वी घाट विच्छिन्न है, औसत ऊंचाई 600 मीटर है, सर्वोच्च शिखर महेंद्रगिरी है।

Q45. हिमालयी अपवाह तंत्र और प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र की विस्तृत तुलना कीजिए तथा सिंधु नदी तंत्र का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: भारत के अपवाह तंत्र का वर्गीकरण। जल विभाजक की संकल्पना (अरावली व अंबाला उच्च भूमि)।
  2. हिमालयी बनाम प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र: तुलनात्मक अध्ययन (उद्गम, प्रवाह प्रकृति, नदी की अवस्था, घाटियों के आकार, मार्ग परिवर्तन, डेल्टा निर्माण के आधार पर तालिका)।
  3. सिंधु नदी तंत्र (Indus River System) का विस्तृत विवरण:
    • उद्गम (मानसरोवर झील के पास बोखर चू हिमनद), कुल लंबाई (2880 किमी), भारत में विस्तार।
    • सिंधु की पाँच मुख्य सहायक नदियां (पंचनद): झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलुज का पृथक-पृथक उद्गम और महत्व।
  4. सिंधु जल समझौता (1960): भारत और पाकिस्तान के बीच जल बँटवारे के नियम।
  5. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • अपवाह तंत्र की तुलना तालिका: यह दर्शाना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हिमालय की नदियां बारहमासी (Perennial) और युवा हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियां मौसमी (Seasonal) और प्रौढ़ हैं।
  • पंचनद विवरण:
    • झेलम: पीर पंजाल के वेरीनाग से निकलती है, श्रीनगर और वूलर झील से बहती है।
    • चेनाब: चंद्रा और भागा के मिलने से बनती है, सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
    • सतलुज: तिब्बत के राक्षस ताल से निकलती है, शिपकी ला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। इस पर भाखड़ा-नांगल परियोजना स्थित है।

Q46. गंगा नदी तंत्र का उसकी सहायक नदियों, उद्गम और अपवाह क्षेत्र सहित विस्तृत भौगोलिक विवरण दीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: भारत का सबसे बड़ा और पवित्र नदी तंत्र। अपवाह क्षेत्र का विस्तार।
  2. गंगा का उद्गम और मिलाप (पंच प्रयाग की संकल्पना):
    • भागीरथी (गंगोत्री) और अलकनंदा (सतोपंथ) का देवप्रयाग में मिलन।
    • पंच प्रयाग तालिका: विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग।
  3. गंगा नदी का प्रवाह मार्ग और सहायक नदियां:
    • (क) बाएं किनारे की सहायक नदियां (उत्तर से मिलने वाली): रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी (बिहार का शोक), महानंदा।
    • (ख) दाएं किनारे की सहायक नदियां (दक्षिण से मिलने वाली): यमुना (यमुनोत्री से उद्गम, प्रयागराज में मिलन), सोन नदी (अमरकंटक से उद्गम)।
  4. गंगा का अंतिम प्रवाह (बांग्लादेश में प्रवेश): पद्मा नाम, जमुना (ब्रह्मपुत्र) के साथ मिलकर सुंदरवन डेल्टा (विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा) का निर्माण।
  5. गंगा नदी का आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व: नमामि गंगे परियोजना का उल्लेख।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • पंच प्रयाग की संकल्पना: उत्तर में पंच प्रयाग का स्पष्ट रेखाचित्र (Flowchart) बनाएं:
    • धौलीगंगा + अलकनंदा = विष्णुप्रयाग
    • नंदाकिनी + अलकनंदा = नंदप्रयाग
    • पिंडार + अलकनंदा = कर्णप्रयाग
    • मंदाकिनी + अलकनंदा = रुद्रप्रयाग
    • भागीरथी + अलकनंदा = देवप्रयाग (गंगा)
  • कोसी नदी: इसे ‘बिहार का शोक’ क्यों कहते हैं? क्योंकि यह हिमालय से भारी मात्रा में अवसाद लाती है जिससे इसका मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और यह अत्यधिक विसर्प (Meanders) बनाती हुई अचानक मार्ग बदल लेती है, जिससे भयानक बाढ़ आती है।

Q47. भारतीय मानसून की उत्पत्ति से संबंधित आधुनिक ‘जेट स्ट्रीम सिद्धांत’ की वैज्ञानिक व्याख्या कीजिए। यह पारंपरिक सिद्धांतों से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: भारतीय मानसून की जटिलता। पारंपरिक तापीय सिद्धांत (एडमंड हैली) की सीमाएं।
  2. जेट स्ट्रीम सिद्धांत (Jet Stream Theory) का परिचय: प्रतिपादक (यीन एवं पी. कोटेश्वरम)। ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण का महत्व।
  3. शीतकालीन तंत्र (Winter Mechanism): उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम का प्रभाव। हिमालय द्वारा इसका दो शाखाओं (उत्तरी और दक्षिणी शाखा) में विभाजन। उत्तर-पश्चिम भारत पर उच्च वायुदाब का बनना।
  4. ग्रीष्मकालीन तंत्र (Summer Mechanism) – मानसून का आगमन:
    • सूर्य का उत्तरायण होना और पश्चिमी जेट स्ट्रीम का हिमालय के उत्तर में खिसकना।
    • तिब्बत के पठार का तापीय प्रभाव (ऊपरी वायुमंडल में तापीय प्रतिचक्रवात का बनना)।
    • उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (पूर्वा जेट) का विकास। मस्करीन हाई (Mascarene High) पर हवा का अवतलन और दक्षिण-पश्चिम मानसून का तीव्र प्रस्फोट (Burst of Monsoon)।
  5. पारंपरिक सिद्धांतों से भिन्नता/श्रेष्ठता: यह धरातलीय हवाओं के साथ-साथ ऊपरी वायुमंडल के अंतर्संबंधों को वैज्ञानिक रूप से समझाता है।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • तिब्बत का पठार का तापीय प्रभाव: ग्रीष्मकाल में तिब्बत का शुष्क और ऊँचा पठार अत्यधिक गर्म हो जाता है। यह एक ‘थर्मल इंजन’ की तरह कार्य करता है। यहाँ से उठने वाली गर्म हवाएं क्षोभमंडल के ऊपरी भाग (10-12 किमी की ऊंचाई) में दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हैं और ‘पूर्वी जेट स्ट्रीम’ का रूप ले लेती हैं।
  • मस्करीन हाई: पूर्वी जेट स्ट्रीम मेडागास्कर के निकट हिंद महासागर में ‘मस्करीन हाई’ (Mascarene High) नामक उच्च वायुदाब क्षेत्र पर नीचे बैठती है। यह हवा नीचे बैठकर धरातल पर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों को आगे की ओर धकेलती है जिससे मानसून तीव्र गति से भारत में प्रवेश करता है।

Q48. कोपेन के अनुसार भारत के जलवायु प्रदेशों का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा इसके गुणों और सीमाओं की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: व्लादिमीर कोपेन का परिचय, वनस्पति और जलवायु का अंतर्संबंध (“वनस्पति जलवायु का सर्वोत्तम सूचक है”)।
  2. वर्गीकरण के संकेताक्षर: बड़े अक्षरों (A, B, C, D, E) और छोटे अक्षरों (f, m, w, s, g, h, c) के अर्थों की व्याख्या।
  3. कोपेन के अनुसार भारत के 9 जलवायु प्रदेश (सटीक मास्टर तालिका और रेखाचित्र हेतु निर्देश):
    • Amw, As, Aw, Bshw, Bwhw, Cwg, Dfc, Et, E का भौगोलिक विस्तार और मुख्य विशेषताएं।
  4. कोपेन के वर्गीकरण की आलोचनात्मक समीक्षा:
    • गुण (Merits): अनुभवजन्य, सरल संकेताक्षर, वनस्पति का तार्किक संबंध, वैश्विक तुलनात्मकता।
    • सीमाएं (Limitations): उच्चावच की उपेक्षा, वायुदाब व चक्रवातों के गतिक कारकों की अवहेलना, सूत्रों की जटिलता।
  5. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • Amw (लघु शुष्क ऋतु वाला मानसून): मालाबार तट (केरल) पर पाया जाता है, जहाँ वर्षा 300 सेमी से अधिक होती है।
  • As (शुष्क ग्रीष्म ऋतु मानसून): तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर, जहाँ शीतकाल में उत्तर-पूर्वी मानसून से वर्षा होती है और ग्रीष्मकाल शुष्क रहता है।
  • Cwg (शुष्क शीत ऋतु – गंगा तुल्य): उत्तर भारत के संपूर्ण विशाल मैदान को आच्छादित करता है। सबसे गर्म महीना जून संक्रांति से पहले मई में होता है।
  • महत्वपूर्ण परीक्षा टिप: उत्तर लिखते समय संकेतों के छोटे-बड़े अक्षरों की शुद्धता (जैसे Amw न कि AMW) का विशेष ध्यान रखें।

Q49. भारत की मिट्टियों का ICAR के अनुसार वर्गीकरण कीजिए तथा जलोढ़, काली और लैटेराइट मिट्टी की विशेषताओं, वितरण एवं आर्थिक महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: मृदा निर्माण के कारक (चट्टान, जलवायु, समय, जैविक पदार्थ)। pH मान की संकल्पना (6.5 pH अनुकूलतम मान)।
  2. ICAR का वर्गीकरण: वर्ष 1953 में स्थापित संगठन द्वारा भारत की मिट्टियों का 8 प्रमुख प्रकारों में वर्गीकरण।
  3. तीन प्रमुख मिट्टियों का सविस्तार विश्लेषण:
    • (क) जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil): निर्माण, प्रकार (बांगर व खादर तालिका), वितरण, रासायनिक गुण (पोटाश प्रचुर, नाइट्रोजन व ह्यूमस न्यून), अनुकूल फसलें।
    • (ख) काली मिट्टी (Black/Regur Soil): निर्माण (बेसाल्ट लावा से), जल धारण क्षमता, स्वतः जुताई की प्रकृति (दरारें पड़ना), रासायनिक गुण (लोहा व चूना प्रचुर), कपास हेतु महत्व।
    • (ग) लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soil): लैटिन शब्द ‘Later’ (ईंट), निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया से निर्माण, वितरण (पश्चिमी घाट, मेघालय), काजू व चाय की कृषि हेतु महत्व।
  4. भारतीय मिट्टियों की समस्याएं और संरक्षण के वैज्ञानिक उपाय: मृदा अपरदन (‘रेंगती हुई मृत्यु’), लवणीकरण, समोच्च जुताई, फसल चक्रण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना।
  5. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • काली मिट्टी का काला रंग: यह ‘टिटेनीफेरस मैग्नेटाइट’ और लौह-यौगिकों की उपस्थिति के कारण होता है।
  • निक्षालन (Leaching): लैटेराइट मिट्टी के संदर्भ में स्पष्ट करें कि भारी वर्षा से सिलिका बह जाती है और केवल लोहे व एल्युमिनियम के ऑक्साइड बचते हैं, जिससे यह मिट्टी सूखने पर ईंट जैसी कठोर हो जाती है।
  • मृदा संरक्षण: समोच्च रेखीय जुताई (Contour Farming), पट्टिका कृषि (Strip Cropping) और रक्षक मेखला (Shelter Belts) जैसे वैज्ञानिक उपायों को परिभाषित करें।

Q50. भारत की प्राकृतिक वनस्पति (वनों) के प्रमुख प्रकारों, उनके वितरण और राष्ट्रीय वन नीतियों (1952/1988) के प्रमुख लक्ष्यों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर की आदर्श रूपरेखा (Outline):

  1. प्रस्तावना: प्राकृतिक वनस्पति (‘अक्षत वनस्पति’) की संकल्पना। स्थानिक बनाम विदेशी प्रजातियाँ।
  2. भारत की प्राकृतिक वनस्पति के 5 प्रमुख वर्ग (जलवायु और वर्षा के आधार पर):
    • (क) उष्णकटिबंधीय सदाबहार एवं अर्ध-सदाबहार वन
    • (ख) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती या मानसूनी वन (भारत का सबसे बड़ा वन समूह)
    • (ग) उष्णकटिबंधीय कंटीले वन एवं झाड़ियाँ (मरुद्भिद अनुकूलन)
    • (घ) पर्वतीय वन (हिमालयी ऊर्ध्वाधर कटिबंध बनाम दक्षिण के ‘शोलास’ वन)
    • (ङ) मैंग्रोव या ज्वारीय वन (न्यूमैटोफोर/श्वसन जड़ें, सुंदरवन डेल्टा)
  3. वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण: आरक्षित वन (53%), संरक्षित वन (29%), और अवर्गीकृत वन (18%) (तालिका सहित)।
  4. राष्ट्रीय वन नीतियां (1952 और 1988): कुल क्षेत्रफल के 33% भाग पर वनों का अनिवार्य लक्ष्य (पहाड़ों में 60%, मैदानों में 25%)।
  5. वन संरक्षण के सामाजिक प्रयास: सामाजिक वानिकी, सामुदायिक वानिकी और कृषि वानिकी की संकल्पना।
  6. निष्कर्ष।

मुख्य परीक्षा बिंदु (विस्तृत विवरण):

  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन: यह भारत का सबसे विस्तृत वन समूह है। ये वृक्ष ग्रीष्मकाल की शुरुआत में जल की हानि रोकने के लिए 6 से 8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। इनमें सागवान (टीक), साल, चंदन जैसी कीमती लकड़ियाँ पाई जाती हैं।
  • न्यूमैटोफोर (Pneumatophores): मैंग्रोव वनों के संदर्भ में स्पष्ट करें कि दलदली मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण पौधों की जड़ें खूँटी की तरह जमीन से बाहर हवा में निकल आती हैं, जिन्हें श्वसन जड़ें या न्यूमैटोफोर कहते हैं।
  • शोलास (Sholas): दक्षिण भारत की पहाड़ियों (नीलगिरी, अन्नामलाई) पर पाए जाने वाले शीतोष्ण पर्वतीय वनों को स्थानीय रूप से ‘शोलास’ कहा जाता है।

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