Manav Tantra मानव तंत्र

Manav Tantra मानव तंत्र

Manav Tantra मानव तंत्र

शरीर = हमारे शरीर की सबसे छोटी क्रियात्मक इकाई कोशिका तथा कोशिकाओं के समूह उत्तर कहलाते हैं उत्तक मिलकर अंग बनाते हैं अंग मिलकर तंत्र बनाते हैं तथा शरीर के सारे तंत्र मिलकर मानव शरीर की रचना करते हैं

वह तंत्र जहां पर पाचन की क्रिया संपन्न होती है पाचन तंत्र कहलाता है
जटिल भोज्य पदार्थों को सरल पदार्थों में रूपांतरित करने की प्रक्रिया पाचन कहलाती है
जटिल पदार्थ शरीर द्वारा अवशोषित नहीं हो पाते हैं इसलिए इनका सरल पदार्थों में बदलना आवश्यक है
पाचन की क्रिया में विभिन्न एंजाइम की सहायता से जटिल को सरल में बदला जाता है
आहार नली
इसका पहला भाग मुख होता है
आहार नली की लंबाई 8 से 10 मीटर होती है
आहार नली के तीन कार्य है
आहर का पाचन
पचित आहार का अवशोषण
आहार को मुख से मलद्वार तक पहुंचाना
ग्रंथियों के द्वारा विभिन्न प्रकार के एंजाइम आहार नली में भेजे जाते हैं जो भोजन का पाचन करते हैं
विभिन्न स्तरों पर संवरणी पेशिया भोजन भोजन रस तथा अपशिष्ट की गति को नियंत्रित करती है
आहार नाल के अंग
मुख
मुख के द्वारा भोजन को ग्रहण किया जाता है
आहार नाल का अग्र भाग जो कटोरे नुमा मुख गुहा में खुलता है
मुख गुहा को आगे दो मसल हॉट आंतरिक ऊपरी कठोर तालु में निचले कोमल तालु इसे अंदर से गिरा रहता है
मुख गुहा में दांत और जीभ पाई जाती है
जीभ
मुख गुहा के चारो और गति करने वाला कैसे अंग जो फर्स्ट भाग में आधार तल से 1 जिले से जुड़ा होता है जिसे फ्रैनुलम लिंगुअल या जीहवा फ्रैनुलम कहते हैं
जीभ की ऊपरी सतह पर स्वाद कलिका ए पाई जाती है जो खट्टा मीठा नमकीन तथा कड़वे स्वाद का ज्ञान कराती है
दाँत
दांत मसूड़ों में धसे होते हैं इस कारण यह गर्तदंती कहलाते हैं
मनुष्य के जीवन काल में दो प्रकार के दांत आते हैं अतः इसे द्विबार दंती कहते हैं
छोटे बच्चों में अस्थाई दांत पाए जाते हैं जो बाद में स्थाई हो जाते हैं
कार्य के आधार पर दातों को चार भागों में बांटा गया है
कृंतक
रदनक
अग्र चवणृक
चवणृक
कृंतक दाँत सबसे आगे के दांत होते हैं जो कुतरने तथा काटने का कार्य करते हैं यह छह महा की उम्र में निकलते हैं
चवणृक यह दांत भी भोजन चबाने में सहायक होते हैं प्रथमतः यह 12 से 15 महा की उम्र में निकलते हैं प्रत्येक जबड़े में 6 – 6 पाए जाते हैं। 

 

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