बागोर सभ्यता (भीलवाड़ा) का संपूर्ण इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्य | Rajasthan CET 2026
राजस्थान CET 2026 परीक्षा की दृष्टि से ‘बागोर सभ्यता’ (Bagore Civilization) अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े और प्रमुख ‘मध्यपाषाण कालीन’ (Mesolithic Age) स्थलों में से एक है। आइए बागोर सभ्यता के उन सभी तथ्यों को विस्तार से समझते हैं जो सीधे परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
बागोर सभ्यता की स्थिति और नदी:
- जिला: यह सभ्यता राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित है।
- नदी: यह सभ्यता कोठारी नदी (Kothari River) के किनारे विकसित हुई।
- टीले का नाम: बागोर में जिस स्थान (टीले) पर खुदाई की गई, उसे स्थानीय भाषा में ‘महासतियों का टीला’ (Maha Satiyan) कहा जाता है।
खोज और उत्खनन (Discovery & Excavation):
- इस स्थल का उत्खनन 1967 से 1969 ई. के बीच वी. एन. मिश्र (V. N. Misra) और जर्मनी के डॉ. एल. एस. लेश्निक (L.S. Leshnik) के निर्देशन में किया गया।
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बागोर सभ्यता के प्रमुख साक्ष्य और विशेषताएं (Key Findings – परीक्षा के लिए रट लें!):
- पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य: बागोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ से भारत में पशुपालन (Animal Husbandry) के सबसे प्राचीन प्रमाण मिले हैं (मध्य प्रदेश के आदमगढ़ के साथ)। यहाँ के लोग मुख्य रूप से भेड़, बकरी, गाय और सूअर पालते थे।
- सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths): यह एक मध्यपाषाण कालीन सभ्यता है, इसलिए यहाँ से पत्थर के बहुत छोटे और नुकीले औजार (Microliths) भारी मात्रा में मिले हैं।
- कृषि के साक्ष्य: पशुपालन के साथ-साथ बागोर से कृषि करने के भी प्रारंभिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
- तांबे के उपकरण: पाषाण (पत्थर) काल का होने के बावजूद, बाद के चरणों में यहाँ से तांबे के 5 उपकरण भी मिले हैं, जिनमें एक छेद वाला बाणाग्र (तीर का आगे का हिस्सा) और एक सुई प्रमुख है।
- आवास और फर्श: बागोर के लोग मुख्य रूप से शिकार और पशुपालन पर निर्भर थे, लेकिन उन्होंने पत्थरों के मकान बनाना शुरू कर दिया था। यहाँ के मकानों के फर्श पत्थरों को बिछाकर बनाए जाते थे।
- शवाधान (अंतिम संस्कार): यहाँ मृतकों को घर के अंदर ही पूर्व-पश्चिम दिशा में दफनाया जाता था। शवों के साथ खाद्य सामग्री और हथियार भी रखे जाते थे।
निष्कर्ष:
परीक्षा में बागोर सभ्यता से 90% बार यही सवाल पूछा जाता है कि “राजस्थान में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?” इसका उत्तर बागोर है। इसके अलावा कोठारी नदी और ‘महासतियों का टीला’ भी महत्वपूर्ण बिंदु हैं।
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इसके साथ ही राजस्थान की 5 सबसे प्रमुख प्राचीन सभ्यताएं (कालीबंगा, आहड़, गणेश्वर, बैराठ और बागोर) पूरी हो गई हैं!
क्या हम इस सीरीज़ को आगे बढ़ाते हुए कुछ अन्य छोटे लेकिन महत्वपूर्ण स्थलों (जैसे रंगमहल, पीलीबंगा, नगरी) का एक कंबाइंड (Combined) पोस्ट तैयार करें या सिलेबस के अगले मुख्य भाग “प्रमुख शासक और उनकी उपलब्धियां (मेवाड़/मारवाड़ आदि)” की ओर बढ़ें?