आहड़ सभ्यता: ताम्रवती नगरी का संपूर्ण इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्य | Rajasthan CET 2026
कंटेंट (Content):
राजस्थान CET 2026 परीक्षा में प्राचीन सभ्यताओं से हमेशा सवाल आते हैं। कालीबंगा के बाद, सबसे महत्वपूर्ण सभ्यता ‘आहड़ सभ्यता’ (Ahar Civilization) है। यह 4000 वर्ष पुरानी एक ताम्रपाषाण कालीन (Copper-Stone Age) सभ्यता है। आइए इसके उन सभी तथ्यों को समझते हैं जो सीधे परीक्षा में पूछे जाते हैं।
आहड़ सभ्यता की स्थिति और अन्य नाम:
- स्थान: यह सभ्यता वर्तमान उदयपुर जिले में आयड़ (बेड़च) नदी के किनारे स्थित है।
- अन्य नाम (उपनाम):
- प्राचीन शिलालेखों में इसे ‘ताम्रवती नगरी’ (तांबे वाली जगह) कहा गया है।
- 10वीं और 11वीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ या ‘आघाट दुर्ग’ कहा जाता था।
- स्थानीय लोग इसे ‘धूलकोट’ (मिट्टी का टीला) कहते हैं।
- एच.डी. सांकलिया ने इसे ‘बनास संस्कृति’ (Banas Culture) का नाम दिया।
- इसे ‘मृतकों के टीलों की सभ्यता’ भी कहा जाता है।
खोज और उत्खनन (Discovery & Excavation):
इस स्थल का उत्खनन मुख्य रूप से चार चरणों में हुआ:
- 1953: अक्षयकीर्ति व्यास (सर्वप्रथम खोज और उत्खनन)
- 1954-1956: रतन चन्द्र अग्रवाल (R.C. Agrawal) ने व्यापक स्तर पर खुदाई की।
- 1961-62: एच. डी. सांकलिया (H.D. Sankalia) और वी.एन. मिश्र के निर्देशन में उत्खनन।
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आहड़ सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ और प्राप्त साक्ष्य (Key Findings):
- ग्रामीण सभ्यता: कालीबंगा (जो एक नगरीय सभ्यता थी) के विपरीत, आहड़ मूलतः एक ग्रामीण संस्कृति (Rural Civilization) थी। यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन था (गेहूं, ज्वार, और चावल की खेती)।
- गोरे और कोठे (अनाज के पात्र): यहाँ अनाज सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी के बड़े-बड़े बर्तन (मृदभांड) मिले हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘गोरे या कोठे’ कहा जाता था।
- संयुक्त परिवार प्रथा: यहाँ एक ही मकान में 4 से 6 बड़े चूल्हे मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यहाँ बड़े या संयुक्त परिवार एक साथ रहते थे या सामूहिक भोज होते थे।
- तांबा उद्योग: आहड़वासी तांबा गलाना जानते थे। यहाँ से तांबा गलाने की भट्टियाँ, कुल्हाड़ियाँ, चूड़ियाँ और अंगूठियाँ भारी मात्रा में मिली हैं। तांबे की अधिकता के कारण ही इसे ताम्रवती नगरी कहा गया।
- लाल और काले मृदभांड: यहाँ से उल्टी तिपाई विधि से पकाए गए काले और लाल रंग के मिट्टी के बर्तन (Black and Red Ware) प्राप्त हुए हैं।
- मुद्राएँ और मुहरें: यहाँ से 6 तांबे की यूनानी मुद्राएँ और 3 मुहरें मिली हैं। एक मुद्रा पर यूनानी देवता अपोलो का चित्र है जिनके हाथ में त्रिशूल है।
- शवाधान (अंतिम संस्कार): यहाँ मृतकों को गहनों और कपड़ों के साथ दफनाया जाता था। शव का सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा की ओर रखे जाते थे।
- बनासियन बुल: यहाँ से मिट्टी की बनी हुई बैल की मूर्ति मिली है जिसे ‘बनासियन बुल’ (Banasian Bull) कहा गया है।
निष्कर्ष:
आहड़ सभ्यता राजस्थान की ताम्रयुगीन संस्कृतियों में सबसे प्रमुख है। इसके उपनाम (धूलकोट, ताम्रवती), अनाज रखने के बर्तन (गोरे-कोठे) और 6 चूल्हों के साक्ष्य CET परीक्षा के सबसे पसंदीदा प्रश्न हैं।
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